…….. ताकि मुल्क की ज़्यादातर मस्जिदों , मदरसों ,क़ब्रस्तानों , ईदगाहों
दिल साफ़ हो किस तरह कि इंसाफ़ नहीं है
इंसाफ़ हो किस तरह कि दिल साफ़ नहीं है
दोस्तों आपको मालूम है कि वक़्फ़ क़ानून 2025 , 5 जुलाई से अमल में आगया है . Parliament में विपक्ष द्वारा इस क़ानून की लाख मुख़ालफ़त के बावजूद सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी रही . अब सर्कार ने ज़िला लेवल पर पटवारियों को आदेश दे दिये हैं की वो वक़्फ़ जायदादों की तफ़सील सरकार को जल्द से जल्द सौंप दे.
अब ये सारे काम इतनी उजलत में और आनन् फानन हो रहे हैं की वाक़िफ़ या वक़्फ़ जायदादों की देखरेख करने वालों की तरफ़ से formalities पूरी करने तक के लिए वक़्त नहीं दिया जा रहा है.
इससे आप सरकार की नीयत का अंदाज़ा लगा सकते हैं. सरकारें नागरिकों कि लिए सुविधाएँ तैयार करने कि लिए होती हैं. नागरिकों कि अधिकारों की रक्षा कि लिए काम करती हैं. मगर यहाँ जो कुछ भी हो रहा है वो सब आपके सामने है.
वक़्फ़ कि सिलसिले में जो काम सरकारें 1913 से 2025 यानी 102 साल में नहीं कर पाईं उसके लिए ऐसी क़ौम को सिर्फ 180 दिन दिए गए हैं जिसको पहले ही मेहनत मज़दूरी से फुर्सत नहीं है. जो अभी अपने उधड़े हुए को सीने में लगी हुई है, उसको मज़ीद एक साज़िश के तहत रोज़ नए नए मसलों में उलझाया जा रहा है.
आपको पता होगा 5 दिसंबर 2025 Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development. यानी (Umeed पोर्टल) पर waqf में रजिस्टर्ड Properties को upload करने की Deadline 5 दिसंबर 2025 दी गई है .
हालाँकि इस तारीख़ को आगे बढ़ाने के लिए Supreme court में Apeals लगी हुई हैं, लेकिन उसमें रहत की उम्मीद कम है. 6 माह अगर बढ़ा भी दिए जाएँ तो भी यह वक़्त बहुत कम है. लेकिन अहसान बड़ा जताया जाएगा हमने तो पूरा मौक़ा दिया अल्पसंख्यकों को वक़्फ़ जायदादों को अपलोड करने का इत्यादि.
… खैर यह तो सरकार की तैयारियां हैं लेकिन सवाल यह है कि वक़्फ़ जायदादों के Costodians और मुतव्वलियों और आम मुसलमानों की तैयारी क्या है ? क्या अभी भी हराम आमदनी जेब में डालकर हलाल मीट की दुकान को ढूंढ़ने में लगा है? क्या आपस में एक दुसरे पर फतवों का सिलसिला चलेगा या होश कि नाखून लेगा ये मुसलमान??
लोगों से बात करने पर पता चला कि शहर क़ाज़ी और ग्राम प्रधानों तक को न तो UMEED Portal के बारे में कुछ पता है और न ही शहर की वक़्फ़ जायदादों की तफ्सील का कोई इल्म है इन हज़रात को. मस्जिद के इमाम या आम मुस्लमान की बात तो आप छोड़ ही दें, वो तो बेचारा किसी सूरत से अपने बच्चों का पेट भरने में लगा है आगे सोचने का कोई मौक़ा ही नहीं है.
लेकिन All India मुस्लिम Personal Law Board और कुछ फ़िक्रमंद हज़रात ने मिलकर regitered waqf Properties को Umeed Portal पर अपलोड कराने और नए Registration कराने के लिए हंगामी तौर पर कोशिश शुरू करदी है जिसके बाद मिल्लत में उम्मीद की किरण जागी है. हालांकि यही काम 10 साल पहले होना चाहिए था, और शायद इन लापरवाहियों का सरकार को इल्म था.
अब इस पूरे मामले में कई वकीलों , समाज सेवी तंज़ीमों और रज़ाकारों ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ मिलकर काम शुरू किया है. हालांकि जिस रफ़्तार से और नज़्म के साथ होना चाहिए अभी भी नहीं हो रहा है , लेकिन हो रहा है. देश में कई Active तंज़ीमों और लोगों ने बेदारी मुहीम चला दी है, लेकिन यह सोइ हुई क़ौम बेदार होने को भी तैयार नहीं है.
इस सिलसिले में Times Of Pedia Youtube चैनल भी एक वीडियो बनाई है , जिसपर तफ़सील से और आसान ज़बान में सवाल जवाब तैयार किये हैं. इस वीडियो में Advocate शोएब साहब ने वक़्फ़ मामलों के जानकार Advocate ज़हीर अहमद खान से बहुत अहम् और बुनियादी सवाल पूछे हैं जिससे वक़्फ़ जायदादों के तहफ़्फ़ुज़ में काफ़ी मदद मिल सकती है . इस वीडियो को हिंदुस्तान के हर मुस्लमान को देखना चाहिए ताकि मुल्क की ज़्यादातर मस्जिदों , मदरसों ,क़ब्रस्तानों , ईदगाहों और ख़ानक़ाहों को बचाया जा सके .
उम्मीद है इस बातचीत से आपको बहुत कुछ पता चल गया होगा , मज़ीद मालूमात के लिए हम आपको यहाँ कुछ Contact Nos आपके स्क्रीन पर चल रहे हैं जिसपर आप मैसेज के ज़रिये या कॉल के ज़रिये मालूमात हासिल कर सकते हैं.
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