स्वच्छता एवं स्वास्थ्य पर WHO के दिशा-निर्देश और हमारे स्वास्थ्य केंद्र

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दुनिया में COVID 19 महामारी के चलते भले लोगों को बड़ी मुश्किलों से गुज़ारना पड़ा हो किन्तु एक बात ज़रूर जनता को भी समझ आगई कि ,जीवन में सफाई का क्या महत्व है . हालाँकि अभी भी कुछ लोग अपने पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं किन्तु फिर भी काफी हद तक देश कि जनता में जागरूकता आई है , यह अलग बात है इसके लिए जनता को बड़ी क़ीमत अदा करनी पड़ी है .

लेकिन एक बात आज भी दयनीय है और देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर सवालिया निशाँ लगाती है , सफाई और स्वच्छता तथा शौचालयों के निर्माण और सुविधाओं के बारे में के भले सरकारें दावे करती रहे किन्तु धरातल पर सब खोखले नज़र आते हैं . अब चाहे वो सरकारी बड़े अस्पताल हों या फिर CGHS Dispensaries .

क़िदवई नगर की यूनानी CGHS Dispensary पर जब दवा लेने गए , तो वहां पहुंचकर हमको पीने के पानी कि ज़रुरत महसूस हुयी पता चला यहाँ पानी नहीं है , बड़ी हैरत हुई CGHS Dispensary में पीने का पानी नहीं है . इससे ज़्यादा हैरत उस समय हुई जब हमको पता चला कि आपको Urine इत्यादि के लिए बाहर जन सुविधा केंद्र पर जाना होगा , हमने पूछा क्या स्टाफ भी जन सुविधा केंद्र पर जाता है , CMO ने बताया जी हाँ , क्योंकि हमारे यहाँ पानी का प्रबंद्ध नहीं है .ऐसे में जब थोड़ी थोड़ी देर में हाथों को साबुन से धोते रहने कि सरकारी सलाह आम जन को दी जा रही हो और Central Govt . के अधिकारीयों और कर्मचारियों कि Dispencery में Toilet तक में पानी न हो तो इससे आप क्या अंदाजा लगा सकते हैं ज़रूर लगाएं .

यूनानी पेथी उतरी सरकारी Guidelines के समर्थन में

यह जानकार हमारी हैरत और अफ़सोस का ठिकाना नहीं रहा जब पता चला कि इस पूरी Dispencery में एक toilet है , और जिसमें पानी नहीं है ,जल बोर्ड ने कनेक्शन तो दे दिया है लेकिन पानी store करने के लिए मोटर चाहिए जो नहीं लगवाया गया है , CMO के कमरे के दरवाज़े के सामने फर्श पर काफी गंदगी थी जिसको साफ़ नहीं किया गया था , पता चला फरवरी से कोई सफाई कर्मचारी नहीं है ,दवा का परचा माँगा तो पता चला कंप्यूटर काम नहीं कर रहा है .कुल मिलाकर क़िदवई नगर डिस्पेंसरी , CGHS Dispensary के मानदंड पूरे नहीं कर रही है लेकिन चल रही है ,यहाँ जब जुगाड़ करना होता है तो सब चलता है . और यहाँ तो जुगाड़ से सरकारें बना ली जाती हैं .

हमने सोचा यह सारी कमज़ोरी Incharge की होगी लेकिन जांच करने पर पता चला कि प्राथमिक सुविधाओं के अभाव के सम्बन्ध में CMO साहब लगातार जनवरी से Concern Office के अधिकारी को लिख रहे हैं जिसके रिकार्ड्स उनके पास मौजूद थे .

अब सवाल यह पैदा होता है कि विभाग ने क्यों नहीं आजतक इसपर कार्रवाई की , क़िदवई नगर Dispensary के स्टाफ को सजा किस लिए दी हुई है , जबकि सरकार और WHO की ओर से लगातार सफाई के सम्बन्ध में Advisories जारी हो रही हैं , देश भर में हर एक के फोन पर सफाई का ध्यान रखने का लगातार मैसेज चल रहा है , ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिक सुविधाओं के सम्बन्ध में होने वाली ढील स्वच्छता अभियान के दावों की पोल खोलता है , AYUSH मंत्रालय के यूनानी विभाग के साथ सौतेलापन कहना कितना वाजिब होगा यह एक सवाल भी है .

एक दूसरी बड़ी विडंबना यह सामने आई कि लाभार्थियों को Prescribed दवाएं उपलब्ध नहीं हैं इसकी वजह यह बताई गयी कि दवा के supplier को Corona Positive आया है , हमने कहा तो अगर किसी एक सप्लायर को C – Positive है तो क्या इस आधार पर दिल्ली के हज़ारों मरीज़ों को 15 दिन तक दवा नहीं मिलेगी ? केवल एक सप्लायर की वजह से हज़ारों मरीज़ों को रिस्क पर लेजाना कोनसी अक़ल मंदी है .यह सरकारी दावों पर सवालिया निशाँ हैं , सोचा शायद यूनानी में सप्लायर के POsitive होने की वजह से दवा नहीं होगी पता चला आयुर्वेदा Dispensary dispencry में भी दवाओं कि सप्लाई नहीं है . क्योंकि Supplier दोनों का एक ही है . वाह रे विकास वाह …..और अच्छे दिन भी आ ही गए कुछ लोगों के …….अगली स्टोरी अगले हफ्ते

World health organisation (WHO) की Guidelines के लिए नीचे दिए link पर Click करें और विस्तृत जानकारी हासिल करें

WHO : Guidelines on cleanliness and health

https://www.drishtiias.com/hindi/summary-of-important-reports/who-guidelines-on-sanitation-and-health-guidelines

WHO की सिफारिशें एवं बेहतर अभ्यास प्रक्रियाएँ

सिफारिशें

सिफारिश 1: शौचालयों तक सार्वभौमिक पहुँच एवं उपयोग सुनिश्चित करना, जिसमें सुरक्षित रूप से मल उत्सर्जन हो:

  • यह सिफारिश मानवाधिकार सिद्धांतों के अनुरूप है तथा सतत् विकास लक्ष्य क्रमांक 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) एवं क्रमांक 6.2 (सफाई और स्वच्छता) को सुदृढ़ करती है।
  • शौचालय तक पहुँच का मतलब यह नहीं है कि इसका उपयोग किया जा रहा है या इसका उपयोग हर समय हर व्यक्ति द्वारा किया जाता है। खराब तरीके से निर्मित एवं प्रबंधित शौचालय पुनः खुले में शौच का कारण बन सकते हैं।
  • शौचालय सभी के लिये सुलभ, वहन करने योग्य तथा निरंतर उपलब्ध होने चाहिये और मलोत्सर्जन कम-से-कम मानव संपर्क से दूर होना चाहिये।
  • शहरी क्षेत्रों में पूर्ण कवरेज एवं सुरक्षित नियंत्रण किया जाना महत्त्वपूर्ण है तथा इसे शहर में व्यापक योजना एवं कार्यान्वयन के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिये, क्योंकि मल-मूत्र का जलमार्ग, भूजल, पाइप एवं नालियों से मिलने का खतरा होता है।
  • ऐसे साझा और सार्वजनिक शौचालय, जिनमें मल-मूत्र का निकास सुरक्षित रूप से होता हो, को ऐसे घरों के लिये प्रस्तावित किया जा सकता है जहाँ सुविधाएँ प्रदान करना संभव न हो।

सिफारिश 2: संपूर्ण स्वच्छता सेवा श्रृंखला के साथ सुरक्षित प्रणालियों तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना।

  • यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रणाली एवं सेवाएँ स्थानीय संदर्भ में कार्य करने हेतु चुनी जाएँ तथा निवेश एवं प्रणाली प्रबंधन स्थानीय स्तर के जोखिम आकलनों पर आधारित हो।
  • स्वच्छता सेवाएँ प्राप्त करने के लिये स्वच्छता प्रणालियों को मल-मूत्र नियंत्रण, सफाई, ढुलाई, उपचार और अंतिम उपयोग या निपटान का प्रबंध करना चाहिये।
  • जोखिम मूल्यांकन में श्रृंखला के साथ सभी समूहों जैसे- उपयोगकर्त्ताओं, स्थानीय समुदायों, सफाई कर्मियों और व्यापक समुदायों के लिये संभावित जोखिमों का आकलन किया जाना चाहिये।

सिफारिश 3: स्थानीय रूप से वितरित सेवाओं तथा व्यापक विकास कार्यक्रमों एवं नीतियों के एक भाग के रूप में स्वच्छता को संबोधित किया जाना चाहिये।

  • ऐसी जगहों पर जहाँ स्थान की कमी हो तथा स्वच्छता सेवाओं के लिये अन्य स्थानीय मुद्दे बाधक हों, वहाँ उच्च लागत और बुनियादी ढाँचे से संबंधित जटिलताओं से बचने के लिये स्वच्छता सेवाओं को स्थानीय योजना प्रक्रिया में ही शामिल किया जाना चाहिये।
  • स्वच्छता हस्तक्षेप को जल एवं अन्य स्वच्छता उपायों के साथ समन्वित किया जाना चाहिये, साथ ही स्वच्छता से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को अधिकतम करने के लिये बच्चों के मल तथा घरेलू पशुओं के प्रबंधन एवं उनके मल का सुरक्षित निपटान करना चाहिये।
  • वस्तुतः स्वच्छता एक प्राथमिक बाधा है, किंतु द्वितीयक बाधाएँ जैसे- सुरक्षित जल, साबुन से हाथ धोना, पशु अपशिष्ट प्रबंधन तथा मक्खी नियंत्रण पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
  • उपरोक्त सभी मुद्दों का जल, सफाई एवं स्वच्छता (WASH) के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के हस्तक्षेप द्वारा एक साथ समाधान किया जा सकता है।

WASH दृष्टिकोण

WASH ‘जल, सफाई एवं स्वच्छता’ का संक्षिप्त रूप है। WASH तक सार्वभौमिक, सस्ती एवं स्थायी पहुँच अंतर्राष्ट्रीय विकास हेतु एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है तथा सतत् विकास लक्ष्य 6 का केंद्रबिंदु है।

सिफारिश 4: स्वास्थ्य क्षेत्र को सार्वजनिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिये सुरक्षित स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु मुख्य कार्यों को पूरा किया जाना चाहिये।

  • स्वच्छता की बहु-क्षेत्रीय प्रकृति को समायोजित करने एवं कार्रवाई की सुविधा के लिये समग्र स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, कृषि, विकास, सार्वजनिक कार्यों तथा पर्यावरण कार्यक्रमों सहित कई हितधारकों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित प्राधिकारी वर्ग को स्वच्छता मानदंडों तथा मानकों के विकास में योगदान करना चाहिये, जिसमें सुरक्षा मानकों के विकास (या संशोधन) तथा कार्यान्वयन में योगदान शामिल हैं।
  • स्वास्थ्य प्रभाव को अधिकतम करने तथा उसमें निरंतरता बनाए रखने के लिये स्वच्छता सेवाओं एवं निगरानी को स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जाना चाहिये।
  • स्वच्छता को बढ़ावा देना एक महत्त्वपूर्ण कार्य है जिसे समुदाय, स्कूल और संपूर्ण जनसंख्या से जुड़ी पहलों तथा अभियानों में यथासंभव हो शामिल किया जाना चाहिये।
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