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उज्जैन में मस्जिद पर बुलडोज़र का……

उज्जैन में मस्जिद पर बुलडोज़र का......

उज्जैन में मस्जिद पर बुलडोज़र का......

Edited by Ali Aadil khan 

उज्जैन में मस्जिद पर बुलडोज़र का साया, सिंहस्थ कुंभ की तैयारी के बीच तनाव

सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर विवाद, पथराव के बाद आंसू गैस और लाठीचार्ज; मुस्लिम पक्ष ने खुद कुछ हिस्सा हटाया, प्रशासन ने मीनार का हिस्सा हटाया

उज्जैन, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश का धार्मिक शहर उज्जैन इन दिनों एक ऐसे विवाद के केंद्र में है, जिसमें धर्म, विरासत, सड़क विकास, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था—सभी सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं।

शहर की ऐतिहासिक शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने को लेकर पिछले कई दिनों से तनाव बना हुआ है। यह सड़क परियोजना वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों का हिस्सा है। सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, पथराव हुआ और पुलिस ने आंसू गैस तथा लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इसके बाद इलाके में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई।

आखिर पूरा मामला क्या है?

विवाद उज्जैन के छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद से जुड़ा है। उज्जैन नगर निगम एक सड़क को चौड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है। प्रशासन के अनुसार यह सड़क कांठल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग का हिस्सा है और इसे लगभग 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है।

इस सड़क का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सिंहस्थ कुंभ के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रशासन का कहना है कि भीड़ और यातायात को व्यवस्थित करने तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू रखने के लिए सड़क का चौड़ीकरण जरूरी है।

नगर निगम का कहना है कि सड़क की प्रस्तावित सीमा में आने वाली कई Structures को हटाया गया है। हाईकोर्ट के समक्ष प्रशासन ने यह भी बताया था कि इसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से हटाए जा चुके हैं और लगभग 80 धार्मिक स्थलों से जुड़ी संरचनाओं पर विभिन्न कार्रवाइयां की गई हैं।

मस्जिद का कितना हिस्सा हटाया जाना है?

मस्जिद पक्ष के अनुसार नगर निगम की कार्रवाई से नमाज की जगह के एक हिस्से, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और सामने के मज़हर चौक शाही का हिस्सा प्रभावित हो सकता है। शुरुआत में प्रशासन की मांग लगभग 9 से 9.5 फीट तक के हिस्से को हटाने की बताई गई थी। बाद की बातचीत में यह हिस्सा घटाकर लगभग 3 फीट करने पर सहमति बनी।

मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत के बाद मुस्लिम पक्ष ने प्रभावित हिस्से को स्वयं हटाने पर सहमति जताई। 29 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार मस्जिद कमेटी के सदस्य खुद उस हिस्से को हटाने में लगे थे। लेकिन इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

सोमवार को अचानक क्यों भड़का तनाव?

28 सितंबर की रात बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए। लोगों को आशंका थी कि प्रशासन मस्जिद को रात में ही तोड़ने की कार्रवाई कर सकता है। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर AI से बनाए गए कुछ वीडियो और भ्रामक सामग्री प्रसारित हुई, जिनमें कथित तौर पर पूरी मस्जिद को गिराते हुए दिखाया गया था। पुलिस का कहना है कि इससे लोगों में भ्रम और तनाव बढ़ा,अगली सुबह स्थिति बिगड़ गई।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस पर पथराव किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। कई लोगों के घायल होने तथा गिरफ्तारियों की भी खबर सामने आई।

पुलिस ने सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच शुरू की है। Indian Express के अनुसार पुलिस ने पांच सोशल मीडिया पेज/इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ FIR दर्ज करने और 15 लोगों की गिरफ्तारी की बात कही थी।

मुस्लिम पक्ष ने खुद क्यों हटाया मस्जिद का हिस्सा?

मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि सड़क चौड़ीकरण में जितना हिस्सा आ रहा है, उसे समुदाय स्वयं हटाएगा।

मस्जिद कमेटी से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि समुदाय सिंहस्थ की तैयारियों और सड़क परियोजना का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि कोशिश यह थी कि धार्मिक स्थल को जितना संभव हो उतना सुरक्षित रखा जाए।

India Today के अनुसार, समझौते के बाद मुस्लिम पक्ष ने स्वयं प्रभावित दीवार/संरचना को हटाना शुरू किया और हाईकोर्ट में भी दोनों पक्षों ने समझौते की जानकारी दी। अदालत ने संबंधित आश्वासनों को बाध्यकारी माना।

दूसरी ओर, 30 सितंबर की Al Jazeera रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया कि मुस्लिम पक्ष को डर था कि अगर उन्होंने खुद हिस्सा नहीं हटाया तो प्रशासन बड़ी कार्रवाई कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, समुदाय के लोगों ने हथौड़े और रॉड से मस्जिद के प्रभावित हिस्से को स्वयं हटाना शुरू किया।

मीनार को लेकर क्या हुआ?

30 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद परिसर की मीनार के एक हिस्से को प्रशासन की ओर से हटाया गया। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट है कि कार्रवाई मस्जिद के पूरे भवन को गिराने की नहीं बल्कि सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित हिस्सों को हटाने की है। इलाके को सील कर दिया गया है और भारी पुलिस बल तथा RAF की तैनाती की गई है। दुकानों को बंद रखने और इलाके में फ्लैग मार्च की भी रिपोर्ट है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सितंबर में मस्जिद के हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत के सामने नगर निगम ने तर्क दिया कि सड़क चौड़ीकरण Ujjain Development Plan 2035 का हिस्सा है और सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त जगह जरूरी है।

मस्जिद पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का हवाला देते हुए धार्मिक स्थल की सुरक्षा का सवाल उठाया था।

लेकिन अदालत ने माना कि केवल किसी संरचना के धार्मिक स्थल होने से वह वैध विकास कार्यवाही से स्वतः सुरक्षित नहीं हो जाती, यदि कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाई गई हो। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि सड़क के उसी हिस्से में अन्य धार्मिक संरचनाओं पर भी कार्रवाई हुई है।

इसके बाद 29 सितंबर को समझौते के आधार पर संबंधित अपीलों का भी निपटारा हुआ।

क्या यह सिर्फ सड़क चौड़ीकरण का मामला है?

प्रशासन का पक्ष: यह कार्रवाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ 2028 के दौरान यातायात प्रबंधन के लिए है। प्रशासन और नगर निगम ने अदालत में कहा कि सड़क के रास्ते में आने वाली दूसरी संरचनाओं पर भी कार्रवाई की गई है।

मस्जिद पक्ष की चिंता: मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह एक पुराना धार्मिक स्थल है और इसके हिस्से को हटाने से उसके धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप पर असर पड़ता है। समुदाय ने वैकल्पिक रास्ते या कम नुकसान वाली व्यवस्था की मांग भी उठाई थी।

कानूनी स्थिति:
उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के अनुसार हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है और बाद में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को भी रिकॉर्ड किया गया।

असली सवाल अब क्या है?

उज्जैन का विवाद सिर्फ कुछ फीट जमीन का विवाद नहीं रह गया है। एक तरफ सरकार के सामने 2028 के सिंहस्थ कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के लिए सड़क, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था का सवाल है। दूसरी तरफ एक पुराने धार्मिक स्थल के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भावनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता का प्रश्न है।

और तीसरा सवाल है—क्या विकास परियोजनाओं में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को इस तरह सुलझाया जा सकता है कि न विकास रुके और न किसी समुदाय को यह महसूस हो कि उसकी धार्मिक या ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है?

उज्जैन में सोमवार की हिंसा यह जरूर दिखाती है कि ऐसे मामलों में सिर्फ प्रशासनिक आदेश पर्याप्त नहीं होते; संवाद, पारदर्शिता और अफवाहों पर नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल शाही मस्जिद के आसपास भारी सुरक्षा है और प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया जारी है। पूरी मस्जिद गिराए जाने की बात उपलब्ध ताज़ा रिपोर्टों में नहीं है; मामला सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्धारित हिस्से को हटाने तक सीमित बताया गया है।

एक लाइन में पूरी खबर

“सिंहस्थ 2028 की तैयारी में उज्जैन की सड़क चौड़ी हो रही है, लेकिन शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्रवाई ने विकास बनाम धार्मिक विरासत और कानून-व्यवस्था का बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।”

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