जयपुर, 22 सितंबर । भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने फर्जी आरजीएचएस अधिकारी बनकर अस्पताल की ऑडिट कराने के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में 40 हजार रुपये प्राप्त करने के बाद एक संदिग्ध को डिटेन किया है। एसीबी चौकी जयपुर नगर-तृतीय की टीम ने मुख्यालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की। संदिग्ध की पहचान मनीष कुमार शर्मा के रूप में हुई है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता ने बताया कि एसीबी को शिकायत मिली थी कि डीडवाना, नागौर स्थित एसकेआई हॉस्पिटल की ऑडिट कराने के एवज में मनीष कुमार शर्मा ने पहले 35 हजार और बाद में 45 हजार रुपये रिश्वत मांगी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई के दौरान मनीष कुमार शर्मा को परिवादी से 40 हजार रुपये प्राप्त करने के बाद डिटेन कर लिया।
एसीबी के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया कि संदिग्ध ने एआई की सहायता से संतोष कुमार शर्मा के नाम से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर पदनाम का फर्जी पहचान पत्र तैयार किया था। इसके अलावा एसकेआई हॉस्पिटल, डीडवाना के नाम से 22 अगस्त 2026 का पत्र क्रमांक 3350 भी तैयार किया गया था।
आरोप है कि संदिग्ध ने फर्जी पहचान पत्र और पत्र अस्पताल के मैनेजर को दिखाकर पहले 35 हजार और बाद में 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। उसने खुद को आरजीएचएस में यूडीसी पद पर होना बताते हुए परिवादी से 40 हजार रुपये प्राप्त किए।
एसीबी के अनुसार जांच में मनीष कुमार शर्मा का नाम और पदनाम भी फर्जी पाया गया। वह लोक सेवक नहीं है। प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी, फर्जी पहचान पत्र तैयार करने और प्रतिरूपण के तथ्य सामने आए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।