लोकतंत्र पर चोट: उदित राज ने उठाई आवाज, रामलीला मैदान में बड़ी रैली की घोषणा”
संविधान और वोट बचाने के लिए हर वर्ग को बाहर आना ही पड़ेगा: डॉ उदितराज
नई दिल्ली। TOP Bureau //दलित,ओबीसी, माइनॉरटीज एवं आदिवासी संगठनों का परिसंघ (DOMA Parisangh) के चेयरमैन एवं पूर्व सांसद डॉक्टर उदित राज ने अपने सरकारी आवास पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि देश इस वक्त बड़े संकट से गुज़र रहा है.वोट पर चोट बर्दाश्त नहीं, हर वर्ग और समुदाय को मैदान में आना होगा.
संविधान और आम आदमी के वोट का अधिकार कमजोर हुआ है, खासकर दलित, मुस्लिम, पिछड़े व आदिवासी समुदायों का आज वोट पहले जैसा ताकतवर नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जातिगत और सामाजिक भेदभाव अभी भी जारी है.
डॉ उदितराज ने मुस्लिम शासकों के बारे में कहा, भारत में भरम फैलाया गया की दलित आदिवासियों को तलवार की नोक पर मुस्लमान बनाया गया और उन पर ज़ुल्म किये गए. जबकि हकीकत यह है मनुवादी व्यवस्था भारत में दलितों के conversion का बड़ा कारण बनी. उन्होंने कहा समाज के पिछड़ेपन व धार्मिक असमानता के लिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना चाहिए।

उदितराज ने कहा मंडल कमीशन, आरक्षण, अस्पृश्यता जैसी समस्याओं के लिए मौजूदा सामाजिक सोच और वर्ण वेवस्था ज़िम्मेदार है। स्वतंत्र सरकारी संस्थाओं, संसाधनों पर आज सत्ता का कब्जा है, जिससे आर्थिक असमानता और गहराती जा रही है।
30 नवम्बर को रामलीला मैदान में “वोट व संविधान बचाओ रैली” गैर-राजनीतिक है. इसमें सभी वंचित वर्गों दलित, मुस्लिम, ओबीसी, आदिवासी, ईसाई, व् दीगर अल्पसंख्यक समुदायों से इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है।
उदितराज ने मुस्लिम समाज व उसके नेतृत्व से जिम्मेदारी निभाने, संगठित होकर बहुजन आंदोलन का हिस्सा बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती, लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए सभी को एक होना होगा।
डॉ. उदित राज जी ने न्यायपालिका, कानून, रोज़गार, महंगाई, और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है, वे अक्सर हाशिए के वर्गों से आते हैं जबकि सत्तापक्ष के समर्थकों को पूरी छूट दी गई है।
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला, और बहुजन समाज के सामाजिक संगठनों को अधिक सक्रिय बनने और लड़ाई को राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर एक साथ लड़ने को कहा।
उदित राज ने मीडिया को बताया वर्तमान में देश के संविधान और आम नागरिकों के वोट की ताकत को कमजोर किया जा रहा है। दलित, पिछड़े, मुस्लिम, आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर लगातार हाशिये पर धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र, समान अधिकार एवं सामाजिक न्याय के लिए सभी वंचित, शोषित और अल्पसंख्यक समुदायों को एक मंच पर आना होगा तथा मिलकर आवाज़ उठानी होगी।
30 नवम्बर को रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली में भागीदारी के लिए विशेष रूप से मुस्लिम, दलित, ओबीसी, ईसाई और आदिवासी समाज के लोगों एवं उनके नेतृत्व से अपील की है कि अपने संवैधानिक अधिकार और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक रैली में ज़्यादा से ज़्यादा भाग लें।
संघर्ष को केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी जारी रखने की आवश्यकता है। रैली पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य वोट तथा संविधान की रक्षा हेतु जनजागरूकता फैलाना व समानता, सामाजिक न्याय तथा लोकतंत्र की मजबूती के लिए इसको देशव्यापी आंदोलन बनाएं भी है।