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मौसमी बीमारियों व स्वाइन फ्लू पर विशेष निगरानी के निर्देश

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जयपुर, 25 अगस्त । बारिश के मौसम में बढ़ने वाली मौसमी बीमारियों को लेकर राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस और स्वाइन फ्लू सहित अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं बचाव गतिविधियों की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को हाई रिस्क क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार टीमें गठित कर नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

मंत्री खींवसर ने सभी संयुक्त निदेशकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रो-एक्टिव एप्रोच के साथ काम करने तथा मौसमी बीमारियों की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा।

उन्होंने स्वाइन फ्लू की रोकथाम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए जांच और उपचार सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा इसकी सघन मॉनिटरिंग पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक में चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की संख्या के अनुसार चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा स्टाफ की तैनाती करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में मानव संसाधन का नियोजन इस तरह किया जाए कि मरीजों को उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में एक पद पर एक से अधिक व्यक्ति नियोजित नहीं रहें।

उन्होंने संयुक्त निदेशकों को ऐसे चिकित्सा संस्थानों की रिपोर्ट तीन दिन में भेजने के निर्देश दिए, जहां निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध नहीं है। मंत्री ने प्रदेशभर में संचालित फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रोमा सेंटर में आवश्यक तीन चिकित्सकों की टीम यानी ट्रायो पूर्ण रखने पर जोर दिया। साथ ही सभी चिकित्सा संस्थानों में जरूरी जांच सुविधाओं, दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने उपकरणों के नियमित रूप से क्रियाशील रहने की भी निगरानी करने को कहा।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के अधिकांश उच्च चिकित्सा संस्थानों में सीटी और एमआरआई जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन संस्थानों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के माध्यम से सीटी-एमआरआई जांच सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही जिलों में हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही जांच सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन सेवाओं को लेकर विस्तृत फीडबैक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने जैसलमेर जिले में आयोजित होने वाले रामदेवरा मेले को देखते हुए चिकित्सा व्यवस्थाओं को समय पर मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की मांग के अनुसार पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

बैठक में सेतु एप के माध्यम से रेफरल प्रबंधन, टीबी मुक्त भारत अभियान, एचपीवी टीकाकरण, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पीसीटीएस प्रसव वॉच कार्यक्रम और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन की भी समीक्षा की गई। संबंधित नोडल अधिकारियों ने इन योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति पर प्रस्तुतीकरण दिया।

बैठक में अतिरिक्त मिशन निदेशक (एनएचएम) डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक (आरसीएच) डॉ. मधु रतेश्वर, अतिरिक्त निदेशक (अस्पताल प्रशासन) डॉ. नरोत्तम शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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