राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश के हिंदुओं से एकजुट होकर “लड़ने” की अपील की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत सरकार बार-बार कहती रही है कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देती। ऐसे में संघ प्रमुख का यह बयान कूटनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है।
बांग्लादेश की स्थिति और भारत की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर से जुड़े सवाल पर भागवत ने कहा कि इस बार बांग्लादेश के हिंदुओं ने कठिन हालात में भी देश छोड़कर न भागने का फैसला किया है।
लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई ठोस आंकड़ा या आधिकारिक जानकारी सामने नहीं रखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़मीनी हालात इससे कहीं ज़्यादा जटिल हैं।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इसी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने तीन बच्चे पैदा करने की बात, सावरकर को भारत रत्न देने और विदेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी बयान दिए। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मंच से इस तरह के राजनीतिक संदेश देना, संघ की गैर-राजनीतिक दावों पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पड़ोसी देश के अल्पसंख्यकों को लेकर इस तरह की अपीलें न केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि देश के भीतर धार्मिक तनाव को भी बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान यह भी है की इस प्रकार के बयानात आगामी आसाम के चुनाव के मद्देनज़र दिलाये जा रहे हैं. जबकि आसाम के मुख्यमंत्री पहले से ही माहौल को सांप्रदायिक बनाकर धुर्वीकरण की बिसात बिछा चुके हैं.
सवाल यही है कि क्या ऐसे बयान वाकई पीड़ित लोगों की मदद करते हैं, या फिर भावनात्मक मुद्दों को घरेलू राजनीति में भुनाने का ज़रिया बनते जा रहे हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं को लेकर संघ प्रमुख ने ये पहली बार नहीं बोला है. बीते दिसंबर के अंत में कोलकाता में हुए एक सेमिनार में उन्होंने ‘बांग्लादेश में हिंदुओं को एकजुट’ रहने का आह्वान किया था.
हालाँकि आरएसएस हिंदूवादी संगठन है और हिन्दुओं के हिट के लिए ही बात करना उनकी संस्थागत ज़िम्मेदारी है. लेकिन बांग्लादेश के परिपेक्ष में इस तरह के ब्यान देश में कितना नकारात्मक प्रभाव डालेंगे इसका अंदाजा खुद भगवत को भी होगा.
उन्होंने कहा था, “वहाँ (बांग्लादेश में) हिंदू अल्पसंख्यक हैं और स्थिति काफी कठिन है. हालांकि यह मुश्किल है, लेकिन अधिकतम सुरक्षा के लिए वहाँ के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा… और दुनिया भर के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए.”
दरअसल बांग्लादेश में शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद से देश में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने भी कई बार अंतिरम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस से अपील की है.