नई दिल्ली, 30 अक्टूबर । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के पूर्व सीएमडी कपिल वधावन, पूर्व डायरेक्टर धीरज वधावन, व्यवसायी अजय रमेश नवांदर और अन्य लोगों के खिलाफ तय किए गए आरोपों में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। स्पेशल जज संजीव कुमार मल्होत्रा ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने कहा कि अदालत अपने ही द्वारा तय किए गए आरोपों के आदेश की समीक्षा नहीं कर सकती। इसमें केवल किसी लिपिकीय या टाइपिंग संबंधी गलती को सुधारने की ही गुंजाइश है।
इन तीनों और अन्य लोगों पर बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। सीबीआई ने जून, 2022 में इस मामले में केस दर्ज किया था। आरोप है कि इन्होंने 17 बैंकों के एक समूह के साथ 34 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
सीबीआई के अनुसार यह देश के सबसे बड़े बैंकिंग लोन घोटालों में से एक था। सीबीआई ने 15 अक्टूबर, 2022 को 55 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट पर न्यायालय ने संज्ञान भी लिया था। इस चार्जशीट को आरोपितों की ओर से अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत अधूरा बताया था। सीबीआई ने कपिल वधावन और धीरज वधावन को जुलाई, 2022 में गिरफ्तार किया था। इस मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत 17 दूसरे बैंकों से करीब 42 हजार करोड़ का लोन लेकर उसे डीएचएफएल दूसरी कंपनियों में अवैध तरीके से ट्रांसफर किए गए।