नई दिल्ली: जीएसटी विधेयक राज्यसभा में निर्विरोध पारित हो गया. बिल के समर्थन में जहां 203 वोट पड़े. हालांकि इस बीच AIADMK सांसद वोटिंग से ठीक पहले वॉकआउट कर गए. यह बिल 2017 अप्रैल से लागू होगा।
AIADMK के नवनीत कृष्णन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा, ‘यह संविधान संशोधन विधेयक खुद असंवैधानिक है, क्योंकि यह राज्यों की राजकोषीय स्वायत्ता का उल्लंघन करता है। इससे तमिलनाडु को स्थायी रूप से राजस्व की हानि होगी, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने जीएसटी के आइडिया का कभी विरोध नहीं किया. उन्होंने कहा- मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने माना कि यूपीए के समय पहली बार बिल आया था. बिल को यहां तक पहुंचने में 11 साल लगे.
भूपेंद्र यादव(बीजेपी ) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि जीएसटी के ज़रिये हम भारत को ‘एक समान बाज़ार’ के रूप में पेश कर पाएंगे. इसके बाद हम 29 अलग-अलग बाज़ारों से एक बाज़ार में तब्दील हो जाएंगे, जो हमारी ताकत होगा.
सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा, अगर लोकसभा से पारित बिल अगर राज्यसभा में लोगों के पक्ष में नहीं पाया गया, तो हम इसके खिलाफ हैं. समाजवादी के नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहते हुए भी जीएसटी बिल का समर्थन कर रही है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि लोग उन्हें भारत के आर्थिक विकास की राह का रोड़ा समझें.
जीएसटी पर गठित राज्यसभा की प्रवर समिति में बीएसपी के प्रतिनिधि रहे सतीशचंद्र मिश्रा ने कहा, ‘वस्तु एवं सेवा कर को बड़ी शक्तियां दी गई हैं. इसमें कानून में बदलाव करने की राज्य की शक्तियां छीन ली गई हैं, जिससे लोग प्रभावित होंगे.’ बीएसपी ने जीएसटी विधेयक को धन विधेयक की जगह वित्त विधेयक के तौर पर लाने के कांग्रेस की मांग का समर्थन किया, ताकि संसद के दोनों सदनों में इस पर चर्चा की जा सके. हालांकि इसके साथ ही मिश्रा ने कहा, हम उन 90% लोगों का साथ देने के लिए इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, जिन्हें उम्मीद है कि इस विधेयक से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
बीजेपी सांसद महेश पोद्दार ने जीएसटी विधेयक को ‘एक विधान, एक कराधान’ करार दिया. उन्होंने कहा, जीएसटी बिल अप्रत्यक्ष करों को आसान बनाएगा. 5-7 टैक्स कानूनों की जगह 2 कानून लोगों की जिंदगी को आसान बनाएंगे. जीएसटी लागू पर शुरू में सेवा दरें बढ़ेंगी, लेकिन बाद में इनमें कमी की जाएगी.
राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य नरेंद्र बुढानिया ने कहा, ‘मुझे इस बात की शिकायत है कि यह सरकार अब इस विधेयक पर समर्थन मांग रही है, जबकि कांग्रेस ने 4 साल पहले जब इसे पेश किया था तो वे विरोध कर रहे थे. सरकार कहती है कि जीएसटी बिल भारत की जीडीपी 1-2% बढ़ा देगी. तो फिर बीजेपी ने विपक्ष में रहते हुए इस बिल का समर्थन क्यों नहीं किया.’
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने विधेयक का समर्थन करते हुए इस विधेयक के संबंध में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के रुख पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने जिस तरह से पिछले 10 वर्षों से जीएसटी को लेकर खेल किए हैं, उसके लिए उन्हें ओलिंपिक मेडल मिल सकता था।
शिरोमणी अकाली दल के नरेश गुजराल ने सभी पार्टियों से जीएसटी बिल का समर्थन करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और वित्त मंत्री इस पर प्रशंसनीय काम के लिए बधाई के पात्र हैं.
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ‘अपना राजस्व बढ़ाने के लिए आपने (केंद्र) मुंबई का राजस्व खा लिया. वह आपके लिए मायानगरी होगी, लेकिन हमारे लिए मां है. अगर मुंबई भीख मांगने को मजबूर होगा, तो देश भी भिखारी बन जाएगा.’
कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा, जीएसटी जैसा बड़ा फैसला लोगों को जानबूझकर अंधेरे में रखकर नहीं लिया जाना चाहिए. जीएसटी दर का कानून में जरूर जिक्र हो और इसके बिना कोई कर ना लगाया जाए, ना वसूला जाए. जब आप (सरकार) जीएसटी बिल्स (राज्य, केंद्र और अंतर्राज्यीय) तो कृपया कानून में टैक्स दर तय करें.