नई दिल्ली, 11 अगस्त । दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी (आआपा) के नेतृत्व पर वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे की गहरी साजिश को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए हमला बोला।
विधानसभा में बोलते हुए आशीष सूद ने कहा कि हिंसा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि आआपा के कई वरिष्ठ नेताओं (विधायक अमानतुल्लाह खान, सांसद संजय सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शामिल हैं) ने पूर्व आआपा पार्षद ताहिर हुसैन का बार-बार बचाव किया और उसे राजनीतिक संरक्षण देने का प्रयास किया। ताहिर हुसैन को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा (26) की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
आशीष सूद ने आआपा के नेताओं के कथित विरोधाभासी बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि केजरीवाल ने कहा था कि यदि आआपा का कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे दोगुनी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन 8 मार्च 2020 को आआपा विधायक अमानतुल्लाह खान ने सार्वजनिक रूप से ताहिर हुसैन का बचाव करते हुए कहा था कि ‘हुसैन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह मुस्लिम है। शायद आज भारत में सबसे बड़ा अपराध मुस्लिम होना है।’ एक तरफ दोगुनी सजा की बात और दूसरी तरफ पीड़ित होने का कार्ड—यह कैसा दोहरा मापदंड है?
सूद ने दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 तक की घटनाओं का विस्तृत क्रम विधानसभा के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के भाषणों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा का स्पष्ट उल्लेख किया गया था और भीड़ को लामबंद कर सड़कों को जाम करने तथा ‘चक्का जाम’ की अपील की गई थी। दोनों पर दंगा मामलों में आरोप हैं। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत की राजधानी पर केंद्रित था, उस समय देश के भीतर संकट पैदा करने की कोशिश की गई।
सूद ने हिंसा और घटनाक्रम की समयरेखा सदन में बताई। उन्होंने कहा कि 22-23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास विरोध-प्रदर्शन और सड़क अवरोध शुरू हुए, जिसके बाद मौजपुर-जाफराबाद क्षेत्र में झड़पें हुईं। 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में आगजनी, पथराव और पेट्रोल बम हमलों की घटनाएं व्यापक रूप से सामने आईं। इसी दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई। 25 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा को चांद बाग इलाके में एक हिंसक भीड़ द्वारा घसीटकर ले जाया गया। उनकी निर्मम हत्या की गई और शव को नाले में फेंक दिया गया।
आशीष सूद ने दंगों के दौरान इस्तेमाल किए गए कथित राजनीतिक टूलकिट को पांच चरणों में (नैरेटिव → लामबंदी → समन्वय → हिंसा/उकसावा → पीड़ित) परिभाषित किया। उन्होंने उन प्रमुख नेताओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों और नैरेटिव तैयार करने वालों की आलोचना की, जिन्होंने हिंसा के आरोपियों का बचाव किया और अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों को ही दोषी ठहराया।
सूद ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली को किसी भी राजनीतिक टूलकिट या ऐसी साजिश का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को बाधित करना हो।