
किसी महिला के हिजाब या साड़ी को जानबूझकर खींचना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए IPC की धारा 354 और……..
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की तबीयत ख़राबी की ख़बरें और Visuals सामने आते रहे हैं, लेकिन वो इतने बीमार हैं की महिलाओं के हिजाब खींचने लग जाएंगे ऐसा प्रदेश और मुल्क की अवाम की सोच से भी परे की बात है.
सड़क के गुंडे मवाली भी इस तरह की हरकत करते वक़्त लोगों की नज़र से बचने की कोशिश करते हैं. और यहाँ यह हरकत स्टाफ , जनता और मीडिया के सामने किये जाने को कोई बीमारी ही कहा जाएगा, अब चाहे वो शारीरिक हो या वैचारिक.
अब इस घिनौने घटना कर्म के तीन हिस्से हैं ,अगर यह शारीरिक बीमारी का असर है उनको तुरंत रिटायरमेंट लेना चाहिए, वैचारिक बीमारी का असर है टोपी लगाने की साज़िशी सियासत से बाहर रहना चाहिए और अगर यह एक महिला को अपमानित करने की नीयत से किया गया था तो इसपर उनको सजा के लिए तैयार रहना चाहिए .
इस तरह के मामले में सबसे प्रत्यक्ष और प्रमुख धारा है। “शील भंग” (Modesty Outraging) में महिला के शरीर या वस्त्रों के साथ ऐसा कोई भी कृत्य शामिल है जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुँचती है.
क्योंकि किसी महिला के हिजाब या साड़ी को जानबूझकर खींचना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए IPC की धारा 354 और/या धारा 354B के तहत एक साल से लेकर सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.
हालांकि यह बात तय है कि जब तक वो वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी के सहभागी हैं तब तक तो वो सर्कार की नज़र में दूध के धुले हैं लेकिन जैसे ही समर्थन वापस लेते हैं तुरंत उनके खिलाफ इसी केस में PIL डालकर FIR हो सकती है.
लेकिन उनकी बीमारी भी इतनी समझदार है कि कोई ऐसा काम नहीं कराएगी जिससे वो सत्ता से बाहर आजायें.अब वो हर हाल में केंद्र सरकार के समर्थन में रहकर ही अपना समय पूरा करना मुनासिब समझेंगे.
नितीश कुमार जो जन सेवक के रूप में अपना कार्य कर रहे हैं उनके द्वारा की गई यह घटिया हरकत सिर्फ़ एक घटना नहीं है बल्कि यह संवैधानिक मर्यादा, महिला सम्मान और व्यक्तिगत आज़ादी पर गंभीर चोट है जो सरकार की संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।