प्रयागराज, 01 सितम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक प्रदर्शन के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में ली गई दिल्ली विश्वविद्यालय की इतिहास स्नातक आकृति चौधरी की भूमिका को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा। अदालत ने पूछा कि आखिर वह कौन सा साक्ष्य है जिससे यह साबित होता है कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ मंगलवार को आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में करीब पांच महीने से जारी हिरासत को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि रिकॉर्ड में कहां यह दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पत्थर फेंकने के लिए कहा था। न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या कोई ऐसा साक्ष्य है जिससे पता चलता हो कि उसने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में आग लगाने के लिए कहा था। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह देखा जाना चाहिए था कि किन गवाहों ने विशेष रूप से आकृति का नाम लिया है।
इसके बाद राज्य सरकार ने आकृति को आरोपों से जोड़ने वाले गवाहों के बयानों का हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने कथित घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग के बारे में सवाल किया और राज्य से पूछा कि वीडियो में वह स्थान दिखाया जाए जहां आकृति प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर भड़का रही हों। राज्य सरकार ने कहा कि वह वीडियो हासिल कर अदालत के समक्ष पेश करेगी और इसके लिए समय मांगा। न्यायालय ने और समय देने से इनकार कर दिया। जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि आकृति पहले ही पांच महीने से जेल में हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा, “मैं समय नहीं दूंगा। वह पांच महीने से जेल में हैं।” इसके बाद राज्य सरकार ने मामले को अगले दिन सुबह 10 बजे सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। खंडपीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आया कि अधिकारियों ने मनमाने तरीके से अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है तो संबंधित जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर जुर्माना लगाया जा सकता है। 25 वर्षीय आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की स्नातक हैं। उन्हें नोएडा में अप्रैल में हुए श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत हिरासत में लिया गया। उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में हिरासत की वैधता और उसे जारी रखने को चुनौती दी गई।
इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 13 मई को पत्रकार सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया। दोनों उन सात कार्यकर्ताओं में शामिल थे जिन्हें प्रदर्शन से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया। इससे पहले गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मीडिया के सामने दावा किया कि सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी समेत गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ पुलिस के पास मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। अब हाईकोर्ट ने राज्य से विशेष रूप से वह वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा, जिससे आकृति पर प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप की पुष्टि हो सके। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को सुबह 10 बजे होगी।