एल.एस. हरदेनिया की रिपोर्ट
UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों की खस्ता हालत पर ज़ोरदार हमला बोला
क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि जिस पार्टी की राज्यपाल ने उसी पार्टी की कमियों के ऊपर जबरदस्त हमला किया है। आनंदीबेन पटेल उत्तरप्रदेश की राज्यपाल हैं। राज्यपाल होने के नाते वे विश्वविद्यालय की चांसलर भी हैं।
उन्होंने यह दावा किया है कि उन्होंने उत्तरप्रदेश के कई विश्वविद्यालयों का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने ऐसी कमियां पाईं जिन्हें सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ। अभी हाल में वो गोरखपुर गईं थीं।
वहां एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में अध्यक्षता उन्हें करनी थी। इस दरम्यान उन्होंने विश्वविद्यालय के हॉस्टल का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान जो कुछ उन्होंने पाया वह दिल दहलाने वाला था।
उन्होंने अपनी बात रखने से पहले यह स्पष्ट किया कि मैं जो कुछ कह रही हूँ वो राज्यपाल और विश्वविद्यालय की चांसलर के रूप में नहीं बल्कि एक माँ के रूप में कह रही हूँ। मैंने विश्वविद्यालय के हॉस्टल में जो कुछ देखा वह दिल दहलाने वाला था।
हॉस्टल में उन्होंने किसी भी बच्चे को पौष्टिक खाना खाते नहीं देखा। इसकी चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को उपयुक्त खाना मिलना चाहिए। इसके अभाव में वे कैसे देश के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे।
इस विश्वविद्यालय में नौ हॉस्टल हैं जिसमें से 6 लड़कों के लिए हैं और 3 लड़कियों के लिए हैं। इन 9 हॉस्टलों में से उन्होंने किसी भी हॉस्टल में ऐसी व्यवस्था नहीं पाई जहां बच्चों को स्वस्थ भोजन, स्वस्थ वातावरण, साफ पानी मिल सके।
वे कहती हैं कि हॉस्टलों की मेस बहुत ही खस्ता हालत में हैं। लड़कों के हॉस्टल में तो मेस चल ही नहीं रहा। मुझे बताया गया कि बाहर से टिफिन आता है। उन्होंने कहा कि टिफिन में स्वस्थ खाना आ रहा है या नहीं इसके संबंध में मैंने जांच की।
इसकी जांच मैंने गोरखपुर में भी करवाई है और कुछ की जांच में लखनऊ में करवाऊंगी। क्या टिफिन में स्वस्थ खाना आ रहा है? क्या वह अच्छे तेल में पकाया जा रहा है? लड़कों के हॉस्टल में मेस क्यों नहीं खोला जा रहा है? क्यों उनको स्वस्थ खाने की व्यवस्था नहीं की जा रही है?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि गोरखपुर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है। वहां के वे मुखिया भी हैं, और वहां से वे कई बार लोकसभा में चुनकर गए और इस समय वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं।
उनके होते हुए यदि ये हालत है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि उत्तरप्रदेश के और विश्वविद्यालयों का क्या हाल होगा। न सिर्फ इस विश्वविद्यालय की हालत खराब है बल्कि इसकी प्रयोगशाला की हालत भी खस्ता है। प्रयोगशाला में पानी की टोंटी तो लगी हुई हैं पर उनमें पानी नहीं आता।
उत्तरप्रदेश के विश्वविद्यालय की खस्ता हालत पर राज्यपाल का गुस्सा विस्तृत रूप में इंडियन एक्सप्रेस में छपा है। उसका संक्षिप्त रूप मैं यहां दे रहा हूँ, वह भी कितना भयावह है।

