आज़ादी का अमृत महोत्सव और हर घर तिरंगा

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Ali Aadil khan
Editor desk

राष्ट्रीय ध्वज कोड मेँ अमेंडमेंटस करते हुए संविधान लागू होने के बाद चरखे की जगह अशोक चक्र लगाया गया था, इसके बाद कई और अमेंडमेंटस भी हुए।

पहले हर घर तिरंगा फेराने की क्रोनोलॉजी समझ लेते हैं फिर तिरंगे और RSS के इतिहास पर एक नज़र डालेंगे

दरअसल तिरंगा हमारी शान और गौरव का निशाँ है ,आपको पहले यह बता दें की हज के दौरान मक्काः शहर में किसी मुल्क का झंडा या नारा लगाना बड़ा जुर्म है लेकिन मक्काः मुकर्रमा के अंदर भारतीय तिरंगा झंडा लगी हज़ारों बसें मक्का शहर में सिर्फ़ हिन्दी मुसलमानों की वजह से घूम रही थीं .

दुनिया में इस्लाम का मरकज़ कहलाने वाले शहर मक्काः में हज के लिए हम गए हुए थे ,और जब हम काबे (बैतुल्लाह ) से अपनी रिहाइश गाह अज़ीज़िया की तरफ़ आने के लिए बस स्टैंड पहंचते तो हज़ारों बसों पर तिरंगा झंडा देखकर जो गर्व का एहसास होता था वो बयान से बाहर है . .

हिंदुस्तान का मुसलमान मक्काः में भी भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फेराता है जहाँ किसी भी देश का झंडा दिखाना , या लगाना वर्जित होता है .इस तरह तिरंगे की हैसीयत और सम्मान के बारे में हिंदुस्तानी मुस्लमान से बेहतर कोई भी मिसाल पेश नहीं कर सकता ।

हम आपको बता दें ,ग्रह मंत्रालय की देख रेख में एक वेबसाइट बनाई गयी है जिसका नाम रखा गया है “हर घर तिरंगा ” देश के 24 करोड़ घरों में तिरंगा फेराने का लक्ष्य भी रखा गया गया है , इतना ही नहीं बल्कि हर देश नागरिक को इस साइट पर login करके अपनी लोकेशन देने , pin to Flag करने और एक selfie घर पर तिरंगा फेराते ध्वज के साथ लेकर साइट पर अपलोड भी करने की अपील की गई है. अब जो लोग ऐसा करेंगे वो देशभक्त कहलाये जाएंगे , दूसरे लोग देश भक्त नहीं होंगे ?

हालांकि ऐसा करना या न करना शर्त के दायरे में नहीं है लेकिन बक़ौल दिल्ली के CM के , आजकी केंद्र में सत्ताधारी पार्टी अपने विरुद्ध किसी भी सियासी राय को देशद्रोही बताकर सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है जो ग़ैर संविधानिक है।

अब RSS विचार धारा वाली सत्ताधारी पार्टी तिरंगा पर सियासत कर रही है इसी तिरंगे के बारे मे उसका चरित्र क्या रहा है इसको समझना भी ज़रूरी है .

डॉ राकेश पाठक के अनुसार ,1946 में गुरुपर्व के अवसर पर RSS कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज की जगह भगवा फेराया गया था , 14 Aug 1947 में RSS के मुखपत्र के लेख में कहा गया गया था की तिरंगा अपशगुन है इसलिए इसको नहीं फेराया जाना चाहिए , यानी RSS ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज मानने से इंकार कर दिया था ।

डॉ राकेश पाठक यह भी बताते हैं की 1948 में जब गाँधी जी की हत्या हुई , तो RSS समर्थकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को भी पैरों से रौंदा था ।संघ का यह दोहरा चरित्र देश के लिए बहुत घातक है जिसपर देश की जनता को समय रहते सोचना चाहिए।

कर्नाटका सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता ईश्वरप्पा ने Feb २०२२ में कहा था की अब देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नहीं भगवा होगा । अब या तो ये मंत्री जी पार्टी के वफ़ादार नहीं हैं या देश के, अब वो तो क्या ही अपने घर पर तिरंगा फहराएंगे अगर ऐसा है तो उन जैसे सभी एक खास विचारधारा के लोगों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चलेगा? या सिर्फ़ गैर भाजपाई ही देश के बागी कहलाये जाएंगे।

हिन्दूवादी संगठन के संत और साम्प्रदायिक तथा विवादित बयानों के लिए प्रसिद्ध यतींनरसिंह नन्द ने जिस तरह तिरंगे का अपमान करते हुए टिप्पणी की है उसपर सीधे राष्ट्र द्रोह लगना चाहिए था। हिन्दू संतों के एक और बड़े संगठन द्वारा हिन्दू राष्ट्र के संविधान लिखे जाने की प्रक्रिया पर सरकार द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। जिसमें राजधानी दिल्ली की जगह वाराणसी तैय: की गयी है ।

RSS की तिरंगे के सम्बंध में 2 – 4 घटनायें आपके सामने रखी, जब कि ऐसी ही घटनाओं से इतिहास भरा पाड़ा है।

राष्ट्रीय पर्व हो , पक्षी हो या ध्वज इसका संबन्ध देशवासियों की आस्था से है न कि इसपर राजनीति की जाये। यह अत्यन्त दुख और विचारणीय बात है कि अब सरकारी योजनाओं को वोटों की तराजू में रखकर देखा जाता है जो राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रेम की आत्मा के एकदम विरुद्ध है।

देश के सभी राजनीतिक दलों ख़ास तौर से सत्ताधारी पार्टियों ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि, हर एक राष्ट्रीय पर्व को सभी नागरिक दिल की गहराईयों और देश देशप्रेम की भावना से मनाएं न कि किसी सियासी या साम्प्रदायिक भावना से।

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