प्रयागराज, 07 अक्टूबर । मनुष्य को अपने जीवन में आलस्य और प्रमाद से बचना चाहिए। 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट ईश्वर के लिए अवश्य निकालने चाहिए। युवाओं का अध्यात्म से जुड़ाव आवश्यक है। आज बड़ी संख्या में युवा धर्म, अध्यात्म और राष्ट्र से जुड़े प्रश्न पूछ रहे हैं, यह सुखद संकेत है। यह बातें पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बुधवार को श्री शिवगंगा आश्रम, झूंसी में अपने दस दिवसीय प्रवास के दौरान लोगों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि ऐसा विकास उचित नहीं है, जिससे मानव जीवन की सार्थकता ही समाप्त हो जाए। विकास के साथ मनुष्य को अपने अस्तित्व, संस्कार और आदर्शों की भी रक्षा करनी चाहिए। सनातन मान-बिंदुओं की रक्षा के लिए समाज को जागरूक होना होगा और सभी को धर्म से जुड़कर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को केवल पेट और परिवार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि ‘एक घंटा, एक रुपया’ जैसे सेवा प्रकल्प चलाकर हिंदू समाज की कई समस्याओं का समाधान आपसी सहयोग से किया जा सकता है।
शंकराचार्य ने युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश देते हुए कहा कि अपने और दूसरों की रक्षा करने में सक्षम बनने के लिए युवाओं को आवश्यक प्रशिक्षण लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर हिंदू को अपने अस्तित्व और आदर्शों की रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में धर्मनिष्ठा और भगवद्भक्ति हो तो वह आत्मबल के साथ जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सकता है। धर्म और आध्यात्मिक जीवन व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाते हैं।
विद्यार्थियों और युवाओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए शंकराचार्य ने दिनचर्या को लेकर भी मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय पर सोना चाहिए और सूर्योदय से एक-दो घंटे पहले उठने का प्रयास करना चाहिए। सूर्योदय के समय सोने से मेधा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि नियमित और अनुशासित दिनचर्या से अध्ययन और चिंतन की क्षमता बेहतर होती है।
इस अवसर पर स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, रामकैलाश पांडेय, पवन सहित अन्य श्रद्धालु एवं अनुयायी उपस्थित रहे।