Home Events Entertainment पहले आ गया होता तो संघर्ष इतना लंबा नहीं खिंचता’, ओटीटी के...

पहले आ गया होता तो संघर्ष इतना लंबा नहीं खिंचता’, ओटीटी के सवाल पर भावुक पंकज त्रिपाठी

0
14

ओटीटी प्लेटफार्म की लांचिंग हो और पंकज त्रिपाठी को न आमंत्रित किया जाए ऐसा नहीं हो सकता है। आज की तारीख में पंकज त्रिपाठी ओटीटी प्लेटफार्म के सबसे बड़े ब्रांड हैं।

गुरुवार को मुंबई में जब ओटीटी प्ले प्रीमियम की लांचिंग हुई तो पंकज त्रिपाठी को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। पंकज त्रिपाठी फिल्मों और ओटीटी दोनों पर काम कर रहे हैं, जब उनसे पूछा गया कि फिल्मों और ओटीटी में क्या अंतर है? तो वह कहते हैं, ‘ओटीटी के आने से सिनेमा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दोनों एक साथ रहेगा। जैसे जब हम कोई त्यौहार मनाते हैं, तो उस त्यौहार में लोग सामूहिक रूप से शामिल होते हैं। थिएटर में बॉस भी फिल्म देखता है, तो एक कोने में कहीं उसका कर्मचारी भी बैठकर फिल्म देख रहा होता है और दोनों उतना ही एन्जॉय करते हैं। इतनी खूबसूरत जगह और कहां देखने को मिलेगी!पंकज कहते हैं, ‘जब आप घर में अकेले हों तो अपना मनपसंद कोई भी शो जब चाहे देख सकते हैं। ओटीटी की विशेषता ये है कि हिंदुस्तान के बाहर आप कहीं भी रहे आप जब चाहे कोई भी शो देख सकते हैं। कभी कभी बढ़िया फिल्में दूर दूर तक नहीं पहुंच पाती है, लेकिन ओटीटी के माध्यम से आप उन फिल्मों को देख सकते हैं। ओटीटी और सिनेमा दोनों ही अच्छी चीज है और दोनों ही चलती रहेगी।’‘ओटीटी आने से कलाकारों का संघर्ष खत्म हो गया है, प्राथमिकता यह है कि एक्टर अच्छा होना चाहिए। आज मेरे सारे दोस्त बिजी हैं जिसको देखो वही काम कर रहा है। पहले फिल्मों में हीरो हीरोइन विलेन और इंस्पेक्टर होते थे आज तो ओटीटी में इंस्पेक्टर के लिए भी खास तौर पर कहानियां लिखी जा रही है।

‘सेक्रेड गेम्स’, ‘मिर्जापुर’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’ पंकज त्रिपाठी के हिट शो रहे हैं। उनका शो ‘मिर्जापुर’ तो इतना लोकप्रिय हुआ कि पंकज त्रिपाठी को लोग अब कालीन भैया के नाम से ही पुकारते हैं। पंकज त्रिपाठी कहते हैं, ‘जब मैं कहीं जाता हूं, तो एयरपोर्ट पर लोग फुसफुसाते है कि देखो, कालीन भैया आ रहे हैं। मुझे तो कभी कभी डर लगता है कि कही लोग मेरे बोर्डिंग पास पर भी मेरा नाम कालीन भैया न ढूंढने लगे।’

ओटीटी को लेकर जारी चर्चा के दौरान पंकज ने माना कि कि अगर उनके करियर के शुरुआती दिनों में ओटीटी आया होता तो उन्हें इतना भटकना नहीं पड़ता। वह कहते हैं, ‘मेरी दुकान तभी खुल गई होती और आज शोरूम बन गया होता।’

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here