थप्पड़कांड पर घिरे प्रवेश वर्मा? पुलिस में शिकायत…

थप्पड़कांड पर घिरे प्रवेश वर्मा! पुलिस में शिकायत… और थप्पड़ खाने वाले युवक पर भी केस!

दिल्ली की राजनीति में सड़क से शुरू हुआ विवाद अब थाने तक पहुंच गया है

PWD मंत्री प्रवेश वर्मा पर एक युवक को थप्पड़ मारने के आरोप में दिल्ली पुलिस को शिकायत दी गई है। घटना तिलक नगर में सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण के दौरान हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में प्रवेश वर्मा युवक का मोबाइल नीचे करते और उसके बाद उसे थप्पड़ मारते दिखाई देते हैं।

जिस युवक को थप्पड़ मारा गया, उसके खिलाफ भी पुलिस रिकॉर्ड में मामला होने की बात सामने आई है। यानी अब मामला बन गया है , एक तरफ मंत्री पर थप्पड़ मारने का आरोप, दूसरी तरफ युवक का पुलिस केस!

सवाल यह है कि आखिर तिलक नगर की सड़क पर हुआ क्या था? मौके पर AAP विधायक जरनैल सिंह भी मौजूद थे। सड़क की गुणवत्ता को लेकर मंत्री और विधायक के बीच बहस हुई। इसी दौरान युवक साहिब सिंह, जो विधायक के साथ था, पूरी बातचीत का वीडियो बना रहा था। उसकी अपनी सफाई है कि वह लाइव स्ट्रीमिंग कर रहा था और उसने मंत्री को गाली नहीं दी।

साहिब सिंह का आरोप है कि लाइव स्ट्रीम रोकने के लिए प्रवेश वर्मा ने उसका फोन नीचे किया और फिर उसे थप्पड़ मारा। उसने पुलिस में शिकायत भी दी है।

प्रवेश वर्मा ने वीडियो जारी करके कहा कि उनके परिवार के बारे में कथित तौर पर अपशब्द कहे गए, जिसके बाद उन्होंने “आवेश में आकर” प्रतिक्रिया दी। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि AAP विधायक जरनैल सिंह PWD अधिकारियों पर ठेकेदार से संपर्क कराने और कमीशन दिलाने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि PWD के एक इंजीनियर ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत की है।

लेकिन ध्यान रखिए ये आरोप हैं, अभी इन आरोपों का न्यायिक रूप से सत्यापन नहीं हुआ है। उधर AAP ने इसे कानून-व्यवस्था और सत्ता के दुरुपयोग का मुद्दा बनाया है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और अरविंद केजरीवाल ने भी गिरफ्तारी की मांग की है।

अब इस पूरे विवाद पर बड़ा सवाल 

क्या किसी मंत्री को किसी नागरिक पर हाथ उठाने का अधिकार है?

और अगर युवक ने कोई गाली दी, अभद्रता की या कानून तोड़ा था, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता क्या नहीं था?

लोकतंत्र में कानून इसलिए बनाया गया है कि विवाद का फैसला थप्पड़ से नहीं, कानून से हो।

लेकिन दूसरी तरफ, यदि मंत्री के परिवार के बारे में अपशब्द कहे जाने या सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं, तो उनकी भी पुलिस जांच होनी चाहिए।

यानी इस मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जरूरी है। और शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक है—

सड़क की गुणवत्ता पर सवाल हो सकता है…सरकार से सवाल हो सकता है… मंत्री से सवाल हो सकता है…लेकिन सवाल का जवाब थप्पड़ है या कानून?

क्योंकि अगर सत्ता के गलियारों में बहस की जगह हाथ उठने लगे, तो फिर आम आदमी किस दरवाजे पर जाएगा? और अब जबकि शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी है, नजरें दिल्ली पुलिस पर हैं—

क्या कानून मंत्री और युवक—दोनों के मामले में एक जैसा लागू होगा?

क्योंकि लोकतंत्र में असली परीक्षा  यह नहीं…कानून की ताकत किसके हाथ में है,  कानून सबके लिए बराबर है या नहीं यह मायने रखता है।

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