बीजेपी को कैसे हराया जाये ?बीजेपी को क्यों हराया जाए ?

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बीजेपी को हराने की नहीं , जनता के दिलों को जीतने की योजना बनाये विपक्ष

Ali Aadil Khan Editor’s Desk

70 बरस के कार्यकाल के बाद बीजेपी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था , और जनता ने इस नारे का समर्थन किया .ज़ाहिर है जनता तब्दीली चाहती थी , 2014 आम चुनाव में बीजेपी को 31 % वोट मिला जबकि इसमें सिर्फ 12 % वोट भाजपा का अपना वोट था ,19 % वोट UPA की नीतियों के ख़िलाफ़  , भ्रष्टाचार और घोटालों के विरोध में तब्दीली के नाम पर भाजपा को मिल गया था .बाक़ी 69 % वोट बीजेपी के ख़िलाफ़ ही पड़ा था . इसके बाद  2019 आम चुनाव में कुल वोट पड़ा 67.40%  , इसमें से  37 .36 % वोट बीजेपी को मिला था .अब इसमें EVM का कितना था और Original कितना , इसका आंकड़ा कभी इलेक्शन कमिशन ही दे सकता है , लेकिन आप कितने ही भी गाल बजाएं किन्तु बीजेपी भारी जनादेश की ताल ठोकने के लिए आज़ाद है .

क्या नारों का कोई असर चुनावी नतीजों पर पड़ता है ? हाँ पड़ता है , और चुनावी नारे अपना असर जनता के ज़ेहनों पर छोड़ते हैं इसके प्रमाण मौजूद हैं .आगे बढ़ने से पहले बीजेपी के चुनावी नारों पर एक सरसरी नज़र डाल लेते हैं::::  ,

जैसे ,,,,,बहुत हुई देश में महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’, . अबकी बार मोदी सर्कार , ‘ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार, ,,,,,,’अब आएगी जिंदगी में बहार, अबकी बार मोदी सरकार’ ,,,, ‘अच्छे दिन आने वाले हैं।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का भी नारा BJP की तरफ़ से दिया गया ,, ,,,, BJP समर्थकों ने भी एक नारा बीजेपी को समर्पित किया था  ‘हर हर मोदी, घर घर मोदी’ ,,,,,,बहुत हुआ नारी पर वार अबकी बार मोदी सरकार ,,,,,,सबका साथ सबका विकास इत्यादि …..

कांग्रेस द्वारा आम चुनाव में दिया गया  नारा   ‘आधी रोटी खाएंगे, कांग्रेस को जिताएंगे ,कोई असर नहीं डाल सका , लड़की हूँ लड़ सकती हूँ कितना असर दिखायेगा देखना बाक़ी है ….

NDA के 7 बरस के कार्यकाल के बाद ही बीजेपी मुक्त भारत की आवाज़ क्यों लगाई जाने लगी हैं , विपक्षी पार्टियां और जनांदोलनों में भाजपा मुक्त भारत के सुर बुलंद हैं ,सवाल यह है , क्या विपक्ष , बीजेपी से ख़ौफ़ज़दा है या बीजेपी देश के लिए ख़तरा है ,जैसा की संविधान को बदलने की बात BJP नेता करते ही रहते हैं  , वैसे  52 वर्ष देश पर लगातार हुकूमत करने वाली कांग्रेस से ये ख़तरा न तो विपक्ष को और न जनता ही को कभी हुआ , यह अलग बात है की कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को हाशिये पर पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी .

बीजेपी के अपने दावों और वादों के बावजूद देश की जनता और ख़ास तौर से किसान पार्टी से काफी नाराज़ है , बीजेपी के नेता गाँवों से भगाये जा रहे हैं ,क्यों लिखा जा रहा है गाँवों के प्रवेश द्वार पर ” बीजेपी प्रत्याशियों का प्रवेश निषेध ” ये सब सोचने योग्य बातें हैं …… हालाँकि बीजेपी पर पूंजीवादी और साम्राज्य्वादी होने और जनविरोधी का आरोप विपक्ष लगाती रही है . जबकि बीजेपी ख़ुद को राष्ट्रवादी और समतावादी होने का आश्वासन देती रही है . हालाँकि राष्ट्र निर्माण में बीजेपी का कोई योगदान नहीं रहा है .

अब जिस तरह से नफ़रत और द्वेष तथा धुर्वीकरण का रास्ता बीजेपी नेताओं ने चुना है इससे यह बात भी साबित होजाती है कि पार्टी को जनता से नहीं सत्ता से प्यार है … यानी काम अपना बनता भाड़ में जाए जनता .विपक्ष को चाहिए वो सभी कार्यकर्ताओं को जनता कि सेवा पर लगाए , और वो काम जो सत्तापक्ष करने में असमर्थ है , उनको जनता के बीच लेकर बैठें ,,,अपनी सेवा से जनता का दिल जीतें और फिर मैदान में उतरें …. बीजेपी को कैसे हराया जाए योजना यह नहीं ,,, बल्कि जनता बीजेपी या हर निकम्मी पार्टी को कैसे हराये इसकी योजना बनाई जानी चाहिए .

आज देश में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का हाल कुछ इस तरह का है ..

नेता जी :::मैं देश में विकास चाहता हूँ , मगर काम विनाश के करता हूँ , मैं देश में अमन चाहता हूँ मगर काम बदअमनी के करता हूँ , मैं ख़ुद को ईमानदार कहलवाना चाहता हूँ मगर काम बेईमानी के करता हूँ  , मैं ख़ुद को सच्चा कहलवाना चाहता हूँ मगर बातें सब झूठी करता हूँ , मैं देश में हरयाली चाहता हूँ मगर सूखे की दुआ करता हूँ , मैं देश में भाईचारा चाहता हूँ मगर सियासत नफ़रत की करता हूँ , मैं हर घर में उजाला चाहता हूँ मगर राजनीती अंधेरों की करता हूँ ….मैं आख़िर चाहता क्या हूँ …..में बहुत कुछ चाहता हूँ  ,,, जैसे मैं चाहता हूँ , सब पर देश द्रोह लगा दूँ फिर भी सब देशभक्त रहें , मैं मन की बातें करूँ और सब ख़ामोश रहें , मैं चाहता हूँ सब आत्म निर्भर रहें , और मेरी सरकार के पाबन्द भी रहें . जय हिन्द

नेता जी अभी ख़ामोश नहीं हुए  और बोले ,,,मैं चाहता तो बहुत कुछ हूँ , मगर सब कुछ कर नहीं पाता हूँ , क्योंकि मैं भी किसी का पाबन्द हूँ …… कोई तो है जो निज़ाम ए हस्ती चला रहा है .और मुझे भी वोही चला रहा है  , किसी ने सोचों को कब सराहा ,वोही हुआ जो ख़ुदा ने चाहा–जो इख़्तियार ए बशर पे पहरे बिठा रहा है ,,,, वोही ख़ुदा है …….. 

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