तालिबान का ख़ुफ़िया प्लान? दुनिया हैरान !

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Ali Aadil Khan Editor’s Desk

अब दुनिया पर तालिबान का होगा क़ब्ज़ा ? पडोसी देशों में ख़ौफ़ का माहौल

तालिबान के इस प्रोजेक्ट के मन्ज़रे आम पर आने के बाद दुनिया के Developed Nations कि नींद क्यों हुई हराम ? जानेंगे आजकी वीडियो में

आज तक आपने कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स देखे होंगे।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा देश जो हमेशा संघर्ष और instability के लिए जाना जाता है, वह कुछ ऐसा ख़ुफ़िया प्लान बना रहा है जो पूरे एशिया को हिला देगा?

तालीबान। हां, वही तालिबान जो दुनिया की आंखों में चुभते हैं। अब कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जो तरक़्क़ीपसंद दुनिया को हैरान कर देगा । यह सिर्फ कंस्ट्रक्शन नहीं है बल्कि यह पानी , एनर्जी और लाखों अरब डॉलर्स के छुपे हुए मिनरल्स पर कंट्रोल की शुरुआत है ।

वही मिनरल्स जिन पर चाइना की नजर है। यह प्रोजेक्ट इतना बड़ा है कि पूरे एशिया में इसका कोई मुकाबला नहीं। दोस्तों आपको लगता होगा कि यह सबसे बड़ी बात है तो रुकिए सुनिए कैसे चाइना चुपके से 60 बिलियन डॉलर के मेगा कॉरिडोर को अफगानिस्तान में बढ़ा रहा है। पूरी सच्चाई जानने के लिए बने रहिए।

शुरू करते हैं Cosh Tepa Canal से

पहले 400 कि.मी. उत्तर में क्या हो रहा है, उसके बारे में जानते हैं। जहां चल रहा है एशिया का सबसे बड़ा मैनमेड कैनाल, Cosh Tepa कैनाल प्रोजेक्ट ,,,,,,। यह कोई मामूली कंस्ट्रक्शन नहीं है।

कोश टेपा नहर की लंबाई 285 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर से 150 मीटर तक बताई गई है। जो कैलिफोर्निया की मशहूर एक्वाडक्ट से भी ज्यादा चौड़ी है। यह कैनाल अमूडारिया रिवर के 20% पानी को नॉर्दन अफगानिस्तान के डेजर्ट प्लेेंस में डायवर्ट करेगी। इस नहर से 5 लाख 50 हज़ार हेक्टेयर्स कृषि ज़मीन को सिंचाई की जा सकेगी जो यूनाइटेड स्टेट के डेलवेयर स्टेट से भी बड़ा है।

इससे अफगानिस्तान की कृषि योग्य भूमि में 1/३ की वृद्धि होगी। अभी फिलहाल 6000 से भी ज्यादा मजदूर दिन रात यहां हैवी मशीनरी चला रहे हैं। डिगिंग, ब्रिज कंस्ट्रक्शन, डैम बिल्डिंग ये सबबबब एक साथ हो रहा है।

हाई स्पीड लैंड एक्विजिशन, क्रॉस कंट्री इंजीनियरिंग और तालिबान की तगड़ी निगरानी की वजह से प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है और लगभग 684 मिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट हो चुका है और एक्स्ट्रा १०० मिलियन डॉलर की फंडिंग से अफगान गवर्नमेंट ने प्रूफ कर दिया है कि वह इस बार अफगानिस्तान की इकोनमी को बदलने के लिए कितने सीरियस हैं।

लेकिन यहां आता है कंट्रोवर्शियल पार्ट

यह प्रोजेक्ट जितना अफगानिस्तान के लिए फायदामंद है , उतना ही नेबरिंग कंट्रीज जैसे उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लिए चिंता का कारण भी है। वे अपनी कपास की फसलों के लिए इसी नदी के पानी पर निर्भर रहते हैं। पानी कम हो जाने की वजह से रीजनल डिस्प्यूट्स हो सकते हैं। तालिबान खुले बोल रहा है। पानी हमारा है। हम लेंगे। चाहे आपको पसंद हो या ना हो। यह वाटर पॉलिटिक्स एशिया की पीस और शान्ति को खतरा भी हो सकती है।

काबुल न्यू सिटी प्लान

अपने देश और जनता की सुविधाएँ हर तरह से बेहतर बनाने के लिए तालिबान सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी, कैनाल्स, डैम्स, नेचुरल गैस और वाटर वेज पर फोकस नहीं कर रहे हैं बल्कि वह अपनी पुरानी राजधानी को भी रिकंस्ट्रक्ट कर रहे हैं जिससे उनकी लाइफस्टाइल इंप्रूव हो।

काबुल न्यू सिटी प्लान एक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट नहीं है, यह नए तालिबान की अफगानिस्तान के फ्यूचर को संवारने की पूरी तरह से एक नई सोच है। एक मैसिव अर्बन डेवलपमेंट जो 722 वर्ग किलोमीटर में फैला है जो अभी के काबुल से लगभग 1.5 गुना बड़ा है। तालीबान का प्लान है ढाई लाख रेजिडेंशियल यूनिट्स बनाने का जो काबुल में 3 मिलियन लोगों को रहने की जगह दे सकते हैं।

लेकिन यह सिर्फ हाउसिंग नहीं है। New तालिबान …..यूनिवर्सिटीज, हॉस्पिटल्स ,शॉपिंग सेंटर्स और ग्रीन लैंड की Planning कर रहे हैं और इन सब बिल्डिंग्स में यूटिलिटीज और पार्कक्स भी maintain किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट 30 साल में दो मेन Phases में पूरा किया जाएगा ।

जिसमें कमर्शियल,एग्रीकल्चरल और रिकक्रिएशनल Areas होंगे।बताया जाता है कि काबुल न्यू सिटी एशिया के सबसे बड़े Planned सिटीज में से एक होगा जो अफगानिस्तान के अर्बन लैंडस्केप को हमेशा के लिए बदल देगा। तालिबान ट्रेड रूट्स ज्योग्राफी को जितना समझते हैं उतना लोग रियलाइज नहीं करते।

अफगानिस्तान दुनिया के सबसे इंपॉर्टेंट ट्रेड रूट्स के ठीक बीच में बैठा है और तालिबान इस पोजीशन का फायदा उठाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं। सबसे इंपॉर्टेंट ट्रेड पहले चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी (CPEC) एक्सटेंशन है।

मई 2025 में चाइना पाकिस्तान और तालिबान ने एक Trileteral एग्रीमेंट साइन किया है । 60 बिलियन डॉलर की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर,,, चाइना के शिनजंग प्रोविंस से पाकिस्तान होते हुए अफगानिस्तान तक डायरेक्ट लिंक बनाता है।

जिससे चाइना को सेंट्रल एशियन मार्केट्स और अफगानिस्तान के मिनरल वेल्थ तक एक्सेस मिलेगा। लेकिन यहां आता है सबसे इंटरेस्टिंग पार्ट ट्रांस अफगान रेलवे प्रोजेक्ट। यह प्रोजेक्ट 4.8 बिलियन $ की लागत से 573 कि.मी. लंबी रेलवे लाइन के ज़रिये उज़्बेकिस्तान को पाकिस्तान से अफगानिस्तान के थ्रू कनेक्ट करेगा।

ट्रांजिट टाइम को 35 दिन से सिर्फ 4 दिन तक कर देगा। 2025 के आखिर में इसपर काम शुरू होगा और यह दुनिया के सबसे चैलेंजिंग टेरेन से गुजरेगा। जिसमें 300 से ज्यादा ब्रिजेस और पांच बड़े टनल बनाने पड़ेंगे.

और पहले से ही ईरान को अफगानिस्तान से जोड़ने वाला ख़ाफ़ हिरात रेलवे 2023 में ऑपरेशनल हो गया है। जिसमें 655 टन्स रेलवे इक्विपमेंट का पहला कार्गो शिपमेंट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह अफगानिस्तान को ईरानियन पोर्ट्स और ग्लोबल शिपिंग नेटवर्क्स तक एक्सेस देता है।

तालिबान का कहना है दुनिया शायद हमारी गवर्नमेंट को Recognize ना करें लेकिन इलाक़े के ऐतबार से हमारी ज्योग्राफी को इग्नोर नहीं कर सकते।यह सही है तापी पाइपलाइन और कासा प्रोजेक्ट को ज्योग्राफिकली बीट नहीं किया जा सकता और शायद यही वजह है कि उन्होंने लगभग 20 साल पहले तापी पाइपलाइन प्रोजेक्ट शुरू किया था। हालांकि वह प्लानिंग फेज में ही अटक गया।

तापी यानी टर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इंडिया जैसे दशों का समूह . तापी के ज़रिये इन चार देशों में सालाना ३३ बिलियन क्यूबिक मीटर्स नेचुरल गैस ट्रांसपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

लेकिन सितेंंबर 2024 में तालिबान ने कुछ ऐसा किया जो दुनिया कि सोच से परे है । उन्होंने इस 10 बिलियन डॉलर पाइपलाइन प्रोजेक्ट के अफगानिस्तान वाले हिस्से पर कंस्ट्रक्शन दोबारा शुरू कर दी। यह पाइपलाइन 1,821 कि.मी. तक चलेगा जो अफगानिस्तान के कुछ सबसे वोलेटाइल रीजंस से गुजरेगा।

अगर यह पूरा हो गया तो अफगानिस्तान को सालाना लगभग 1 बिलियन डॉलर रेवेन्यू मिल सकता है और हजारों जॉब्स क्रिएट होंगे। तालिबान इसे एनर्जी इंडिपेंडेंस और रीजनल इन्फ्लुएंस के लिए अपनी कामयाबी मानता है ।

लेकिन इससे और भी इंटरेस्टिंग है कासा प्रोजेक्ट। यह सिर्फ एक क्रॉस बॉर्डर प्रोजेक्ट नहीं है जिसमें वह तालिबान शामिल है । यह प्रोजेक्ट जिसे कासा 1000 के नाम से जाना जाता है जो बॉर्डर्स के पार इलेक्ट्रिसिटी भेजने और लाखों घरों को रोशन करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह 1.2 बिलियन डॉलर का इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट,,, किरगिस्तान और तजीकिस्तान से क्लीन हाइड्रोलीक पावर को अफगानिस्तान के थ्रू पाकिस्तान तक लाने के लिए डिजाइन किया गया है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान को अपनी बढ़ती हुई सिटीज और इंडस्ट्रीज के लिए और ज्यादा पावर की सख्त जरूरत है। कासा 1000 प्रोजेक्ट 1,300 मेगावाट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिट करेगा जो लगभग 1 मिलियन घरों को बिजली देगा। अफगानिस्तान को अपने यूज़ के लिए 300 मेगावाट मिलेंगे।

जबकि 1000 मेगावाट साउथ पाकिस्तान तक जाएंगे। लेकिन यहां एक और इंटरेस्टिंग बात है। वर्ल्ड बैंक ने 2024 में इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी है । जबकि वह ऑफिशियली तालीबान गवर्नमेंट को रिकॉग्नाइज नहीं करते।

उन्होंने एक स्पेशल अरेंजमेंट किया है जहां सारे पेमेंट्स तालिबान के कंट्रोल से बाहर रहेंगे लेकिन कंस्ट्रक्शन जारी रहेगी। इसका मतलब है कि तालिबान को इस मैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को होस्ट करने के इकोनॉमिक बेनिफिट्स मिलते रहेंगे बिना मनी फ्लो को कंट्रोल किए।

इसके बाद आता है “रेयर अर्थ मिनरल्स

अफगानिस्तान की लोकेशन हमेशा से उसका सबसे बड़ा फायदा रहा है। लेकिन अब चीजें एक नया मोड़ ले चुकी हैं। तालिबान के वापस पावर में आने के साथ वह सिर्फ मैप पर अपनी पोजीशन का यूज़ नहीं कर रहे हैं।

वह एक छुपे हुए खजाने पर भी बैठे हैं। उनके कदमों के नीचे अरबों डॉलर्स के मिनरल्स हैं। और पहली बार वे क़ुदरत के दफन किए हुए खजाने को असली पावर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

हम लिथियम की बात कर रहे हैं जो इलेक्ट्रिक कार बैटरी के लिए, कॉपर इलेक्ट्रॉनिक्स , रेयर अर्थ एलिमेंट्स, स्मार्टफोनस के लिए बेसिक एलिमेंट है। और अब फ्यूचर लिथियम का ही है जो अफ़ग़ानिस्तान के पास है और यह दुनिया जानती है और तालिबान भी .

अब इस project पर भी तालिबान ने काम स्टार्ट कर दिया है। उसका सबसे मशहूर एग्जांपल है आईनाक कॉपर माइन। चाइना के पास यहां 15 साल से माइनिंग राइट्स हैं मगर वो कामयाब न हो सके थे .

अब जुलाई 2024 में उन्होंने लगभग 10वीं बार ऑपरेशंस शुरू करने के लिए रिबन काटा जिससे चीन को सफलता की उम्मीद है क्योंकि नई तालीबान सरकार 4 वर्षों में सिक्योरिटी और Stability देने में कामयाब रहे हैं जो पिछली सरकारें नहीं कर पाई थी।

इसी बीच आमिर खान मुत्तक़ी की भारत विजिट के बाद इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि हमको भी कई बड़े Projects में stakeholder बन सकते हैं . जिसके लिए FICCI में मीटिंग के दौरान खुद आमिर खान मुत्तक़ी ने भारतीय कारोबारियों को निमंत्रण भी दिया है .

तालिबान पूरे देश में माइनिंग ऑपरेशंस पर अच्छा ख़ासा टैक्स लगा रहे हैं। वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 2022 में 1.54 बिलियन डॉलर रेवेन्यू कलेक्ट किया जिसका बड़ा हिस्सा माइनिंग और रिकंस्ट्रक्शन इंडस्ट्रीज पर टैक्सेस से आया है।

यहां सबसे इंटरेस्टिंग यह बात है तालिबान माइनिंग रेवेन्यूस का यूज दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिए कर रहे हैं। तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में आमदनी और खर्च कि एक साइकिल बनाते हुए मिनरल वेल्थ, रोड्स और टनल के लिए अफ़ग़ानिस्तान का Budget Mantain कर रहे हैं।

जिससे और मिनरल्स निकालना भी आसान हो जाता है साथ ही दुसरे प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा रेवेन्यू जनरेट होता है।कहा जा सख्त अहइ कि Minings अफगानिस्तान के लिए एक लाइफ लाइन है।

अब बात सालंग टनल Project की

सालंग टनल जो पहाड़ों में 11,000 फीट समुद्र तल से ऊंचाई पर है और यह अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर और दक्षिण सिरों को जोड़ता है। सोवियट्स यूनियन ने सालंग टनल 1964 में बनाया था यह 2.7 कि.मी. लंबा और इसको दुनिया की सबसे खतरनाक टनल में से जाना जाता है।

धूल और धुएं से भरी टनल में टूटे हुए वेंटिलेशन सिस्टम से पोइजनस कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जमा हो जाती है। यह गैस बिना किसी गंध या रंग के होती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।

टनल को रोज़ाना 2000 व्हीकल्स के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन अब यह पीक टाइम्स में 9000 वेहिकल्स तक हैंडल करता है। 1982 में इतिहास का सबसे डेडली रोड एक्सीडेंट भी यहीं हुआ था ।

जब कोलीजन के कारण आग और एक्सप्लोजंस हुए जिसमें 2700 लोग मारे गए थे। लेकिन यहां दुनिया को हैरानी उस वक़्त हुई जब दिसंबर 2023 में तालिबान ने ऑफिशियली अनाउंस किया कि उन्होंने टनल को पूरी तरह से रिकंस्ट्रक्ट कर दिया है और इसपर 100 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं जो अफगानिस्तान के सालाना टैक्स रेवेन्यू का लगभग एक चौथाई है।

अफ़ग़ान तालिबान सर्कार के ऐसे मूव्स और कारनामे बताते हैं कि तालिबान मेगा प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए कितने सीरियस और सक्षम हैं और अगर यह डेवलपमेंट्स सफल होते हैं तो यह अफगानिस्तान की इकोनमी और इमेज को दुनिया के सामने बदल कर रख देंगे ।

और यह Projects सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि पूरे इलाक़े को रोशन मुस्तक़बिल दे सकते हैं। क्या तालिबान जिसे दुनिया ने हमेशा एक अलग रूप में देखा है, अब एक नए अफगानिस्तान का निर्माण कर रहे हैं? इसके नतीजे देखने के लिए थोड़ा वक्त और इंतज़ार करना होगा ।

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