प्रेस विज्ञप्ति
सांप्रदायिकता के खि़लाफ़ लड़ाई में सभी वर्गों को शामिल करना अनिवार्यः मौलाना अरशद मदनी
नफ़रत की समाप्ति के लिए अब हमें एकजुट हो कर मैदान में आना होगा
Delhi: 24 November. कानपुर में आयोजित आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की 27वीं बैठक में बोर्ड का उपाध्यक्ष चुने जाने के बाद जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने अपने भाषण में सबसे पहले बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं विभिन्न बीमारियों और आयु की आवश्यकताओं के कारण अब अधिक भाग दौड़ नहीं कर पाता लेकिन आपके आदेश के पालन में मुझे जो ज़िम्मेदारी दी गई है उसे पूरी करने के लिये हर संभव प्रयास करूंगा।
इसके बाद मौलाना मदनी ने कहा कि वर्तमान बोर्ड की बैठक में देश में बढ़ती हुई ख़तरनाक सांप्रदायिकता के सम्बंध में जो बातें सामने आई हैं और जिस पर बातचीत हो रही है इन बातों को लेकर सरकार की जो सोच और व्यवहार है और जिस तरह उन चीज़ों को पूरे देश में प्रस्तुत किया जा रहा है वो नफ़रत और पक्षपात पर आधारित है। शरीअत के आदेशों में हस्तक्षेप वास्तव में उसी नफ़रत और पक्षपात की राजनीति पर आधारित है, इन चीज़ों को रोकने के लिए हमारे पास कोई ताक़त नहीं है और जो लोग ऐसा कर रहे हैं उनके पास सत्ता की ताक़त है जिसे आज की दुनिया में सबसे बड़ी ताक़त समझा जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी निराशजनक स्थिति में भी आशा और विश्वास के चराग रौशन हैं। देश का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो देश की वर्तमान स्थिति को ग़लत समझता है। एक विशेष वर्ग के खि़लाफ़ पिछले कुछ वर्षों से जो कुछ हो रहा है उसे वो अच्छी नज़र से नहीं देखता, वो यह भी समझता है कि इस प्रकार की चीज़ें देश के लिए बहुत घातक हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि सांप्रदायिकता के खि़लाफ़ जंग में हम अकेले सफलता प्राप्त नहीं कर सकते, हमें न केवल उस वर्ग को बल्कि समाज के सभी समान विचारधारा के लोगों को अपने साथ लाना होगा।

