आपको बतादें की 200 ईसा पूर्व 7 वंडर्स की उत्पत्ति हुई थी .आज इसके लिए विश्वस्तरीय विशेषज्ञों पैनल बनाया गया है .200 देशों के 100 मिलियन लोग वोट के माध्यम से इस साइट को चुनते हैं जो ७ वंडर्स में आती है .इसके लिए 2006 में 77 sites में से 21 sites को चुना गया था ,इस पैनल की अध्यक्षता Professor, Federico Mayor Zaragoza नेकी थी .और याद रहे इन 7 वंडर्स को उनके सांस्कृतिक , architectural और सौन्दरता के आधार पर चुना जाता है .
ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सूबे के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से ताजमहल का नाम निकालकर किन नियमों का पालन किया है वो ज़रा बताएं .यदि यह सिर्फ पूर्वाग्रह से प्रभावित होकर किया गया है तो यह राजधर्म के खिलाफ है , भगवाकरण करने की नीयत से किया है तो उचित नहीं है .अगर वास्तव में ताजमहल दुनिया के 7 अजूबों में रखने लाइक नहीं तो यह हमारी कमज़ोरी को दर्शाता है । देश की मुख्य धरोहरों में से एक ताजमहल को नजर अंदाज करना और पर्यटन स्थलों के बुकलेट से बाहर कर देना इंतहाई घटया और नीच सोच की तरफ इशारा है .जिस साइट को दुनिया के 100 मिलियन लोगों ने चुना हो क्या उसको रिजेक्ट करनेकी शक्ति राज्य सरकार या योगी को जनता देसकती है ?
प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटकों के लिए पर्यटन स्थलों की नई सूची जारी की है जिसमें ताजमहल को जगह नहीं दी गई है।इसकी जगह सूची में गोरखधाम मंदिर , देवी पटन शक्ति पीठ को शामिल किया गया है। इसके अलावा इस सूची अयोध्या को भी शामिल किया गया है साथ ही रामलीला के चित्रों को भी बुकलेट में छापा गया है। ईको टूरिज्म से लेकर मंदिर टूरिज्म तक को इस बुकलेट में जगह मिली है लेकिन ताजमहल को नहीं।
