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हिन्दू क्रिसमस न मनाएँ: विश्व हिन्दू परिषद का आव्हान

हिन्दू क्रिसमस न मनाएँ: विश्व हिन्दू परिषद का आव्हान

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की प्रसिद्ध स्तंभकार तवलीन सिंह के अनुसार, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने हिन्दुओं से अपील की है कि वे ईसाइयों के त्यौहार क्रिसमस में शामिल न हों.तवलीन सिंह ने बताया कि विहिप ने यह आव्हान दिल्ली के अपने कार्यालय से किया है। विहिप, आरएसएस की एक शाखा है।  यह पूछे जाने पर कि क्या यह आव्हान भारतीय संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरूद्ध नहीं है विहिप के प्रवक्ता ने कहा कि यह आव्हान धर्म के बारे में नहीं बल्कि धर्मपरिवर्तन के बारे में है। यदि विहिप मॉलों या दुकानों में क्रिसमस पर विशेष आयोजन या सजावट देखेगी तो वह उनके खिलाफ कार्यवाही करेगी। पर वास्तविकता यह है कि बड़ी संख्या में दुकानें और माल क्रिसमस के लिए विशेष तैयारी करते हैं।  दुकानों और मालों को सजाया जाता है। विहिप के इस आव्हान का कोई खास असर होने वाला नहीं है . यह भी हो सकता है कि आरएसएस अपनी शाखा बजरंग दल को आदेश दे कि वह मैदान में उतरकर सुनिश्चित करे कि ईसाई त्यौहार में हिन्दू शामिल न हों। शिवसेना ने कुछ सालों पूर्व वेलेंटाइन्स-डे पर प्रतिबंध लगाया था। मैंने स्वयं कुछ वर्ष पहले एक नवयुवती को पुलिस से छुड़ाया था क्योंकि वह एक अन्य राज्य से अपनी प्रेमी से मिलने भोपाल आई थी लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इस तरह की प्रवृत्तियां हमारे भारत की उदार संस्कृति और सभ्यता के विरूद्ध हैं और इनका विरोध होना चाहिए। भोपाल में भी विहिप ने शिक्षण संस्थाओं से आव्हान किया है कि वे हिन्दू विद्यार्थियों को सांता क्लॉज की भूमिका अदा करने से रोकें। यदि शिक्षण संस्थाएँ ऐसा नहीं करतीं तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। विहिप ने कहा कि ज्यादातर हिन्दू ईसाईयों के त्यौहार में शामिल होते हैं परंतु इसे गलत तरीके से लिया जाता है।

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वाजपेयी जी ऐसे प्रधानमंत्री

वाजपेयी जी ऐसे प्रधानमंत्री

प्रो. जसीम मोहम्मद अटल जी को याद करते हुए: वह प्रधानमंत्री जिसने भारतीय राजनीति को मानवीय बनाया वाजपेयी जी ऐसे प्रधानमंत्री, जिन्होंने भारतीय राजनीति को सुदृढ़ मानवीय स्वरूप दिया (अटलविहारी वाजपेयी  की 101 वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए) भारतीय राजनीति के ...

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साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और ‘कर्तव्यों और अधिकारों‘ की अवधारणा

साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और ‘कर्तव्यों और अधिकारों‘ की अवधारणा

  –राम पुनियानी सामंती समाज से आधुनिक उ़़द्योगों और समानता पर आधारित लोकतांत्रिक समाज बनने की भारत की यात्रा की ...

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अपुन को क्या?

अपुन को क्या?

✍️ वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद अग्रवाल असली नोटों से उद्योग पतियों की ऋण माफी और नकली नोटों से बाजार का संचालन ...

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