शायद इंतज़ार है नेता को फिर किसी हादसे का .

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खामोश अपने कमरे में सत्ता के लालच की लम्बी लकीर खींच रहे नेता जी , फिर किसी हादसे का इंतज़ार कर रहे थे!अचानक फ़ोन की घंटी बजी ,नेता जी एक और  बस्ती में बुलडोज़र चल रहा है , अरे वाह, और क्या क्या हो रहा है, अजी अभी तो चारों ओर चीखो पुकार की आवाज़ें आरही हैं ,नेता जी बोले होने दो ,जब सब शांत होजाये तो दुबारा फ़ोन करो !तब तक में तैयारी कर   लेता हूँ!टेबल कॉल बेल बजाई,फ़ौरन नेता जी के कमरे में चपरासी घुसा , जी सर –PA को बुलाओ ,जी सर ….फ़ौरन PA भी हाज़िर, बैठो यह बताओ की जिस बस्ती पर बुलडोज़र चल रहा है उस  बस्ती में कितने हिन्दू और कितने मुसलमान रहते हैं , जी सर –और ज़रा पता करो की कौन कौन नेता वहां पहुँच चुके हैं और उनके क्या क्या ब्यान आये !नेता जी ने मिस्मार होचुकी झुग्गिओं और झुलसे इंसानो के चेहरे पे सियासत का ठप्पा लगाने के लिए मोहर बनाने का मज़्मून तैयार किया ,जिसकी पहली लाइन थी–१-यह पार्टी जनता और ग़रीबों की दुश्मन है २-हमारी पार्टी इनको सबक सिखाएगी ३-जबतक ग़रीबों को उनका हक़ नहीं दिला देते तब तक चैन की नींद न सोयेंगे और न सोने देंगे !

इसके बाद घर आते ही नेता जी अपने कमरे में HEAVY DINNER करके और थोड़ी सी पीकर  तानकर जो सोये तो पड़ोस की पीड़ित महिला पर टूट रहे ज़ुल्म के पहाड़ की आवाज़ तक नेता जी को सुनाई नहीं दे रही चैन से सोने और न सोने देने का दावा करने वाले नेता जी के खर्राटों के शोर से तो उनकी बीवी ही आधी रात उठकर दुसरे कमरे में जा सोती हैं!

सुबह 8 बजे नेता जी को झुग्गिओं से  उनके किसी गुर्गे का फ़ोन आता है,जवाब प्लीज डायल आफ्टर SOMETIME नेताजी का दोपहर बारह बजे तक फ़ोन BUSY का मैसेज मिलता रहा .!बारह बजे के बाद जैसे ही सुबह हुयी नेताजी ने रिमोट उठाकर टीवी ओन किया, तो टीवी पर नेताओ की गरमा गरम बहस चल रही थी , इसी बीच नेताजी ने   चपरासी को बुलाकर अपना बंद फ़ोन चार्जिंग पर लगवाया,तब तक BED TEA भी नेता जी के कमरे में आचुकी थी ,साथ ही  पार्टी के कुछ क़रीबी नेता भी जो बहार देर  से इंतज़ार कर रहे थे,अंदर आगये ,इसी बीच चाय की चुस्कीओं में मोहर भी तैयार करली गयी थी  , जिसका ठप्पा सैकड़ों ग़रीब इंसानों की मिस्मार होचुकी झुग्गिओं के ढेर पर लगाना था !नेता जी को मुर्दा होने से पहले इस मुद्दे को कैश भी करना था ,और इंतज़ार था किसी अगले हादसे का…..जिसपर सियासत की वो ………..भी सेंकी जा सके …जो आप भी जानते हैं! भला क्या है वो ,, हाँ रोटी …

ऐ खुद ग़रज़ नेताओ कब तक करोगे इन हादसों का इंतज़ार ?और कब तक देश की ग़रीब जनता के मसलों से करोगे खिलवाड़,और कितनी भरोगे इन इन पूंजीवादियों की तिजोरीयों को ,क्या  होता रहेगा इस ग़रीब जनता का यूँही शोषण ?नेता जी जागो ग़फ़लत की इस गहरी नींद से और बंद करो यह पाखंडीपन और न खेलो मासूम जनता के खून की होली,न करो ग़रीब जनता और किसान की रोटी का सौदा,न बेचो और बेचने दो बीमारों की दवा और मुर्दा का कफ़न,तोड़ो  स्वार्थ,अहंकार,मोह,माया के सपने को !  अभी अवाम के सामने हैं ग़रीबी,बेरोज़गारी,अन्याय ,सांप्रदायिक दंगों में बर्बाद होचुके अवाम के घर और दुकान ,असहिष्णुता की खूनी जोंक ,बिजली की आपूर्ति, पीने के पानी का अभाव ,स्वास्थ , शिक्षा संस्थानों की कमी और गुणवत्ता का मसला ,किसानो को दी जाने वाली सुविधाओं का अभाव , रोशन किसानों की आत्म हत्याओं के झूलते फंदे ,जैसी सैकड़ों समस्याएं !क्या ऐसे में भी है किसी हादसे का इंतज़ार जिसपर करसको तुम सियासत ,,,नेता जी कहीं ऐसा न हो तुम खुद ही होजाओ किसी हादसे का शिकार,और फिर मौत से बड़ा क्या हादसा होगा जो कभी भी आसकती है !!

उफ़ यह क्या हुआ ..यह तो वास्तव में ही यमदूत  दिखाई देरहा है,नहीं यमदूत अभी नहीं मुझे क्षमा  करो और एक अवसर प्रदान करो ताकि अब में सब अच्छे काम कर सकूँ ,नहीं मूर्ख नहीं अवसर तो तुझको बहुत मिले पर तूने खो दिए ,तुझको जीवन मिला,जवानी मिली,बुद्धि मिली,ज्ञान मिला, विपक्ष मिला सत्ता पक्ष भी मिला ,सभी कुछ तूने खोदिया ,अब किस अवसर की प्रतीक्षा है रे मूर्ख नेता………क्या अब भी है तुझे किसी बड़े हादसे का इंतज़ार …..नहीं यमदूत नहीं …….बस एक मौक़ा ..जो तू खो चूका Editor ‘s  desk

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