
Ali Aadil khan , Editor’s Desk
आर्टिकल को नफ़रत का चश्मा उतार कर पढ़ें
अतीक अंसारी और उसके बेटे से जुडी एक अहम् बात आँखें खोलकर पढ़ने वालों के लिए कई राज़ खोलेगी ,
आखिर चीन और पाकिस्तान के बारे में अतीक अहमद के बेटे ने क्या कहा था ….और क्यों कही थी मुस्लिम रेजिमेंट की बात ….
इंडियन इन्फेंट्री वो ख़ास बातें जो अतीक अहमद के परिवार से जुडी है …
भारत की फ़ौज में इन्फ़ेंट्री हथियारबंद पैदल सैनिकों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. भारतीय पैदल सेना यानी इन्फेंट्री में कुल 31 रेजिमेंट हैं. इसमें सिख, गढ़वाल, कुमाऊं, जाट, महार, गोरखा, राजपूत मुख्य हैं . मगर इसमें कोई मुस्लिम रेजिमेंट नहीं है .
मुस्लिम रेजिमेंट का ज़िक्र करने की ज़रुरत क्यों पड़ी . दरअसल सितंबर 2020 में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें दिखाया गया था कि भारतीय सेना की मुस्लिम रेजिमेंट ने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान से युद्ध लड़ने से मना कर दिया था.और इस अफवाह को इतना वायरल किया गया कि चवन्नी ट्रोलर्स मुस्लिम IAS , IPS अधिकारीयों की LOyalty पर सवाल खड़े करने लगे .
Fact check करने पर पता चला मुस्लिम रेजिमेंट कभी बनी ही नहीं . भारतीय फ़ौज का घोर अपमान और मोरल down करने वाली इस राष्ट्र विरोधी ट्रोल टीम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई .और यह मिसाल के तौर पर एक घटना का ज़िक्र किया गया जबकि भक्ति में चूर अंधे देश को लगातार कमज़ोर करने की योजना पर काम कर रहे हैं .
Fact चेक के दौरान मेजर जनरल (रिटायर्ड) शशि अस्थाना ने बताया कि भारतीय सेना की कई रेजिमेंट्स में मुसलमान हैं और हर लड़ाई में मुसलमान सैनिकों ने अदम्य साहस और बहादुरी , शौर्य तथा वफादारी का परिचय दिया है. लेकिन आज़ाद भारतीय फ़ौज में कोई मुस्लिम रेजिमेंट कभी नहीं रही है ,
1965 के भारत-पाक युद्ध में जिस फ़र्ज़ी मुस्लिम रेजिमेंट के पाकिस्तान आर्मी के सामने हथियार डालने की झूठी अफ़वाहें उड़ाई जा रही हैं, याद रहे उसी युद्ध में क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान के चार से अधिक टैंक तबाह किए थे . और अब्दुल हमीद को मरणोपरांत देश के शीर्ष सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाज़ा गया था.
जबकि कुल 21 परमवीर चक्र विजेताओं में 4 सिक्ख विजेता भी शामिल हैं . जिनको फ़र्ज़ी राष्ट्रभक्तों और चड्डी चोरों की तरफ से आतंकी और खालिस्तानी का लक़ब देकर बदनाम किया जाता रहा . अब चवन्नी के ट्रोलर्स की इन हरकतों से अखंड भारत वुजूद में आएगा या विखंड भारत आप फैसला करें !
यूँ तो मुस्लिम सैनिकों की वीरता की सैकड़ों मिसालें मौजूद हैं लेकिन इस मौके पर इन वीरों का भी ज़िक्र कर दें ….जैसे मेजर (जनरल) मोहम्मद ज़की (वीर चक्र) से सम्मानित किये गए और मेजर अब्दुल रफी खान ( वीर चक्र), जिन्होंने अपने चाचा मेजर जनरल साहिबजादा याकूब खान, जो पाकिस्तानी डिविजन को कमांड कर रहे थे , उन के ख़िलाफ़ जंग लड़ी ।
उसके बाद 1971 की लड़ाई और भारत चीन लड़ाई में मुस्लिम फौजियों की वीरता और मुस्लिम Doners (दानियों ) की तारीख़ अभी तो किताबों में दर्ज है हो सकता है कुछ दिन बाद उसको भी तारिख की किताबों से हटा दिया जाए . वरना NCERT से तो हटा ही दिया जाएगा . समय की कमी की वजह से उनका अहाता मुश्किल है .
अब अतीक अहमद के बेटे की वो वायरल वीडियो का ज़िक्र बहुत अहम् है जिसमें वो मुस्लिम ब्रिगेड बनाने की बात कर रहे हैं जिसमें मुसलमानों की बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी की बात वो करते दिखाई दे रहे हैं .वो कह रह एहेन की हमको ऐसा मौक़ा दो ताकि मुस्लमान एक बार फिर चीन और पाकिस्तान के मुक़ाबले में अपनी हुब्बुल वतनी और वफादारी और बहादुरी की एक और ताज़ा मिसाल पेश कर सकें ,,,,,,और इसमें हर्ज भी क्या है .
पठान Brigade बना दी जाए और उनको चीन पाक बॉर्डर पर लगा दिया जाए . उसी पठान नस्ल की एक बड़ी तादाद हिन्दोस्तान में आज भी मौजूद है जिसने सोवियत रूस और अमेरिका तथा जैसी फोजों को अफ़ग़ानिस्तान में टिकने नहीं दिया . उसकी यह खूबी है वो जिस मिटटी में रहती उससे पूरी वफ़ा करती है . यूँ तो मुस्लमान नाम ही सरासर वफ़ादारी है .और जहाँ गद्दारी है वहां इस्लाम नहीं .
अब विडंबना यह है की देश में एक टीम तैयार की गयी है जिसको इंक़लाब ज़िंदाबाद से भी चिढ़ है , जबकि मुल्क की आज़ादी की ईमारत में एहि लफ्ज़ इंक़लाब उसकी बुनियाद है ..
असद पुत्र अतीक अहमद की इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग सवाल कर रहे हैं कि चीन को ललकारने की सजा तो इस परिवार को नहीं मिली ? क्योंकि सत्तापक्ष तो अभी भी यही कह रहा है एक इंच भी चीन ने हमारी ज़मीन नहीं दबाई है .यानी चीन को क्लीन चिट दी जाती रही है …
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