रुड़की, 03 सितंबर । भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अहम योगदान देते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने “फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रणालियों (एफएसपीवी) का विस्तार” शीर्षक से व्यापक राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार की है। इसमें प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के अनुरूप देश में एफएसपीवी के तीव्र विकास के लिए सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं, ताकि नेट जीरो 2070 लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सके।
आईआईटी रुड़की के मीडिया विभाग द्वारा गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने किया। उन्होंने कहा कि फ्लोटिंग सोलर पीवी प्रणालियां नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर एकीकरण को सक्षम बनाने और सीमित जल संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। नीति, निवेश और कार्यान्वयन के मार्गदर्शन के लिए ऐसे साक्ष्य-आधारित अध्ययन आवश्यक हैं।
प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में एफएसपीवी प्रणालियों की वैश्विक स्थिति, विकास के रुझान और तैनाती की समीक्षा की गई है, जिसमें भारत पर विशेष फोकस है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने विज्ञान-आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने की संस्थान की प्रतिबद्धता रेखांकित की।
रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों पर फ्लोटिंग सोलर लगाने से भूमि संसाधनों की प्रतिस्पर्धा खत्म होगी, जल के वाष्पीकरण में कमी आएगी और ऊर्जा उत्पादन के साथ जल संरक्षण भी होगा। यह विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा।