बिना लिखाए किताब पर लेखक का नाम प्रकाशित, प्रकाशक को दो साल की सजा

जयपुर, 02 नवंबर । अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-3, महानगर द्वितीय ने बिना किताब लिखाए लेखक का नाम पुस्तक पर प्रकाशित करने पर मैसर्स आस्था प्रकाशन के प्रकाशक व मालिक राजकुमार को दो साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह पुस्तक प्रकाशित कर विद्यार्थियों, कॉलेजों और परिवादी से छल कर लाभ कमाया है। ऐसे में उसे दंडित करना उचित है।

परिवादी डॉ. श्याम मोहन ने बताया की उसने 12 सितंबर, 2013 को कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया कि मैसर्स आस्था प्रकाशन के प्रकाशक व मालिक राजकुमार ने एक अन्य व्यक्ति महेन्द्र के साथ मिलकर राजनीति विज्ञान के मूल आधार नाम से एक पुस्तक का प्रकाशन किया और उसमें परिवादी का नाम बतौर लेखक लिख दिया। रिपोर्ट में कहा गया की उसने यह पुस्तक न तो लिखी है औना ना ही संपादित की है। इसके अलावा परिवादी ने अपने नाम से किसी को पुस्तक लिखने के लिए अधिकृत भी नहीं किया है। परिवादी का इस पुस्तक से कोई संबंध नहीं है, लेकिन आरोपी ने उसका नाम लिखकर बाजार में अनैतिक व्यापार कर रहा है। कुछ समय पूर्व आरोपी ने पुलिस के समक्ष बयान दिया था कि वह भविष्य में ऐसा कृत्य नहीं करेगा। इसके बावजूद वह उसके नाम से पुस्तक प्रकाशित कर लाभ कमा रहा है। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया।

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