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समुद्र मंथन की थीम पर सजेगा कुंभ का स्वागत द्वार, मंडावर से दिखेगी देवभूमि की सांस्कृतिक झलक

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हरिद्वार, 17 अगस्त । आगामी कुंभ मेला-2027 में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए उत्तर प्रदेश की सीमा पर मंडावर-छुटमलपुर में भव्य स्वागत द्वार आकार ले रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा और कुंभ की आध्यात्मिक परंपरा को केंद्र में रखकर तैयार किया जा रहा यह प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के लिए महज स्वागत स्थल नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान की पहली भव्य झलक भी प्रस्तुत करेगा।

मेला प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्मित कराए जा रहे इस स्वागत द्वार के लिए राज्य सरकार ने 204.19 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। करीब साढ़े छह मीटर ऊंचे इस द्वार को कुंभ नगरी हरिद्वार की ओर बढ़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रवेश बिंदु के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके वास्तुशिल्प और सज्जा में कुंभ की आध्यात्मिक महत्ता के साथ उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई देगी।

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ेगा कुंभ का आध्यात्मिक संदेश

भारतीय पौराणिक परंपरा में समुद्र मंथन की कथा का कुंभ पर्व से गहरा संबंध माना जाता है। समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कलश और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं कुंभ की आध्यात्मिक अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में समुद्र मंथन की थीम पर आधारित यह स्वागत द्वार श्रद्धालुओं को कुंभ की पौराणिक एवं आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ने का काम करेगा।

कई राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की पहली भव्य झलक

मंडावर-छुटमलपुर मार्ग उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख मार्गों में शामिल है। ऐसे में मंडावर में निर्मित होने वाला यह स्वागत द्वार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए कुंभ नगरी की पहली भव्य झलक बनेगा।

दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य

स्वागत द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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