दक्षिण भारत के सर सय्यद और बाबा-ए-तालीम डॉ मुमताज़ अहमद ख़ाँ साहब हमारे लिये मशअले राह (मार्ग दर्शक) हैं
कलीमुल हफ़ीज़
इन्सान को ख़ालिक़-ए-कायनात ने ज़मीन...
मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना सिर्फ इतना बताना है कि बटला हाउस एनकाउंटर आज तक सवालों के घेरों मे है, इस एनकाउंटर की जांच की मांग को लेकर अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, विरोध प्रदर्शन का यह सिलसिला उस वक्त शुरु हुआ जब आज़मगढ़ को आतंकगढ़ कहा जाने लगा, आज़मगढ़ से लखनऊ और लखनऊ से दिल्ली तक हर साल इस एनकाउंटर की जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन इसकी जांच नहीं कराई गई, इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को गोली कैसे लगी इसकी भी जांच नहीं हो सकी, अब निचली अदालत ने मोहन शर्मा की हत्या के लिए आरिज खान को दोषी पाया है।
यह अलग बात है की राजनीती के मैदान में आज बीजेपी तथा कांग्रेस एक दुसरे के धुर विरोधी के रूप में देखे जा रहा है , और कांग्रेस को गांधीवादी तथा बीजेपी को सावरकर या गोडसेवादी सोच का प्रचारक और संगरक्षक कहा जा रहा है , और किसी हद तक ऐसा है भी और होने में हर्ज भी क्या है सबको अपनी विचार धारा को प्रचारित करने का अधिकार है, बशर्त यह के इस विचार धारा से देश की एकता , संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा न हो .हमारे संविधान ने हर मज़हब को उसके प्रचार प्रसार की आज़ादी दी है .