शहीद नेता के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब, दुनिया में बढ़ती जागरूकता का संकेत
तेहरान: ईरान के एसोसिएशन फॉर डिफेंडिंग विक्टिम्स ऑफ टेररिज्म (ADVT) ने कहा है कि इस्लामी क्रांति के शहीद नेता को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी भारी भीड़ दुनिया में उन ताकतों के खिलाफ बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है, जिन्हें संगठन ने दमनकारी और वर्चस्ववादी बताया।
रविवार को जारी एक बयान में एडीवीटी ने कहा कि ईरान और विदेशों से लाखों लोगों ने अंतिम विदाई और जनाज़े में भाग लिया तथा मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को अन्यायपूर्ण और अपराधपूर्ण बताते हुए एकजुट संदेश दिया।
संगठन का दावा है कि 1979 की इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से अमेरिका और इज़राइल लगातार ईरान को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं। एडीवीटी के अनुसार, दोनों देशों ने पहलवी शासन के दौर जैसा प्रभाव दोबारा स्थापित करने के लिए विभिन्न रणनीतियां अपनाईं।
एडीवीटी ने आरोप लगाया कि इन प्रयासों में ईरान-इराक युद्ध के दौरान सद्दाम हुसैन के नेतृत्व वाले इराक का समर्थन, मुजाहिदीन-ए-खल्क (एमकेओ) जैसे ईरान विरोधी संगठनों को समर्थन तथा आर्थिक प्रतिबंध लगाना शामिल था। संगठन का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य इस्लामी गणराज्य को कमजोर करना और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करना था।
एनजीओ का कहना है कि राजनीतिक दबाव, सैन्य धमकियों, आतंकवाद और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने पश्चिमी देशों के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया और इसके बजाय अमेरिका तथा इज़राइल के खिलाफ तथाकथित “प्रतिरोध धुरी (Axis of Resistance)” को और मजबूत किया।
हालिया अमेरिका-इज़राइल सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए एडीवीटी ने दावा किया कि इन हमलों के पीछे यह धारणा थी कि ईरान के वरिष्ठ नेताओं की हत्या से देश का प्रतिरोध कमजोर पड़ जाएगा। हालांकि, संगठन के अनुसार इसका उल्टा असर हुआ और जनता के बीच एकजुटता और मजबूत हुई।
बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि हालिया घटनाओं ने लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा के पश्चिमी देशों के दावों के दोहरे मापदंड को उजागर कर दिया है। एडीवीटी ने अमेरिका पर मिनाब स्थित शजरे तैय्यबा स्कूल पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इस हमले में 168 स्कूली बच्चों की मौत हुई।
नोट: इस समाचार में अमेरिका, इज़राइल और अन्य घटनाओं से जुड़े आरोप एडीवीटी के दावों पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।