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दिल्ली MCD चुनाव : कट्टरवाद पर लड़े गए ?

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Ali Aadil khan

Editor’s Desk 

कट्टर ईमानदार और कट्टर बे ईमान के बीच हुई कांटे की टक्कर

आप प्रवक्ता राघव चड्डा ने कहा चुनाव कट्टर ईमानदार और कट्टर बे ईमान के बीच हुआ । दिल्ली की जनता ने कट्टर ईमानदार पार्टी आप को बहुमत दिया ।ज्ञात रहे आप के नेता कट्टरवाद का प्रयोग अक्सर कर रहे हैं . कट्टरवाद को आप का बढावा कोई अच्छे संकेत नहीं देता ।

अहमदाबाद में एक रोड शो के दौरान ABP न्यूज़ के पत्रकार ने मनीष सिसोदिया से सवाल किया कि आप (आम आदमी पार्टी) बिलकिस बानो पर बात नहीं करते, मुसलमानों पर बात नहीं करते… सॉफ्ट हिंदुत्व पर चल रही है आम आदमी पार्टी

इसके जवाब में मनीष सिसोदिया ने कहा,

“हम लोग शिक्षा पर चल रहे हैं, स्कूल-अस्पताल पर चल रहे हैं, नौकरियों पर चल रहे हैं… हमको इनसे मतलब नहीं है. जिसको जिससे मतलब है वो उस पर बात कर रहा है.” हालांकि बिल्क़ीस बानो का केस समुदाय के साथ न इंसाफ़ी का मामला नहीं है बल्कि यह देश कि न्यायिक सिस्टम पर सवाल खड़े करता है . यह मामला सीधे सीधे अपराधियों कि होंसला अफ़ज़ाई करता है .

तो आप के नेताओं के भाषणों में कट्टर ईमानदार और कट्टर देशभक्त जैसे जुमले किसी ख़ास विचार धारा के समानांतर लगते हैं . उस विचार धारा से जोड़ते हैं जो महात्मा गाँधी के हत्यारे को अपना लीडर मानते हैं .बहरहाल …..

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“आप” को दिल्ली नगर निकाय के चुनाव जितनी उम्मीद थी उतनी सीट नहीं मिली मगर सरकार बनाने में कामयाब हो गयी .दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन में मेयर बनाने के लिए 126 पार्षदों का आंकड़ा दरकार है ।मगर सरकार बनाने के लिए जो संख्या चाहिए उससे 8 सीटें ज़्यादा आप के पास हैं .

कुल 250 वार्डों में से आप को 134 , बीजेपी को 104 और कांग्रेस को 9 वार्ड मेंबर्स मिले हैं . यानि अब आम आदमी पार्टी अपना मेयर बनाएगी और MCD में सरकार चलायेगी .

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लेकिन AAP को कहीं न कहीं यह खतरा भी लाहक़ है कि अगर बीजेपी उनके 9 पार्षदों को खरीद लेती है तो फिर दिल्ली में मेयर के लिए जोड़ तोड़ की राजनीती शुरू होगी . और जोड़तोड़ में बीजेपी महारत रखती है . दुसरे MCD में Anti Detection Law भी लागू नहीं होता .

इसलिए कोई भी जीता हुआ प्रत्याशी कहीं भी जा सकता है । यह एक बड़ा खतरा “आप” के लिए बना हुआ है .

इस बार वोट शेयर “आप” का काफी बढ़ा है . 2017 में 26.23 % वोट शेयर था जो इस बार 42.05 % पर पहुंच गया है । जबकि बीजेपी का वोट share 2017 में 36.08 % था जो 2022 में 38.97 % तक पहुंचा यानि वोट शेयर दोनों का ही बढ़ा .

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जबकि कांग्रेस का 2022 में 11.68% रहा वहीँ 2017 में 21.09% रहा था . इस तरह बीजेपी और ” आप ” के वोट share में कोई बड़ा फर्क़ नहीं है ।

“आप” दिल्ली और पंजाब विधान सभाओं से कॉंग्रेस को तो सत्ता से बाहर कर ही चुकी थी . अब बीजेपी को भी बाहर का रास्ता दिखाने का सिलसिला शुरू हो गया है ।मज़ीद 8 दिसंबर को जब गुजरात विधान सभा के नतीजे सामने आएंगे उससे तस्वीर और साफ़ हो जायेगी .

ऐसे में कॉंग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी से भी मुक्ति का सिलसिला दिल्ली MCD से शुरू हो गया है .

दिल्ली MCD चुनाव की ख़ास बात यह रही की इसमें बीजेपी ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी . बीजेपी के राष्ट्रीय बड़े नेता , 7 CM अनगिनत सांसद , केंद्रीय मंत्री इस चुनाव में प्रचार कर रहे थे. इसका मतलब बीजेपी के लिए यह चुनाव बहुत Important थे .

मगर जनता के आगे किसकी चलती है . रहा Congress का सवाल तो इस बार कांग्रेस के बड़े अधिकतर नेता देश को जोड़ने में लगे हुए है वोट बटोरने की तरफ़ फ़िलहाल उनका ध्यान नहीं है .और दिल्ली MCD चुनाव तो कांग्रेस ने लादा ही नहीं

एक और खास बात यह रही कि बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष के इलाके में बीजेपी का सूपड़ा साफ़ होगया । मनीष सिसोदिया के विधान सभा क्षेत्र में आप का हाल अच्छा नहीं रहा । सत्येंद्र जैन और गोपाल राय के छेत्रों में भी आप का सफ़ाया रहा ।

इस बात से अंदाजा यह लगाया जा सकता है की आम तौर से जनता नेता की छवि पर नहीं पार्टी level पर फ़ैसले लेती है ।

अब केजरीवाल की पार्टी आप के लिए जो बड़ी चुनौती होने वाली है वो है करप्शन free mcd , क्योंकि MCD करप्शन का बड़ा विभाग माना जा रहा है।

देखना यह है कि क्या अब मोदी ब्रांड पर केजरीवाल ब्रांड हावी होगया है ? क्या कट्टर बे ईमान पर कट्टर ईमानदार पार्टी का पलड़ा भारी हो गया है .

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