कौन होगा किसी अनहोनी का ज़िम्मेदार
क्या राहुल गाँधी की जान को खतरा है ? इस ख़ौफ़नाक अंदेशे से बचने का क्या तरीक़ा हो सकता है
पिछले दिनों संसद में वोट चोर कुर्सी छोड़ के नारे लगे , और यह वोट चोरी का मामला काफी टूल पकड़ चूका है .पूरे देश के अलग अलग राज्यों में गठबंधन कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आये हैं .
देश में नई क्रान्ति और आज़ादी को बचने का माहौल है . पूरे विपक्ष में वोट चोरी को लेकर रोष है ग़ुस्सा है. डेमोक्रेसी बचने के लिए SP सांसद मौलाना मुहिबुल्लाह अपनी जान तक क़ुर्बान करने की बात कर रहे हैं .
लेकिन सवाल यह पैदा होता है के क्या वोट चोरी मुद्दा देश की सत्ता को बदल सकता है ? “वोट चोरी” यानी चुनावी धांधली या वोट में गड़बड़ी भारत में कानूनी रूप से सत्ता परिवर्तन का कारण बन सकती है, लेकिन यह काम बहुत मुश्किल और दुर्लभ भी है, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल है.
अगर किसी पार्टी या उम्मीदवार पर वोट चोरी (बूथ कैप्चरिंग, फर्जी वोटिंग, ईवीएम में गड़बड़ी, आदि) का आरोप लगता है, तो विपक्ष को चुनाव आयोग और अदालत में पुख्ता सबूत देने होते हैं।
अगर विपक्ष सारे सुबूत रख देता है उसके बाद चुनाव आयोग उसको माने या न माने यह उसका फैसला है .आजकल सरकारी एजेंसीज किसके कहने पर काम कर रही हैं यह देश की जनता जानती है.
लेकिन यह सही है कि अदालत अगर सुबूतों के आधार पर यह साबित कर दे कि नतीजे धांधली से प्रभावित हुए, तो चुनाव रद्द हो सकता है और फिर से चुनाव (re-poll) हो सकता है जिसके बाद सत्ता बदल सकती है।
इसको मिसाल के साथ भी समझ लेते हैं ….1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनावी गड़बड़ी के आरोप में इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया था। मालूम है न आपको ?? इसके बाद देश में बड़ा राजनीतिक संकट आया और अंततः आपातकाल यानी (Emergency) लगा दी गई ।
जनता को इंद्रा गाँधी द्वारा Emergency का फैसला पसंद नहीं आया और 1977 में चुनाव हुए नतीजा यह हुआ कांग्रेस का पत्ता साफ़ हो गया यहाँ तक कि इंद्रा गाँधी भी चुनाव हार गईं. जबकि आज देश में अघोषित आपातकाल कई बरसों से चल रहा है।
अब बनारस लोकसभा चुनाव में वोट चोरी और EVM में गड़बड़ी कराये जाने की बात उठ रही है , अगर उसकी जाँच हुई और धान्द्ली साबित हो गई !!!! तो क्या भारत में Midterm elections हो सकते हैं ? शायद नहीं उसकी वजह यह है आज सभी एजेंसीज पर शासक वर्ग का क़ब्ज़ा है, शासक तथा प्रशासक वर्ग के लगभग 60 % की मंशा और टारगेट भी एक है.
इसलिए प्रशासकीय स्तर पर सत्तापक्ष को शायद कोई चुनौती न मिल सके …… अलबत्ता देश की जनता जो लगभग 80 % तक सत्तारूढ़ की नीतियों के खिलाफ है अगर विपक्ष के साथ आजाये तो देश में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. लेकिन इस बीच नागरिकों का भारी जानी माली नुकसान हो सकता है.
क्योंकि सत्तापक्ष इसको Civil disobedience movement का नाम देकर देशद्रोह से जोड़ेगी जिसकी झलक आपको देखने को मिल रही है . देश में सत्तापक्ष के विरुद्ध विपक्ष का इतना बड़ा प्रदर्शन देश में पहली बार दिल्ली में देखने को मिला जिसमें तमाम विपक्षी सांसद शामिल हुए .
राहुल गाँधी की जान को खतरा हो सकता है इसकी क्या संभावनाएं हैं इसपर एक छोटी सी वीडियो पहले आप देखें … इसके बाद आपको कुछ और संबंधित तथ्य बताते हैं…..
आपको याद दिला दें कि
1. 1865 में अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को अमेरिकी दक्षिणी राज्यों (Confederacy) के समर्थक जॉन विल्क्स बूथ ने गोली मार कर हत्या कर दी थी । जॉन बूथ , दक्षिणी राज्यों को लिंकन की गुलामी से आज़ाद कराना चाहता था और गृहयुद्ध में दक्षिण की हार से नाराज़ था।
2. 1948 में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता महात्मा गांधी की ,,,,हिंदूवादी संगठन RSS के नाथूराम गोडसे ने बापू के आश्रम में प्रार्थना सभा के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी महात्मा गाँधी कट्टरवाद , साम्राजयवाद और पूँजीवाद के घोर विरोधी थे और भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता और समानता के पक्षधर थे यही कारण उनकी मौत का जरिया बना ।
3. 1951 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को एक अफगान नागरिक ने रावलपिंडी में सभा के दौरान गोली मार कर हत्या कर दी थी इसकी वजह राजनीतिक दुश्मनी और अफ़ग़ान पाकिस्तान सीमा विवाद भी बताया जाता है।
4. 1963 अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी को गोली मारकर हत्या की गयी थी ; असली कारणों की वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है इस पर विवाद है , क्या शीत युद्ध के कारण हत्या की गई या क्यूबा संकट की वजह से या फिर कोई और Conspiracy Theory थी .. बताया यह भी जाता है की अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA ने ही उनकी हत्या कराई थी .
6. 1984 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पद पर रहते हुए उन्ही Body Guards द्वारा हत्या कर दी गई थी , ऑपरेशन ब्लू स्टार यानी सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर पर आतंकी गतिविधियों के शक में चलाई गई गोली और कई सिक्ख मज़हबी Leaders के मारे जाने के बाद उनको assasinate किया गया था.
7. 1981 में मिस्र यानी Egypt के राष्ट्रपति अनवर सादात को सैन्य परेड के दौरान गोली मार दी गई थी ,,,इज़रायल के साथ शांति समझौता करने के कारण इस्लामी इंतहापसन्दों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी ।
8. 1991 राजीव गांधी की लिट्टे (LTTE) संगठन की महिला आत्मघाती हमले में हत्या हो गई थी . भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पर श्रीलंका के गृहयुद्ध में भारत के हस्तक्षेप का आरोप था .
9. 2007 में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को आतंकवादियों ने निशाना बनाया; वह कट्टरपंथ के खिलाफ थीं और मुल्क बद्री Deportation से लौटकर राजनीति में active हो रही थीं और उनकी मक़बूलियत बढ़ने लगी थी । एक सियासी रैली में बम धमाका किया गया और उनको गोली मारी गई
10. 2021 में हैती के राष्ट्रपति जोवेनेल मोइज़ की रैली में बम धमाका किया गया उसके बाद सशस्त्र लोगों के एक समूह ने घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी थी .
इन सभी हत्याओं के पीछे राजनीतिक विरोध , Leadr Of Opposition की सत्तापक्ष के नेताओं की जनविरोधी नीतियों और फैसलों से असहमति ,धार्मिक/साम्प्रदायिक या नस्ली तनाव , समाज में गहरे विभाजन , तख़्तापलट , क्रांति इत्यादि वुजुहात बताई जाती हैं ।
आतंकवाद और कट्टरपंथ , विचारधारा के नाम पर हिंसा , गुप्त एजेंसियों या बाहरी ताकतों का रोल भी अधिकतर राजनितिक हत्याओं का कारण बताया गया .
आज राहुल गाँधी और उनके साथी जिस बहादुरी , निष्पक्षता , देश प्रेम , लोकतंतंत्र , संविधान एकता अखंडता के लिए लड़ रहे हैं वो किसी क्रांति या आज़ादी की लड़ाई से कम नहीं है. 2047 तक हुकूमत में बने रहने का खुआब देखने वाली सरकार और अपनी घोषणाओं में 2047 तक की योजनाओं का ज़िक्र करने वाले नेताओं के लिए राहुल बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं .
राहुल गाँधी का यह संग्राम सत्तापक्ष की आँखों का काँटा बन गया है और राहुल को पसंद करने वालों की ख़ासी संख्या उन लोगों की भी है जो अंधभक्ति में विलीन थे.इस सबके बाद राहुल गाँधी की सिक्योरिटी की चिंता की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं ..
हालांकि उनके साथ किसी भी प्रकार का हादसा वर्तमान सर्कार के भविष्य के लिए बड़ा खतरा साबित होगा इसलिए सर्कार की भी कोशिश होगी कि राहुल गाँधी के साथ कोई अनहोनी या अशुभ घटना न हो …
मेरा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद शुक्रिया
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