मोदी जी अब मेरी सुनो , मैं जनता हूँ , किसी का दिल नहीं

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मोदी जी अब मेरी सुनो , मैं जनता हूँ , किसी का दिल नहीं

 

देश में जब सत्ता परिवर्तन हुआ और 4610दिन मुख्यमंत्री का अनुभव लेकर आप चौकीदार की  हैसियत से दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश की कुर्सी पर ब्राजमान हुए तो मुझे लगा था शायद भारत , रामराज की ओर बढ़ेगा यानी शान्ति की ओर बढ़ेगा जैसा किताबों में दर्शाया गया है ..भारत अपनी खोई पहचान को संवारेगा , ..शासन या सत्ता के लिए कोई नहीं सताया जाएगा , बल्कि अम्न और शान्ति के लिए सत्ता त्याग दी जायेगी . मगर सब कुछ उल्टा पुल्टा …. मैं खामोश रहा…अभी कुछ समय दिया जाए …जैसा की   आप भी कई अवसरों पर कहते रहे , 50 दिन दिए जाएँ ,, 100  दिन दिए जाए …इन दिनों की गिनती की लिस्ट लम्बी है छोड़ देते हैं श्रीमान प्रधान मंत्री जी …. आगे बढ़ते हैं 

जब आपकी विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू हुआ तो मुझे लगा आप भारत की सीमाओं के विस्तार में एक क़दम आगे बढे हैं जिसकी कमी महसूस की जारही थी ,हमारी विदेश नीति वास्तव मैं निष्क्रिय सी होगई थी , मगर आपके धुआंधार विदेशी दौरों से लगा कि आप मोदी जी , औरंगज़ेब के काल को दोहराएंगे जिसमें देश की सरहदों का विस्तार किया गया था , उस वक़्त भारत , आजका भारत नहीं था ये दुनिया के नक़्शे पे शेर की सी तस्वीर लिए  कंधार , समरक़ंद , बुखारा , सिंध ,म्यांमार , श्रीलंका , भूटान तक विशाल भुजाओं के साथ फैला हुआ था . उस दौर मैं अगर हिन्दुओं के मंदिरों के लिए जनेऊ और तेल बटता था तो मस्जिदों के इमामों को भी हदया दिया जाता था .

 

जब आप कह रहे थे की न खाऊंगा न खाने दूंगा, मैं प्रधान सेवक और चौकीदार बनकर जनता की सेवा करूँगा , तो यक़ीन माने मोदी Sir ..मैं आपके बारे में यह सोचता था आप तो वाक़ई वो बातें करते हैं जो औरंगज़ेब करते थे , उन्होंने कहा था की सरकारी खज़ाना बादशाह के ऐशों के लिए नहीं होता बल्कि अवाम की अमानत है इसलिए मैं तो टोपी बुनकर अपना गुज़ारा करलूँगा . मगर जनता को परेशां नहीं होने दूंगा . तो मुझे लगा आप शायद टोपी तो न बुन सकें मगर योग मैट बुनकर शायद अपना खर्चा चला लेंगे . बाबा को आपने उद्योगपति बनाया या नहीं , नीरव ,मेहुल , सुशील ,माल्या इत्यादि को किसने कहाँ भेजा इसका भी मैं कोई ज़िक्र नहीं करता …यह तो आपकी जनता आपसे पूछ लेगी …मगर मैं ज़रूर आपकी प्रशंसा में लोगों से दुश्मनी लेरहा था …ख़ैर भक्त हूँ इतना तो बनता है …

सच बताऊँ मोदी जी लोग आपके बारे में जो बोलें ..मगर मुझे आपसे पूरी हमदर्दी है , जब आप प्रधान मंत्री बनने के बाद माँ का आशीर्वाद लेने पहुंचे …और जब मैंने सुना की आप माँ के भक्त हैं तो यक़ीन माने पूरे विश्वास से मैंने कहा था आपको इस लोक में इज़्ज़त मिलने से कोई नहीं रोक सकता ,परलोक में तो आपको पता है जुमले नहीं चलते , हालाँकि आपकी पत्नी के संबंधों के विषय में मुझे पहले से जानकारी थी .मगर वो अलग मैटर है वो सियासत दानो के लिए छोड़ देता हूँ …

वैसे साहब आपके अंदर वो गुण हैं जो आम PM में नहीं होते , बस , यदि आपमें से हिटलरवादी ,निकल जाए और देश की जनता के साथ इन्साफ करना तथा सच बोलना आजाये तो आपका भक्त आपको यक़ीन दिलाता है आपको आपकी मौत तक PM पद से कोई नहीं हटा सकता .

प्रिय प्रधान मंत्री जी  , जब आप अज़ान की आवाज़ पर अपना भाषण रोकते हो न , तो आपको यक़ीन दिलाता हूँ मेरे दिल से आपके लिए एक दुआ निकलती है , “या रब तू मेरे प्यारे प्रधान मंत्री को दोनों लोकों की बादशाहत अता फ़रमाँ” क्योंकि यह अमल जम्हूरिया ए इस्लाम पकिस्तान का प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ भी नहीं करता जो आप करते हो , हालांकि उसको इसकी सजा मिली है , मैं दुआ करता हूँ की आपका और मेरा रब आपको ज़लील और रुस्वा होने से बचाले और अज़ान की हुरमत के बदले आपको वो मार्ग दिखा दे जिसपर चलकर आप दोनों जहां के बादशाह बनो … आमीन ..

मेरे प्यारे प्रधान मंत्री जी , आदरणीय तो सभी लिखते हैं , प्यारे चलेगा न ?
मैं पूरे विश्वास से यह बात कह सकता हूँ की जो दुआ मैं आपके लिए मांग रहा हूँ , आपके परम घनिष्ट भक्त इस दुआ का तसव्वुर (कल्पना) भी नहीं रखते होंगे ,और मैं आपको यह भी यक़ीन दिलाता हूँ जो आज आपके भक्त हैं वो आपके सत्ताहीन होने के बाद आपकी कुशलता तक नहीं पूछेंगे ..मिसाल हमारे देश के महामहिम पूर्व 
प्रधान मंत्री जी श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सामने है ….यदि अपने मुलाक़ात का सौभाग्य प्रदान किया तो सेवा मैं भी हाज़िर होकर आपके दर्शन करूँगा .

कौन होता है बुरे वक़्त की हालत का शरीक !

मरते दम आँखों को भी देखा है फिर जाती हैं !! 

 

दुओं का मोहताज

आपका शुभ चिंतक

भवदीय 

अली आदिल खान

 

 

 

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