नई दिल्ली, 28 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की ओर से दायर की जा रही याचिकाओं की बढ़ती संख्या को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय देश के हर समस्याग्रस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए एक मंच नहीं बन सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये चेतावनी दी।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे हर मामले को उच्चतम न्यायालय के सामने लाने से उन लंबित मामलों की सुनवाई में देरी हो सकती है, जिनमें डेवलपर्स और वित्तीय संस्थानों की अनियमितताओं से जुड़े कानूनी मुद्दे शामिल हैं। न्यायालय ने कहा कि जो प्रोजेक्ट उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन मुख्य मामलों का हिस्सा नहीं हैं, उनके याचिकाकर्ताओं को या तो मुख्य मामले में आने वाले फैसले का इंतजार करना चाहिए या फिर संबंधित उच्च न्यायालय या रेरा जैसे मंचों का रुख करना चाहिए।
न्यायालय ने यह टिप्पणी उस समय की जब कुछ याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि उनके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह छोड़ दिया गया है और घर खरीदारों को कोई राहत नहीं मिल रही है। न्यायालय ने व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं को उचित कानूनी मंच पर जाने की सलाह दी।
जब अधिवक्ताओं ने 26 नवंबर को याचिकाओं को पुनः सूचीबद्ध करने का सुझाव दिया, तो न्यायालय ने कहा कि वह इस स्तर पर स्थानांतरण याचिकाओं पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि मुख्य मामले में दिया गया निर्णय उच्च न्यायालय को निर्धारित सिद्धांतों का पालन करने के लिए बाध्य करेगा।