वाराणसी,07 अगस्त । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के प्राकट्योत्सव के अवसर पर दुर्गाकुण्ड स्थित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मण्डल द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित करपात्र रत्न एवं करपात्र गौरव सम्मान की घोषणा हो गई। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज की अध्यक्षता में चयन समिति ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक व्याकरण के प्रकाण्ड विद्वान आचार्य पं. गायत्री प्रसाद पाण्डेय को करपात्र रत्न एवं करपात्र चिंतन के विशिष्ट विद्वान एवं उनके कृपा पात्र शिष्यों में से एक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र को करपात्र गौरव सम्मान के लिए चुना। शुक्रवार को धर्मसंघ महामंत्री पं.जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि धर्मसम्राट के प्राकट्य दिवस पर प्रतिवर्ष यह सम्मान करपात्र चिंतन से जुड़े विद्वानों को दिया जाता है, इस वर्ष 119 वें प्राकट्य दिवस के अवसर पर 14 अगस्त के दिन इन दोनों विद्वतजनों को यह सम्मान भव्य समारोह में प्रदान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि करपात्र रत्न के लिए चयनित पं. गायत्री प्रसाद पाण्डेय ने करपात्र चरितामृतं पुस्तक लिखी है इसके अलावा उनका श्रीमद भागवत का पद्यानुवाद भी काफी प्रसिद्ध रहा। उन्होंने दर्जनभर पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है। उन्हें सम्मान स्वरूप सवा लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र, श्रीफल प्रदान किया जाएगा।
पं. जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि करपात्र गौरव के लिए चुने गए डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र स्वामी करपात्री जी महाराज के अत्यंत कृपापात्र शिष्य रहे है और करपात्र चिंतन के विशिष्ट विद्वानों में से एक है। वे लम्बे समय तक धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के लेखन सचिव भी रहे है और हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज से रीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए है। उन्हें सम्मान स्वरूप 51 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र, श्रीफल प्रदान किया जायेगा।

