उल्लेखनीय है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और विचारक श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को मांडवी (कच्छ) गुजरात में हुआ था। वे एक प्रखर राष्ट्रशास्त्री, पत्रकार और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमए व बार-ऐट-लॉ की उपाधि पाने वाले पहले भारतीय हैं।
उन्होंने विदेश में रहकर क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करने के लिए 1905 में लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की। बाद में यह केंद्र वीर सावरकर और मदनलाल ढींगरा जैसे क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बना।
क्रांतिकारी विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने द इंडियन सोशियोलोजिस्ट नामक पत्रिका निकाली। मांडवी का क्रांति तीर्थ उनकी स्मृति और भारत के क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम को जीवंत बनाता है। यहां उनकी विरासत को संरक्षित किया गया है।
इस स्मारक में श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी पत्नी भानुमती की अस्थियां भी हैं। उनकी अस्थियां 55 वर्ष के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान स्विट्जरलैंड से वापस लाई गईं और पूरे राजकीय सम्मान के साथ क्रांति तीर्थ में स्थापित की गईं। गुजरात खनिज विकास निगम लिमिटेड 2010 से क्रांति तीर्थ का रखरखाव कर रहा है।

