अब अफ़ग़ानिस्तान में भी तिब्ब-ए-यूनानी चिकित्सा पद्धति

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डॉ. ओबैदुल्लाह बेग की मेहनत रंग लाई अफ़गानिस्तान और भारत सरकार ने मेडिकल क्षेत्र में किया समझौता

नई दिल्ली।ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटर डॉ. ओबैदुल्लाह बेग की मेहनत रंग लाई है और अफ़गानिस्तान में तिब्ब ए यूनानी की अधिकारिक रूप से शुरुआत हो गई है।इस संबंध में ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने दोनों देशों का शुक्रिया अदा किया है।

ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर मुश्ताक अहमद और सेक्रेटरी जनरल डॉ. सैयद अहमद खान ने संयुक्त रूप से खुशी का इज़हार करते हुए कहा कि भारत सरकार के इस कदम से तिब्ब ए यूनानी का और विकास होगा।

साथ ही इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही है की भारत में यूनानी दवाओं का प्रोडक्शन बढ़ेगा. ज़ाहिर है डिमांड बढ़ेगी तो Production बढ़ेगा यानी Bussiness बढ़ेगा , Foreign Exchange हमारे देश का बढ़ेगा. कहा जा सकता है कि देश का कोई Product का डिमांड बढ़ता है तो कारोबार बढ़ता है.

दूसरी तरफ़ स्वस्थ्य भारत के सपने को भी साकार करने में यूनानी लगातार अपना किरदार अदा कर रही है. “यूनानी उपचार हर घर के द्वार” के नारे के साथ AIUTC अब अफ़ग़ानिस्तान को भी सेहतमंद रखने के लिए आगे आई है . और इस बात में कोई संकोच नहीं होना चाहिए यूनानी के Over All फ़रोग़ का श्रेय All India Unani Tibbi Congress को जाता है .

और AIUTC की पूरी टीम पूरी डॉ मुश्ताक़ और डॉ सईद अहमद ख़ान के नेतृत्व में एकाग्रता और लगन से भारतीय तिब्ब यूनानी उपचार के Promotion में अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने पंख फैलाने को भी तैयार हो चुकी है.

डॉ. ओबैदुल्लाह बेग ने कहा कि भारत सरकार, खासकर आयुष मिनिस्टर प्रताप राव जाधव के हम आभारी है कि उन्होंने अफ़गानिस्तान में तिब्ब ए यूनानी का एक नया चैप्टर शुरू किया हैं। इसके लिए भारत सरकार का जहाँ एक तरफ AIUTC शुक्र गुज़ार है वहीँ भारत सरकार को भी AIUTC के इस कारनामे के लिए उसको Appreciation देना चाहिए, ताकि AYUSH की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन सके और भारत का नाम Medical के फील्ड में रोशन हो सके.

इस सिलसिले में जो डेलीगेशन अफगानिस्तान से मौलवी नूर जलाल जलाली (पब्लिक हेल्थ मिनिस्टर) की लीडरशिप में दिल्ली आया उसमे पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री से जुड़े अब्दुल्ला इसराइली, फजल रबी करीमी, सैयद मुहम्मद इब्राहिम खेल, सैयद हारून आजाद, खालिद अहमद मुहम्मद अका, सैफतुल्लाह देवबंदी और मुजीब-उर-रहमान आफताब शामिल थे।

हम उनके भी शुक्रगुजार हैं क्योंकि उनकी दिलचस्पी की वजह से ही यह बड़ी कामयाबी मिली।दोनों देशों के बीच हुए समझौते से अफगानिस्तान में यूनानी रिसर्च शुरू होगी और अफगान स्टूडेंट्स को भारत में फ्री बीयुएमएस (BUMS) की शिक्षा दी जाएगी , जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। डॉ. ओबैदुल्लाह बेग ने आगे कहा कि यह समझौता तिब्ब ए यूनानी को पसंद करने वालों के लिए बहुत अच्छा है और इससे तिब्ब ए यूनानी और मजबूत होगी और इसे दुसरे देशों में भी बढ़ावा मिलेगा।

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