कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के जी बालकृष्णन ने किया

लोकतंत्र और संविधान को समझाने का ये अनूठा अंदाज खूब भाया दर्शकोंं को,श्याम प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय की सराहनीय पेशकश

26 फ़रवरी 2019, दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की छात्राओं ने भारतीय संसद के प्रतिरूप का आयोजन कर संसद के अधिवेशन की याद को ताजा कर दिया!
तीन तलाक जैसे गंभीर विषय पर छात्राऔं ने सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के नेताओं की भूमिका में बहुत ही सधे तर्क प्रस्तुत किये। चर्चा के बीच दोनों पक्षों के नोक-झोक देखने लायक थी। बीच -बीच में सदन की अध्यक्षा की भूमिका में छात्रा को सदस्यों को सदन की गरिमा बनाये रखने की अपील करती देखी गयीं।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश व मुख्य अतिथि जस्टिस के जी बालकृष्णन ने किया । उन्होनें छात्राओं के प्रयास को सराहा, और कहा कि लोकतंत्र को समझने के लिए संसद की प्रक्रिया को समझना अत्यंत आवशक है।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वकील विनोद दिवाकर का सम्मान किया गया! इस प्रभावशाली कार्यक्रम की रूपरेखा तथा तैयारी की सूत्रधार थीं राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डा० चन्द्रकान्ता के माथुर और उनका साथ दिया इसी विभाग की शिक्षिका डा० अन्जू झांब ने।
डॉ चन्द्रकांता निरन्तर छात्राओं को विभिन्न क्रियाकलापो माध्यम से राजनीति को समझाने व छात्राओं की भागीदारी को सुनिश्चत करने का प्रयास करती रही है। डॉ चन्द्रकांता ने कहा कि लोकतन्त्र में राजनीतिक सहभागिता का होना अत्यंत आवशक है।

विभाग की 35 छात्राओं ने कई दिनों तक कठोर अभ्यास के बाद ‘पोलिटिया’की ओर से इस बेहतरीन कार्यक्रम को प्रस्तुत किया। महाविद्यालय की कार्यकारी प्राचार्या डा० साधना शर्मा ने छात्राओं के प्रदर्शन की सराहना की और विभाग को ऐसी सुन्दर प्रस्तुति के लिए मुबारकबाद दीं।