बजट में MoMA की रक़म में कटौती पर निराशा

Date:

देश की 22 % अल्पसंख्यक का budget 0.0660% , 2022-23 में 5,020.50 करोड़ रुपये जो 2024-25 में घटाकर 3,183.24 कर दिया गया

नई दिल्ली// केंद्रीय बजट 2024-25 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (MoMA) के आवंटन बजट को घटाकर 3,183.24 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो कुल बजट का सिर्फ 0.0660% है. यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है, जहां 2021-22 में आवंटन 4,810.77 करोड़ रुपये, 2022-23 में 5,020.50 करोड़ रुपये और 2023-24 में 3,097.60 करोड़ रुपये था.

Minority Budget 2024-25

जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी स्टडीज़ एंड एडवोकेसी (आईपीएसए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. जावेद आलम ने बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय की रक़म में कटौती पर निराशा व्यक्त की. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बजट आवंटन राजनीतिक निर्णय है जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है .

डॉ. आलम ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के बजट में कटौती अल्पसंख्यकों के विकास के प्रति भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान लगाती है.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य के चुनावों में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आती है, तो भारी नीतिगत बदलाव हो सकते हैं, जिसमें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को भंग करना और फेलोशिप योजनाओं को वापस लेना शामिल है, जो मुस्लिम छात्रों के लिए भारी नुकसान का सबब होगा , जिससे देश में निरक्षरता बढ़ेगी .

उन्होंने कहा कि, ये कार्यक्रम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये अल्पसंख्यकों के बीच शिक्षा और कौशल विकास के लिए समर्थन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

बजट में रोज़गार से जुड़ी योजनाओं और कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ सहयोग जैसी आर्थिक पहल पर भी नज़र है. केंद्रीय बजट ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में मंत्रालय के प्रयासों के माध्यम से रोज़गार सृजन में तेजी लाने के लिए कॉर्पोरेट मामलों, श्रम और रोज़गार मंत्रालयों को 12,000 करोड़ रुपये आवंटित किए.

उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों पर बजट के प्रभाव को रेखांकित किया, जिसमें माता-पिता की आय सीमाओं और छात्रवृत्ति के लिए निश्चित कोटा जैसी समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है जिन्हें वर्षों से अपडेट नहीं किया गया है.

डॉ आलम ने अपने सम्बोधन में कहा ,अल्पसंख्यक हितधारकों से बजट की विसंगतियों (Anomalies) को दूर करने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण (practical considerations) अपनाने को कहा, जिसके अंतर्गत बातचीत में शामिल होना, जनता की राय को आकार देना और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए उचित विकास हासिल करने के लिए सरकार पर दबाव डालना शामिल है.

इस विषय पर बात करते हुए केंद्रीय बजट 2024-25 की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें बजटीय आवंटन के अंतर्निहित
(बुनियादी ) राजनीतिक विकल्पों पर ज़ोर दिया गया कि यह अल्पसंख्यकों को कैसे प्रभावित करता है.

डॉ. जावेद आलम ने कहा कि अगर इस बजट को प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए लाभकारी बनाना चाहते हैं तो इसके लिए हर संभव प्रयास जारी रखा जाना चाहिए.

याद रहे अल्पसंख्यक बजट में लगातार कमी की जा रही है जो वर्तमान सरकार की नियत को सवालों के घेरे में खड़ा करता है .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

शहीद नेता के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब,

शहीद नेता के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब, दुनिया में...

Martyr’s funeral reflects global awakening

Funeral of martyred leader draws overwhelming crowds, indicating awakening...

Faith, Prayer and Means: An Islamic Perspective on Balance

Faith in the existence and oneness of Allah does...

कॉक्रोच जनता पार्टी को मिला किसान मोर्चे का समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP)...