
देश का माहौल कुछ खतरनाक सिम्त की ओर बढ़ रहा है।पिछले तीन वर्षों से नामी writers ,journalist , और ईमानदार अधिकारिओं की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है ।कन्हैया मामले के दौरान कोर्ट परिसर में सोशल activist और पत्रकारों पर हमला ने तो लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों को हिला दिया था अपराधियों पर आज तक कोई उचित कार्रवाई का न होना और भी खतरनाक है , जिसको किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए ।


पूरा देश अपने ड्राइंग रूम्स में बैठकर दुनिआ के हालात को जिस माध्यम यानि मीडिया के ज़रिये देखरहा होता है अगर मीडिया कर्मियों की आवाज़ को दबा दिया गया तो देश किस दिशा में चला जाएगा आप समझ सकते हैं यदि हम इस बात को साफ़ कहदें की देश इमरजेंसी की ओर रफ्ता रफ्ता अपना सफर तै कररहा है तो ग़लत न होगा। सच कहने या लिखने वालों की आवाज़ को दबाया जारहा है , किसी पार्टी या ग्रुप की विचार धरा के विपरीत कोई आवाज़ बग़ावत कहलाई जाती है ,पूंजीवादी ताक़तों के विरुद्ध आवाज़ को सरकारी बल के बूते बंद करने की कोशिश होती है ।जो अँगरेज़ साम्राज्ये के दौर में होता था ईमानदार और फ़र्ज़ के तईं वफादार अधिकारिओं की एक के बाद एक हत्याएं हो रही हैं , अपराधियों को पनाह और बेगुनाह और मासूमों तथा ग़रीबों को अपराधी बनाकर जेलों में डाला जा रहा है ,NDMC अधिकार M M Khan का क़त्ल ताज़ा वाक़िया है जिसको एक होटल के मालिक ने सुपारी देकर क़त्ल करा दिया उनकी ग़लती सिर्फ यह थी की रिश्वत लेकर नाजायज़ काम करने से इंकार करदिया था और किसी भी सियासी pressur को नहीं मान था ।शिक्षा प्रणाली को और इतिहास को भी बदला जा रहा है ।शायद इसी का नाम विकास होगा किसी विचार धरा के लिए हमारा इशारा आप समझ रहे होंगे? मगर RSS और BJP का नाम आप भी मत लीजिएगा वरना औरों की तरह आप भी क़त्ल न करदिए जाएँ ! !
कुल मिलाकर अराजकता कही जा सकती है ,ऐसे में ज़िम्मेदार नागरिक की हैसियत से आपको भी अपना फ़र्ज़ निभाना होगा और देश में इन्साफ तथा ईमानदारी के माहौल को बनाने के लिए अपनी भूमिका निभानी होगी वरना एक रोज़ आप भी बिन किये गुनाह के मुजरिम ठहराए जाएंगे तब तक बहुत देर हो चुकी होगी ।उठो देश के ग़ैरतमंद नागरिकों और बुझा दो नफरत , पूंजीवाद , सामंतवाद तथा सत्ता की होङ की इस आग को और बनाया जाए अमन ,प्यार व समानता का माहौल ।
अमेरिका जब वयतनाम पर हमले कर रहा था ,तब वहां की मीडिया की आवाज़ को दबा दिया गया था और सच्चाई को सामने लाने से रोक दिया गया था नतीजे में 13,13000 इंसान मौत के मुंह में चले गए थे ।प्रेस की आज़ादी पर पाबंदी या biased प्रेस या बे ईमान प्रेस से दुनिआ जहन्नुम बन जाती है जैसा की वियतनाम से इराक वॉर तक देखने को मिला ।
हमारा एडिटोरियल चूँकि प्रेस की आज़ादी और उनके अधिकारों पर आधारित है इसलिए कुछ फैक्ट्स और भी हैं जो आपके सामने रखने हैं जैसा की वो पत्रकार जो अपने फ़र्ज़ को पूरा करते हुए क़त्ल कर दिए गए उनका अनुपात और मिसाल के लिए कुछ नाम भी दिए जा रहे हैं ।
21% बिज़नेस बीट ,37%करप्शन बीट, 21% क्राइम बीट , 21%कल्चर बीट,18%ह्यूमन राइट्स बीट , 47%पॉलिटिक्स बीट ,3%वॉर बीट ।
हाल के वर्षों में मारे गए पत्रकारों के नाम मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं !
करुण मिश्रा , जनसंदेश टाइम , जगेंद्र सिंह , फ्रीलान्स ,जावेद अहमद मीर , Channel 9 ,MVN शंकर , आंध्र प्रभा तरुण कुमार आचार्य , कनक TV, सम्बाद ,साईं रेड्डी , देशबन्धु ,राजेश वर्मा , IBN 7 ,राकेश शर्मा , आज ,नरेंद्र दाभोलकर , साधना ,परवाज़ मुहम्मद सुल्तान , News and Feature अलायन्स ,द्विजमनी सिंह , Prime न्यूज़ ,राजेश मिश्रा , Media राज,उमेश राजपूत , नई दुनिआ ,मुहम्मद मुस्लिमुद्दीन , असमिया प्रतिदिन ,विजय प्रताप सिंह , इंडियन एक्सप्रेस ,आसिया जीलानी फ्रीलान्स , अल्ताफ अहमद फक्तू , Doordarshan टीवी ,पराग कुमार दस , असमिया प्रतिदिन , इत्यादि । ये मिसाल के तौर पर कुछ नाम लिखे गए हैं जबकि ऐसे पत्रकारों की तादाद हज़ारों में है ।
मगर एक सवाल हमेशा बना रहेगा की क्या उन ईमानदार अफसरों और पत्रकारों को यूँही क़त्ल होने दिया जाए?