प्रेस विज्ञप्ति
चक्रवात ने तोड़ी किसानों की कमर, खाद की कालाबाजारी ने किया बर्बाद, सरकार तत्काल मुआवजा दे – राजीव यादव, वीरेन्द्र यादव
भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां किसानों को अन्नदाता कहा जाता है, आज वही अन्नदाता बेहद संकट में है
आजमगढ़, 31 अक्टूबर 2026। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने कहा कि बंगाल की खाड़ी से उठे अरनव चक्रवात ने उत्तर प्रदेश सहित आजमगढ़ के किसानों की कमर तोड़ दी है।
लगातार हो रही बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी धान, गन्ना और सब्जी की फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इस चक्रवात ने न सिर्फ फसल बर्बाद की है बल्कि गरीबों और मजदूरों की झोपड़ियां भी उजाड़ दी हैं।
किसान कर्ज के तले दबा होने के बावजूद 140 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए दिन रात खून-पसीना बहाता है। लेकिन इस तरह की प्राकृतिक आपदा उसकी कमर तोड़ देती है और किसान कर्ज के दलदल में फंसता चला जाता है।
किसान नेता राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव वीरेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार किसानों के साथ दोहरा अत्याचार कर रही है। एक तरफ प्रकृति ने फसल उजाड़ दी, दूसरी तरफ सरकार और कालाबाजारी करने वाले खाद को गोदामों में बंद कर किसानों को लूट रहे हैं।
किसान नेताओं ने सरकार से मांग की है कि अरनव चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का तत्काल आकलन कराया जाए। राजस्व विभाग की टीम गांव-गांव जाकर सर्वे करे।
जिन किसानों की धान, गन्ना, सब्जी और जिन गरीबों की झोपड़ियां उजड़ी हैं, उन्हें तत्काल मुआवजा देकर नुकसान की भरपाई की जाए। खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
खाद और बीज के बढ़े हुए दाम तत्काल वापस लिए जाएं और सरकारी दर पर हर हाल में किसानों को खाद और बीज मुहैया कराया जाए। हड़ताल पर बैठे साधन सहकारी समितियों के कर्मचारियों की मांगों को सुनकर हड़ताल समाप्त कराई जाए ताकि किसानों को खाद मिल सके।
किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और नाकामी के चलते खाद की कीमत आसमान छू रही है। कालाबाजारी ने किसानों को संकट में डाल दिया है। एनपीके के दामों में प्रति बोरी 550 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
1350 रुपये की डीएपी 2000 रुपये में मिल रही है। 266 रुपये की यूरिया 500 रुपये में किसानों को दी जा रही है। बुवाई के इस महत्वपूर्ण सत्र में खाद और बीज के लिए किसान दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है।
सरकार की नीतियों के विरोध में पिछले एक हफ्ते से ज्यादा समय से साधन सहकारी समितियों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे किसानों को एक बोरी खाद तक मिलना मुश्किल हो गया है।