भारत माता की जय बोलूं ? या नारा लगाऊं आज़ादी?

Date:

झूट कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है-सच बोलूं तो लोग ख़फ़ा होजाते हैं

 

 

माना के अभी तेरे मेरे इन अरमानों की, कीमत कुछ नहीं

मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर,

इनसानों की कीमत कुछ भी नहीं

इनसानों की इज़्ज़त जब झूठे सिक्कों में ना तोली जायेगी

वो सुबह कभी तो आयेगी …

 

अजीब सी लगती हैं ये कवितायेँ ववितायें कुछ लोगों को ,….जब सत्ता और नफरत का भूत सर चढ़ चूका हो …रामजस कॉलेज हो या JNU ,हैदराबाद और कर्नाटक यूनिवर्सिटियों में भी जिस तरह students में नफरत और खौफ का माहौल पैदा किया जारहा है वो देश की नौजवान पीढ़ी को भटकाने और भ्रमित करने के लिए काफी है । जिस  नौजवान पर घमंड किया जाता है सिर्फ वोट हासिल करने के लिए ,कल जब यही नौजवान बेरोज़गार रहकर नफरत की सियासी भट्टी से निकलकर बाहर आएगा तो देश पछतायेगा और चीखेगा काश ये नौजवान ही न हुआ होता और वो पछतावा आजकी नफरत भरी सियासत का फल होगा ।हम आशावादी हैं ,निराशावादी नहीं मगर जब ज़मीन मे बबूल का बीज बोओगे कैसे मीठे फल की आशा करसकते हो ? बल्कि झूटी तसल्ली देना देश के साथ दग़ा है।

रोहित वेमुला और नजीब जैसे दर्जनों विद्यार्थियों के साथ अन्याय के वाक़्यात  ही देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रहे हैं ।जिसके लिए देश की सियासी पार्टियां ज़िम्मेदार हैं , छोटे से बड़े सभी चुनावों के दौरान साल के 12 महीनों में नफरत और सिर्फ नफरत का ही पाठ तो पढ़ाया जाता है नई नस्ल को ।एक पार्टी या नेता बता दें जो मोहब्बत और प्यार की बोली बोलता हो?….दो चार को छोड़कर ,..

ऐसे में जब कुछ समाज सेवी संस्थाएं , जमातें या कलाकार नई नस्ल में ART , कविता ,संगीत,धर्म  और THEATURE  के माध्यम से “असहमति की संस्कृति” के खिलाफ  असहमति के प्रतिनिधित्व की तलाश में निकलकर समानता सामंजस के लिए रामजस कॉलेज नार्थ कैंपस DU आना चाहते थे तो नफरत के सौदागरों को ये बात हरगिज़ नहीं  भाई और हंगामा शुरू …..आखिर जिन लोगों को वहां बुलाया गया था वो कौन थे ? क्या वो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा थे क्या वो देश द्रोह थे जिनपर ABVP की ओर से हमला हुआ ,…नहीं हरगिज़ नहीं बल्कि वो सभी वक्ता और आर्टिस्ट देश में बढ़ती intolerence और सांस्कृतिक असहमति के खिलाफ प्रतिनधित्व करने आरहे थे ….

आप ही बताएं यदि  किसी शहर में प्रदूषण पैदा करने वाली फैक्टरियां लगी हो और वहां एक मण्डली प्रदूषण हटाओ और हरयाली लाओ की  सभा आयोजित करने लगे तो वहां उनका स्वागत होगा या जूते डंडे पड़ेंगे ?जूते डंडे ही उनको इस आयोजन से रोक सकते हैं ….ऐसा ही होता है देश और दुनिया तथा संस्थानों में भी।और यही रामजस कॉलेज नार्थ कैंपस में भी हुआ ,,…वहां बहुत कुछ बुरा होने के बाद एक अच्छा यह हुआ की पुलिस ने अपनी ग़लती क़ुबूल की …..मगर क्या पुलिस का ग़लती क़ुबूल करना काफी है या फिर कुछ पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों की मानसिकता को भी बदलने की ज़रुरत है …जो प्रदूषित है ….मगर बदलेगा कौन …शायद इंतज़ार है किसी 12 हाथ 10 मुंह की शक्ति का ..?…………..

नहीं जनता को अब कुछ फैसले निडरता और एकजुटता से लेने होंगे वर्ण इस नफरत का एक बाद दूसरा शिकार बनेगा और फिर बनेगा ……

साहिर लुधयानवी की ये नज़्म पड़ने आरही थी सुमंगला जी रामजस कॉलेज के उस सेमीनार में जहाँ ताबड़ तोड़ हमला हुआ आयोजकों और आम विद्यार्थियों पर ……

“बीतेंगे कभी तो दिन आखिर,  ये भूख और बेकारी के

टूटेंगे कभी तो बुत आखिर,  दौलत की इजारेदारी की

अब एक अनोखी दुनिया की, बुनियाद उठाई जायेगी

वो सुबह कभी तो आयेगी …

 

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी,  राहों में धूल न फेंकेगा

मासूम लड़कपन जब गंदी,  गलियों में भीख ना माँगेगा

हक माँगने वालों को,  जिस दिन सूली न दिखाई जायेगी

वो सुबह कभी तो आयेगी …”

 

क्या बुराई है इस कविता में ,कोनसा देश द्रोह है इस नज़्म में, हाँ फ़र्ज़ी देश भक्तों के लिए ज़रूर तकलीफदेह होसकती है यह नज़्म ,बल्कि सांप लोट रहा था अम्न ओ प्यार के उन सौदागरों के सीनों पर जिनको शांति के वातावरण को प्रदूषित करने की पगार मिलती है ,और देश में नफरत फेलाना उनका उद्देश्ये है ,…. लानत है देश के उन दुश्मनो पर जो कारगिल युद्ध के शहीद की बेटी गुरमेहर को दुष्कर्म और क़त्ल की धमकियाँ तक दे रहे हैं ,इससे बढ़कर कायरता और देशद्रोह कुछ हो नहीं सकता ,अगर यही देश भक्ति है तो जनता घिरना करेगी देशभक्ति से और जुड़ जायेगी आज़ादी का नारा लगाने वालों की  मण्डली मे ,खुदा  के लिए देश प्रेम को बदनाम न करो ।हमको लगता है देश गुलमेहर के साथ है मगर टूटी  माला के उस मोती की तरह है देश की जनता जिसकी कोई हैसियत नहीं ,कोई इस  माला को जोड़ दे तो धराशाही हो जाएँ सभी नफरतों के अड्डे और फ़र्ज़ी देशभक्त ,”मगर कोई नहीं मिला माली इस वीरान चमन को अभी तक  ” …Editor’s desk

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

संभल की मस्जिद में नमाजियों की संख्या पर नहीं लगेगी पाबंदी

नमाज़ में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं...

Sri Lanka makes Wednesdays off to conserve fuel amid shortages.

Sri Lanka has declared every Wednesday a public holiday...

Afghanistan says 400 killed in Pakistan strike on Kabul hospital

EDITED: ALI AADIL KHAN Kabul : Afghanistan has accused Pakistan...

Donald Trump slams allies for rejecting Hormuz security appeal

Meanwhile, Iranian officials have contacted the president’s Middle East...