भराड़ीसैंण(गैरसैंण), 27 अक्टूबर । उत्तराखंड विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के पहले दिन मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर सदन में शोक व्यक्त किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत 44 विधायकों ने दोनों नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रदेश के विकास और जनसेवा में उनके योगदान को याद किया।
ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुई। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की अध्यक्षता में सदन की कार्यवाही के दौरान पहले दिन सदस्यों ने दोनों दिवंगत नेताओं के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री धामी ने खंडूड़ी के सैन्य जीवन, राजनीतिक सफर और प्रशासनिक कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए खंडूड़ी ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वर्णिम चतुर्भुज और उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनका योगदान रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में खंडूड़ी ने सुशासन, पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और आधारभूत ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी। उनकी अनुशासित कार्यशैली और स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन पर अपनी छाप छोड़ी।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी खंडूड़ी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल और प्रदेश के विकास में योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी का सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दोनों नेताओं के सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक योगदान और प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका को स्मरण किया। सदन में उपस्थित मंत्रियों और विधायकों ने भी दोनों दिवंगत नेताओं के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया।
चकराता से विधायक प्रीतम सिंह ने खंडूड़ी की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक निर्णय क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी जनहित में फैसले लेते समय दबाव में नहीं आते थे। उनकी स्पष्टवादिता और अनुशासन उनकी पहचान थी।
विधायक मोहम्मद शहजाद ने वर्ष 2007 से 2012 तक के खंडूड़ी के मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए उनकी ईमानदारी और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को याद किया। विधायक अरविंद पांडे ने वर्ष 2007 के बाजपुर उपचुनाव से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए उनके राजनीतिक नेतृत्व का उल्लेख किया।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने लैंसडाउन में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के बच्चों के लिए छात्रावास निर्माण के वास्ते भूमि उपलब्ध कराने में खंडूड़ी के प्रयासों को याद किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी का सेना और सैनिक परिवारों के प्रति विशेष लगाव था।
विधायक आदेश चौहान ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चित नारे ‘खंडूड़ी है जरूरी’ का उल्लेख करते हुए उनकी लोकप्रियता और प्रदेश की राजनीति में प्रभाव को याद किया। विधायक बृज भूषण गैरोला ने राज्य आंदोलन से लेकर राज्य गठन के बाद प्रदेश के विकास में खंडूड़ी की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क, संचार, पेयजल और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सदन में दोनों दिवंगत नेताओं के सार्वजनिक जीवन और प्रदेश के प्रति उनके योगदान को स्मरण किया। उनकी अध्यक्षता में सदन के सदस्यों ने दोनों नेताओं के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विधायक बंशीधर भगत समेत अन्य मंत्रियों और विधायकों ने भी दोनों दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी।