नशामुक्त भारत महायज्ञ बने हम सभी का संकल्प :राज्यपाल

जयपुर, 30 अक्टूबर । राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यज्ञ त्याग, समर्पण, और अर्पण से जुड़ा होता है। वैदिक परंपरा में यज्ञ केवल अग्नि में घी और मंत्रों की आहुति देने तक सीमित नहीं है। समाज का कल्याण, परोपकार, सत्य और श्रेष्ठ कर्म भी यज्ञ कहलाते हैं। उन्होंने नए भारत के निर्माण में “नशामुक्त भारत” संकल्प यज्ञ में सभी को मिलकर भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

बागडे शुक्रवार को भारत विकास परिषद एवं आर्य युवा समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 501 कुण्डीय संस्कार महायज्ञ नशामुक्त भारत संकल्प कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 501 कुंडीय महायज्ञ में आहुति भी दी। महर्षि अरविंद के लिखे ‘वेद रहस्य’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यज्ञ सत्य, प्रकाश और अमरत्व की खोज है। यह महायज्ञ भी जीवन की सकारात्मकता की ओर ले जाने वाला है।

राज्यपाल ने देश के स्कूल, कॉलेज के युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृति पर चिंता जताते हुए कहा कि पड़ोसी देश नहीं चाहते की भारत तेजी से विकास की ओर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत देश के युवाओं और यहां के लोगों के भरोसे से ही आगे बढ़ रहा है। इसीलिए पड़ोसी देश मादक पदार्थ पैसे कमाने के लिए नहीं बल्कि देश को कमजोर करने के लिए बाहर से भेजते हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘नशामुक्त भारत’ कार्यक्रम इसीलिए चलाया है कि देश पड़ोसी देशों के षडयंत्र का शिकार नहीं हो। उन्होंने कहा कि नया भारत इस तरह राष्ट्र को कमजोर करने वाले कारणों के खिलाफ कार्य करने वाला है। उन्होंने कहा कि नया भारत आत्म निर्भरता के लिए स्वदेशी उत्पादों का निर्माण वाला है। नया भारत अर्थव्यवस्था में विश्वभर में तेजी से आगे बढ़ने वाला है।

राज्यपाल ने भारत के प्राचीन और गौरवमय भारत के इतिहास और संस्कृति से युवाओं को जोड़ने के लिए नई शिक्षा नीति के आलोक में कार्य करने का भी आह्वान किया। उन्होंने भारत विकास परिषद द्वारा समाज को नशामुक्त करने के लिए निरंतर जागरूक किए जाने का आग्रह किया। उन्होंने भारत विकास द्वारा नशामुक्त भारत के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

राज्यपाल बागडे ने इससे पहले नशामुक्त भारत के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं और विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया। इस मौके पर डीएवी स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

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