नूंह, 18 सितंबर । मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज नूंह की व्यवस्थाओं और कथित बदहाली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नूंह विधायक आफताब अहमद ने कॉलेज की स्थिति पर चिंता जताते हुए हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक एवं पूर्व विधायक जाकिर हुसैन पर कॉलेज को बंद करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं जाकिर हुसैन ने विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज और वाईएमडी कॉलेज को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत बदनाम करने का आरोप लगाया है।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में विधायक आफताब अहमद ने कहा कि मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की दुर्दशा की खबर बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद हरियाणा वक्फ बोर्ड का देश का एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज भी कथित तौर पर बदहाली का सामना कर रहा है। कॉलेज में शिक्षकों को चार महीने से अधिक समय से वेतन नहीं मिलने और गेस्ट टीचर्स को हटाए जाने का मामला भी उन्होंने उठाया। आफताब अहमद ने कहा कि नूंह का वाईएमडी कॉलेज भी लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। उनके अनुसार कॉलेज में नियमित शिक्षकों की संख्या बेहद कम है और वर्षों से रिक्त पदों को नहीं भरा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इसी तर्ज पर मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज को भी बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व विधायक व हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन पर जानबूझकर कॉलेज को बंद करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना उचित नहीं है।
आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित : जाकिर हुसैन
नूंह के पूर्व विधायक एवं हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन ने विधायक आफताब अहमद के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक द्वारा मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज और वाईएमडी कॉलेज को एक षड्यंत्र के तहत बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जाकिर हुसैन ने कहा कि हरियाणा वक्फ बोर्ड के खिलाफ किए जा रहे प्रचार में तथ्य नहीं हैं और यह पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने कांग्रेस पर वक्फ बोर्ड को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार द्वारा ऐसा कानून बनाया गया, जिसके कारण वक्फ बोर्ड की स्थिति खराब हुई। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से हरियाणा वक्फ बोर्ड ने प्रगति की। जाकिर हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान अधिकारियों और इमामों को कई-कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता था।