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सनातन ज्ञान परंपरा के 11 खंडों के विश्वकोश ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ धनखड़ को भेंट

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ऋषिकेश, 06 अक्टूबर । भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़े महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ के सभी 11 खंड भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को आज यहां परमार्थ निकेतन में मंगलवार को भेंट किए गए।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं इंडिया हेरिटेज रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने धनखड़ को ये खंड भेंट किए। इस अवसर पर धनखड़ ने सपरिवार परमार्थ निकेतन में आयोजित विश्व शांति हवन में भी भाग लिया।

परमार्थ निकेतन के अनुसार, ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ में भारतीय सभ्यता, दर्शन, अध्यात्म, इतिहास, विज्ञान, कला, स्थापत्य, संस्कृति और परंपराओं से संबंधित करीब 7,000 प्रविष्टियां शामिल हैं। इसके निर्माण में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के 1,000 से अधिक विद्वानों का योगदान बताया गया है।

इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि वर्ष 1987 में हिंदू धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रामाणिक विश्वकोश की आवश्यकता का संकल्प लिया गया था। दो दशक से अधिक समय तक चले शोध, संपादन, संकलन और विद्वानों के सहयोग के बाद यह कार्य 11 खंडों के रूप में सामने आया। साध्वी भगवती सरस्वती ने भी इसके शोध, संपादन, समन्वय और संकलन में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि विश्वकोश का उद्देश्य हिंदू धर्म को केवल धार्मिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि भारत की व्यापक ज्ञान-संस्कृति और सभ्यता को अकादमिक एवं शोधपरक रूप में सामने रखना है। उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक स्मृति और वैश्विक ज्ञान-संवाद के बीच सेतु बताया।

परमार्थ निकेतन के मुताबिक, विश्वकोश के अंतरराष्ट्रीय संस्करण को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन में भेंट किया गया था। इसके बाद नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इसका लोकार्पण हुआ था। लंदन में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी इसके अंतरराष्ट्रीय संस्करण का शुभारंभ किया था।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा उसकी महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है और अपनी संस्कृति, इतिहास, शास्त्रों तथा जीवन-दृष्टि को समझना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह विश्वकोश हजारों वर्षों की भारतीय चेतना, चिंतन और संस्कृति को एक व्यापक ज्ञान-संकलन के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है।

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