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लोकगीत महिलाओं के जीवन, श्रम और योगदान के महत्वपूर्ण दस्तावेज : प्रो. स्मिता तिवारी

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प्रयागराज, 29 सितंबर । लोकगीत महिलाओं के जीवन, उनके श्रम, अनुभवों और सामाजिक योगदान को समझने के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनमें महिलाओं के दैनिक जीवन, जिम्मेदारियों और सामाजिक-आर्थिक भागीदारी की ऐसी स्मृतियां सुरक्षित हैं, जो पारंपरिक इतिहास लेखन में अक्सर दर्ज नहीं हो पातीं। यह बातें मंगलवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित वार्षिक व्याख्यान में अशोका विश्वविद्यालय, सोनीपत की सामाजिक मानवशास्त्र की विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. स्मिता तिवारी जस्सल ने कही।

महिला अध्ययन केंद्र की ओर से कला संकाय स्थित तिलक भवन में लोककथा और आख्यान : एक नारीवादी दृष्टि विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।

प्रो. स्मिता तिवारी जस्सल ने कहा कि लोक परंपराएं महिलाओं के अनुभवों और उनकी आवाज को एक ओर संरक्षित एवं आगे बढ़ाती हैं, वहीं कई बार उन्हें मौन भी करती हैं। इसलिए लोककथाओं और आख्यानों को महिलाओं के अनुभवों के दृष्टिकोण से समझना जरूरी है।

उन्होंने ‘लोरिकायन’ का उदाहरण देते हुए लोक आख्यानों के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इतिहास में महिलाओं पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए। कुछ परिस्थितियों में उन्हें लोकगीत गाने तक से रोका गया। ऐसे उदाहरण महिलाओं की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और समाज में उनकी भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल सामने लाते हैं।

प्रो. जस्सल ने कहा कि लोकगीतों में महिलाओं के दैनिक श्रम, अनुभव, जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन में उनकी भागीदारी की झलक मिलती है। इन्हें समझने से उन महिलाओं के योगदान को सामने लाया जा सकता है, जिनकी भूमिका औपचारिक इतिहास में पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो पाई है। उन्होंने लोक परंपराओं में संरक्षित महिलाओं की आवाज को सुनने और उनके अनुभवों को पहचानने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. जया कपूर के स्वागत वक्तव्य से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. इंद्राणी मुखर्जी ने की। उन्होंने लोक परंपराओं और आख्यानों के अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन अपूर्वी राय ने किया।

कार्यक्रम में कला संकाय के डीन प्रो. अजय जेटली प्रो. कुमार वीरेंद्र, डॉ. सतीश प्रजापति, डॉ. उमेश, डॉ. रजनी समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में गुरपिंदर कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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