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महंगाई की मार से गांवों में फिर जलने लगे लकड़ी के चूल्हे.

महंगाई की मार से गांवों में फिर जलने लगे लकड़ी के चूल्हे.

अप्रैल से लगातार महंगाई बढ़ रही है। रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि हुई है। दाल, तेल, आटा, सब्जी, चीनी और मसाला से लेकर अन्य वस्तुओं के दाम में भी वृद्धि हुई है। यहां तक की मोबाइल, टीवी का रिचार्ज, बैंक लोन पर ब्याज में भी इजाफा हुआ है। इसके सापेक्ष आमदनी में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। महंगाई की मार से हर वर्ग बेहाल है। ज्यादा परेशान मध्यम वर्गीय परिवार है।कुशीनगर जिले में उज्जवला योजना के कुल दो लाख 68 हजार लाभार्थी हैं। वर्ष 2016 में जब योजना शुरू की गई तो रसोई गैस के दाम 656 रुपये प्रति सिलिंडर था। वर्ष 2022 के जुलाई माह में सिलिंडर की कीमत 1065 रुपये पहुंच गई है। इस वजह से लाभार्थी सिलिंडर नहीं भरा पा रहे हैं। मजबूरन उन्हें लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ रहा है।

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महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर बांटे गए थे। लेकिन लगातार गैस के दामों में वृद्धि से गृहिणियों ने इससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में फिर से लकड़ी के चूल्हे जलने लगे हैं। खाली सिलिंडर धूल फांक रहे हैं। कई लोगों ने यह सिलिंडर दूसरों को दे दिया है। लाभार्थियों का कहना है कि रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच सिलिंडर भरा पाना अब उनके बस में नहीं है।बिंदवलिया गांव में मुसहर बस्ती में सभी घरों में लकड़ी पर खाना बन रहा है। पुष्पा, सरिता, दुलारी और महिमा ने बताया कि गैस कनेक्शन तो मिल गया, लेकिन उसका लाभ नहीं मिल रहा है। तीन-तीन महीने में कभी कभार भरवाते हैं। गर्मी के दिनों में घर के बाहर खाना बनाते हैं। जब घर में नया सिलिंडर आया था, उसी समय एक महीने खाना बनाया गया था। उसके बाद सिलिंडर से खाना नहीं बना।प्राइवेट शिक्षक अनुष्का चौरसिया ने कहा कि सात लोगों का परिवार है, दो लोग प्राइवेट संस्था में कमाने वाले हैं। दोनों का वेतन मिलाकर घर चलाना मुश्किल हो रहा है। पेट्रोल, दवा और राशन की वस्तुओं के दामों में वृद्धि हो गई है। राशन की सामग्री जहां पांच किलो खरीदी जाती थी, अब दो किलो खरीदी जा रही है। पूर्व में होने वाली बचत का आधा हिस्सा, इस बढ़ी महंगाई में खर्च हो रहा है। गैस के दाम हर महीने बढ़ रहे हैं।

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