इजराइल ईरान युद्ध की ख़बरों पर आप कितना यक़ीन करते हैं
किसी मुल्क को अपने देश और Citizens की हिफाज़त के लिए Nuclear Power बनने से कौन रोक सकता है ?
हालांकि न्यूक्लीयर या एटॉमिक हथ्यार पूरी दुनिया से समाप्त होने ही चाहिए
अगर कुछ नहीं तो इतना तो दुनिया को दीख ही रहा है के मिसाइल दोनों तरफ से गिर रहे हैं धमाके हो रहे हैं , buildings ध्वस्त हो रही हैं … लोग इधर के कितने मरे और उधर के कितने अगर आपकी दिलचस्पी इसमें है तो यह अच्छी सोच नहीं है और इसका Exact Data हमारे पास नहीं है … इंसान मरे हैं बस इतना दुःख काफी है … लेकिन !!!!! ज़ालिम के मरे ?? या मज़लूम के इतना फ़र्क़ आप कर सकते हैं और आपको करना ही चाहिए वरना मानवता बिलकुल मर जायेगी जो लगभग मरी हुई सी है …
फिलहाल जंग में मरने वालों के आंकड़े नहीं बल्कि दुनिया के भविष्य के बारे में सुझाव रखने की बात करना हमारा मक़सद है . इतना तो सभी जानते हैं आजके युद्ध किसी मैदान में 2 देशों की फौजों के जवानों के बीच तलवार और ढाल से तो नहीं होते …. बल्कि Balistic और Cruise missile , nuclear , chemical और atomic हथियारों का युग है .
जिसके नतीजे में इंसानों को ही मरना है और भयानक व् दर्दनाक तरीके से मरना है ,,,वैसे आजकल आसमानो और समुन्द्रों पर सैन्य Cntrol की बात करने वाला इसराइल दूसरों के आसमाँ पर तो क्या Control करता अपने जहाज़ों को ज़मीन पर नहीं खड़ा कर पा रहा है साइप्रस में जहाज़ों को खड़ा किया गया है …..इसके पीछे क्या जंगी हिकमते अमली है यह तो वही जानता है ,क्योंकि जंग भ्रांतियों और…….
…… अरे साहब एक फैक्ट्री में रसायनिक Gas का रिसाव हुआ तो भोपाल की जनता आजतक उसका ख़मयाज़ा भुगत रही है , 1986 में सोवियत संघ के चरनोविल परमाणु प्लांट के reactor में धमाका हो गया और इसके बाद radiation का दबाव इतना फेल गया की 5 हज़ार से ज़्यादा लोगों को Thoeride Cancer होगया.
दर्जनों लोगों की दर्दनाक मौत हो गई .. बसा बसाया पूरा शहर तबाह हो गया रूस , बेलारूस , ukrain में इसका भारी प्रभाव पड़ा बल्कि Europe के कई इलाक़ों तक इसका radiation फेल गया.
जबकि Radio Active Core का सिर्फ 5 % हिस्सा लीक होकर बाहर आया था. नागासाकी हिरोशिमा तो सभी को याद है वहां आज भी लोग अपाहिज पैदा होते हैं .बमबारी का मनोवैज्ञानिक आघात एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक फैलता गया, जिससे दिमाग़ी और Psychological ट्रॉमा पैदा होगया था जिसका असर आजतक देखा जाता है.
रहा सवाल इस बात का कि कौन nuclear और atomic weapons बनाएगा और कौन नहीं बनाएगा .. यह तय कौन करेगा ?? ये सवाल तो आपके ज़हन में भी आते ही होंगे … लेकिन जवाब आप किस्से मांगते हैं ??? किसी से नहीं!!!
…. जो चल रहा है ठीक है बस अपनी अपनी अंधभक्ति बची रहे चाहे अंधभक्तों का सुरमा बन जाए , दुनिया भस्म होजाये बहुत से लोगों को इससे कोई लेना देना नहीं ….
इसराइल जिसके लिए हमारे देश में # चल रहा है stands with israel और वही इस्राइली हिंदुस्तान के मज़दूरोँ को बंकर में घुसने नहीं दे रहे हैं.
सोशल मीडिया पर हिंदुस्तानी मज़दूरों की photo viral हैं जिसमें उनको यहूदी ठोकरें मार रहे हैं और रब्बियों के सामने सजदा करा रहे हैं . अब इसमें भी आस्था की बात है जिसका पेशाब पी रहे हैं गोबर खा रहे हैं वही गाये उठा उठाकर पटकनियाँ भी लगा रही रोड पर लुटा लुटा कर मार रही है .
अब आस्था जुडी है गाये से तो जुड़ी है कोई क्या कर सकता है.शायद हमारे अंध भक्तों को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उनका टारगेट तो कोई और है ….
ईरान इसराइल जंग का मुद्दा क्या है ?
ईरान के Depty Foreign minister से CNN की रिपोर्टर ने सवाल किया , “आपने 60 % enrich Urenium का उत्पादन क्यों किया ? ईरान के मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा हमने वही किया जो International Atomic Energy Agency यानी IAEA के नियमों के अनुसार किया जा सकता है .
IAEA के inspectors इसकी जांच के लिए ईरान आये थे उनकी रिपोर्ट्स में आप देखें कुछ ग़लत नहीं किया हमने .हालांकि दुनिया में क़यामे अम्न केलिए ज़रूरी है की IAEA nuclear या एटॉमिक हथ्यार defuse कर देने का क़ानून बनाये और सब देशों से इसका खात्मा हो.
बेगुनाह अवाम और मासूमों पर हज़ारों मील से remote से Bomb और Missile बरसाकर तबाह करना ये कोनसी बहादुरी या इंसानियत हुई.अब वो चाहे ग़ज़ा और फलस्तीन पर गिरें या तेहरान और तेलअबीब पर
.…ख़ून अपना हो या पराया हो – नस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर….
लेकिन दुनिया में False Flag Operation का एक Fasion सा हो गया है हालांकि यह सिर्फ जंगी हिकमते अमली हुआ करती थी . अब चाहे वो mass destruction weapons के नाम पर इराक़ की तबाही हो या 9 / 11 के नाम पर अफ़ग़ानिस्तान की 20 साल की तबाही.
ईरानी Nuclear Reactors को तबाह करके क्या अमेरिका दुनिया में शान्ति स्थापित करने की गारंटी देगा ? और सत्ता परिवर्तन कराकर क्या ईरान में सब कुछ ठीक कर देगा? ऐसे ही जैसे इराक़ , लीबिया , मिस्र, यमन और सीरिया में सत्ता परिवर्तन करके किया . लाखों लोग मार दिए गए , Economy तबाह कर दी infrastructure तहस नहस कर दिया इन जंगी सौदागरों ने . लेकिन एक बात है ,,, अमेरिका ने अपनी अवाम के मफ़ाद और लोकतंत्र को अभी तक बचाके रखा है . अभी जब हम यह आर्टिकल लिख रहे हैं इसी बीच खबर आरही है की अमेरिका ने ईरान के नुक्लेअर प्लांट्स पर हमला कर दिया है.
देखना यह है की अमेरिका बहती गंगा में अब हाथ धोता है या दहकती आग में हाथ डालता है. लेकिन वो जो भी करेगा इंसानियत के लिए अच्छा नहीं करेगा यह दुनिया देख चुकी है .
इमकान इस बात का था के ईरान २ हफ्ते की बात करके 2 दिन में ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है .न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरानी परमाणु ठिकाने फोर्दो (Fordo) में स्थित परमाणु संवर्धन सुविधा पर अमेरिकी बम के इस्तेमाल की बात लिख चूका था .
जबकि हमारा भी मानना था की हमले की तैयारी पूरी है और किसी भी वक़्त फोर्दो (ईरानी Nuclear Sites) पर अमेरिका हमला कर सकता है .इजराइल का इतना भारी नुकसान अमेरिका के लिए बर्दाश्त करना नामुमकिन था .
यह कैसी Peace Policy है की एक कुरूर देश इसराइल लगातार अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है फलस्तीनी और ग़ाज़ा के मासूमों को निशाना बना रहा है ,, स्कूल और अस्पतालों पर बमबारी कर रहा है और शान्ति दूत अमेरिका मुंह में दुद्धी और हाथ में झुनझुना लिए बैठे हैं .
हालांकि अमेरिका के विपक्ष यानी Democrats को इस बात का आभास हो चला है के दुनिया के मुल्कों में सत्ता परिवर्तन और विदेश नीति के चलते US economy Collaps करने जा रही है .वक़्त रहते अगर इन नीतियों पर check न लगाया गया तो एक रोज़ अमेरिका भी तबाह होजायेगा .
आपको बतादें आज भी अमेरिकी सेना दुनिया के लगभग 170 देशों में मौजूद है. इनमें से 150 से ज्यादा देशों में सक्रिय सैनिक तैनात हैं. इसके अलावा 70 से ज्यादा देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं. ये सब शान्ति और स्थिरता के नाम पर हुआ है .लेकिन दुनिया में कितनी स्थिरता और शान्ति है आप इस बात के गवाह हैं .
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