ग्रामीण पेयजल योजनाओं की स्थिरता के लिए पंचायतों की भूमिका बढ़ाने पर केंद्र सरकार का जोर

नई दिल्ली, 29 सितंबर । केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जलापूर्ति व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया है। पंचायतों को पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लेने के साथ जल स्रोतों के संरक्षण और उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से मंगलवार को ‘सुजल ग्राम संवाद’ के 11वें संस्करण का आयोजन किया गया। विभाग के सचिव अशोक केके मीणा की अध्यक्षता में हुए इस बहुभाषी संवाद में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं अतिरिक्त मिशन निदेशक कमल किशोर सोन समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अशोक केके मीणा ने कहा कि ग्रामीण पेयजल व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पंचायतों से एक-दूसरे के अनुभवों और जमीनी स्तर पर किए जा रहे नवाचारों से सीखने तथा स्थानीय जल प्रबंधन को मजबूत करने का आह्वान किया।

अशोक केके मीणा ने पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव में पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ाने, उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह की व्यवस्था को मजबूत करने और योजनाओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों के माध्यम से जल स्रोतों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताई।

संवाद के दौरान मध्य प्रदेश के उज्जैन की सकारिया, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार की दशिनपारा, झारखंड के बोकारो की गोराबाली दक्षिण और लद्दाख के नुब्रा की पार्टापुर ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों ने पेयजल योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

सकारिया ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि पहले ग्रामीण पेयजल के लिए कुओं और नलकूपों पर निर्भर थे, लेकिन अब हर घर में नल से पानी पहुंच रहा है और गांव को ‘हर घर जल’ का दर्जा मिल चुका है। पंचायत में पेयजल व्यवस्था के संचालन के लिए 150 रुपये प्रतिमाह उपयोगकर्ता शुल्क लिया जा रहा है और पानी की गुणवत्ता की साप्ताहिक जांच की जाती है। गांव में 16 मार्च 2026 को ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।

पश्चिम बंगाल के दशिनपारा के प्रतिनिधियों ने नेपाली भाषा में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन से पहले गांव में सुरक्षित पेयजल की समस्या थी और लोग सार्वजनिक नलों तथा कुओं पर निर्भर थे। अब घरों के साथ स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी नल से पानी उपलब्ध है। प्रतिनिधियों के अनुसार, सुरक्षित पेयजल मिलने से जलजनित बीमारियों में कमी आई है और महिलाओं को पानी लाने के लिए होने वाली परेशानी भी कम हुई है।

झारखंड के बोकारो जिले की गोराबाली दक्षिण ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि नल से पानी पहुंचने से ग्रामीण परिवारों की परेशानियां कम हुई हैं। ‘जल सहिया’ मॉडल के तहत महिलाएं समुदाय को जागरूक करने, उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह, शिकायतों के समाधान और जनभागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले में ‘जल सहिया’ मॉडल समेत करीब 15 सामुदायिक मॉडल संचालित हैं।

लद्दाख के नुब्रा क्षेत्र की पार्टापुर ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि जल जीवन मिशन से पहले सर्दियों में पेयजल हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। ग्रामीणों को दूर के जल स्रोतों या पिघली बर्फ पर निर्भर रहना पड़ता था। अब घरों में पूरे वर्ष नल से पानी उपलब्ध है। करीब माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी तकनीकी उपायों के कारण जलापूर्ति व्यवस्था को बनाए रखा जा रहा है।———–

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.