……..लेकिन जिहाद वाले बयान पर आरिफ मुहम्मद खान भी मौलाना मदनी का समर्थन करते नज़र आये
जिहाद पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा , मौलाना मदनी और मौलाना नदवी पर भडकाव बयानात का आरोप लगाया जा रहा है. हमने बार बार कहा है जिहाद जितना भारत में बोला गया या बोला जाता है इतना 57 मुस्लिम देशों में मिलाकर भी शायद इसका ज़िक्र नहीं होता होगा ,,, ज़रा सोचो अगर इसपर अमल हो जाता तो क्या होता ??
… इसके बर ख़िलाफ़ (India Hate Lab) की रिपोर्ट के मुताबिक़ , 2024 में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ 1,165 “hate-speech की घटनाएँ दर्ज की गयीं, जबकि 2023 में इन घटनाओं की संख्या 668 थीं …यानी सिर्फ एक साल में 74.4% की वृद्धि बताती है की देश में नफ़रत के बाज़ार को कितना बढ़ाया गया है।
2020 दिल्ली दंगों के बाद, कई नेताओं ने संसद में बताया कि “hate speeches” ने ही दिल्ली दंगों में हिंसा को हवा दी। सांसद ने बताया कि दंगों से पहले “भड़काऊ बयानबाज़ी” आम की गई, जो दंगों के लिए जमीन तैयार कर रही थीं।
हेट स्पीच की 1,165 घटनाओं के कई मामलों में “Love Jihad”, “Vote Jihad”, “Land Jihad”, थूक जिहाद, चूड़ी जिहाद और UPSC जिहाद -based conspiracy narratives चलाया गया था. जिसको नफरती नेशनल मीडिया की भट्टी में देहकाया गया था, कुछ याद आ रहा है आपको ….??
अच्छा यह बताएं की आपको याद है या भूल गए ?? अप्रैल 2025 में झारखंड के BJP सांसद निशिकांत दुबे Supreme Court पर क्या टिपण्णी कर रहे थे. झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे अपने बयान में कह रहे थे कि देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट ज़िम्मेदार है.
उनके समर्थन में उतरे बीजेपी के ही राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा , कोई भी राष्ट्रपति ,लोकसभा और राज्यसभा को निर्देशित नहीं कर सकता है. लेकिन लोक सभा में और राज्य सभा में आपके साथियों को अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, खुले आम सदन के पटल पर जातिसूचक या धर्मसूचक गालियां देने की पेर्मिशन आपको कहाँ से मिली है ?
Supreme Court तो खामोश ही बैठा है उसने कब लोकतंत्र और संविधान को रोंदने और जलाने वालों को फांसी की सजा सुनाई है? रमेश बिधूड़ी की सदन में दी गई गालियां तो देश को याद ही हैं न ??….
दूसरी तरफ जिस जिहाद लफ्ज़ पर आसमान सर पर उठाया हुआ है उसी जिहाद लफ्ज़ पर सुरेश चौहान के बिंदास बोल programme में कितना भ्र्म फैलाया जाता रहा है. यह भी देश को पता है …..
उनके हर प्रोग्राम में जिहाद लफ्ज़ की आपको पुनरावृत्ति दिखाई देगी, मिसाल के तौर पर 4 – 5 headlines बताता हूँ जैसे …..
Bhiwandi में लैंड जिहाद का सफाया !
Land Jihad के खिलाफ Maharashtra के छत्रपति संभाजीनगर में गरजा सरकार का बुलडोजर
UP के सैदपूरा गांव में आई बारात पर जिहादियों ने किया हमला…
मजार कब्जे की साजिश उजागर,जिहादी नेटवर्क का पर्दाफाश
Love Jihad के खिलाफ सड़कों पर हिन्दू हुंकार
Love Jihad के षड्यंत्र में फंसी मासूम हिंदू युवती ,,,, वग़ैरा वग़ैरा. अब यहाँ जिहाद की अभद्र और ग़ैर इस्लामिक व्याख्या पर कौन मुस्लिम नेता या मौलवी बोलै आप बताएं?
लेकिन जिहाद जैसे पवित्र इस्लामिक शब्दावली को लेकर लगातार अभद्र शब्दों का इस्तेमाल और इस लफ्ज़ को आतंकवाद जैसे घिनौने कृत्य से जोड़कर लगातार मुसलमानों के जज़्बात से खिलवाड़ आखिर उलेमा कब तक बर्दाश्त करें.
उनकी धार्मिक ज़िम्मेदारी है कि वो अपने प्रवचन के द्वारा क़ुरआन के अंदर अलग अलग मौक़ों पर आने वाले लफ्ज़ जिहाद की सही व्याख्या करें, उसका मतलब बताएं के जिहाद का असल मानी और मक़सद क्या हैं. कोई एक व्यक्ति भी नहीं चाहता कि उसपर झूलन को लेकिन ज़ुल्म को होते हुए देखता रहता है या खुद भी उसमें शामिल हो जाता है.
क़ुरआन पर ईमान रखने वाले हर शख्स पर लाज़िम है कि वो हर ज़ालिम को ज़ुल्म से रोकने की कोशिश करे अब चाहे ज़ुल्म दलित पर हो या ब्राह्मण पर मुस्लमान पर हो या सिक्ख पर जैन पर हो या बौद्ध पर, ईसाई पर हो या पारसी या यहूदी पर. दरअसल ज़ालिमों की लफ्ज़ जिहाद को Sabotage करने या बदनाम करने की यह सोची समझी INTERNATIONALसाज़िश है. और इस हमाम में अक्सर मुल्क नंगे हैं.
मौलाना महमूद मदनी के जिहाद बयान का Governor आरिफ़ मुहम्मद ख़ान ने समर्थन किया है. हालाँकि खान को अक्सर बीजेपी समर्थक और हिन्दू संस्कृति का प्रेरक या अनुयायी होने का उनपर आरोप लगता रहा है. हो सकता है इस सोच के पीछे उनका कोई सियासी मफाद छुपा हो, और सियासत में इस तरह के नाटक दुनिया करती ही रहती है.
लेकिन जिहाद वाले बयान पर आरिफ मुहम्मद खान भी मौलाना मदनी का समर्थन करते नज़र आये क्या कहाँ Governor साहब ने मौलाना मेहमूद मदनी से में १०० फीसद इत्तिफ़ाक़ रखता हूँ. उन्होंने कहा शायद हे कोई उनके इस बयान का विरोध करे.
अब रहा रामपुर से सांसद मौलाना मुहिबुल्लाह नदवी के बयान का सवाल तो उन्होंने भी सदन में मौलाना मदनी साहब के बयान को ही QUOTE किया था . अंदाज़ बेशक मुहिबुल्लाह नदवी का था मगर बयान मौलाना मदनी का था. हालांकि मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने इस बात को साफ़ करने की कोशिश की के सदन में मैंने जिहाद पर जो कुछ कहा वो REFERENCE दिया गया था. मगर मीडिया ने उनको घेरने की कोशिश की तब उन्होंने कहा जब media एक ख़ास COMMUNITY के मोरल को डाउन करने की कोशिश करे तो उससे BYCOT करना भी जिहाद होता है इसलिए मैं आपका भी BYCOTT करता हूँ.
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